देश के निजी बैंकिंग सेक्टर में बड़े डिफॉल्टर्स के खिलाफ कार्रवाई तेज हो रही है। Axis Bank ने खुलासा किया है कि वह लगभग ₹66,338 करोड़ की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है और फरवरी 2026 तक 3,209 मुकदमे दर्ज कर चुका है। यह डेटा क्रेडिट रेटिंग एजेंसी TransUnion CIBIL को सौंपा गया है, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि बड़े डिफॉल्टर्स की सूची में बैंक का एक्सपोज़र काफी बड़ा है।
बड़े डिफॉल्टर्स की लिस्ट: कौन-कौन शामिल?

बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन कंपनियों से पैसा वापस लाना है, जिन्होंने हजारों करोड़ का कर्ज लेकर भुगतान नहीं किया।
1. सबसे बड़ा डिफॉल्टर
- Pratibha Industries
- बकाया: ₹13,795 करोड़
- स्थिति: दिवालिया प्रक्रिया, जांच एजेंसियों की कार्रवाई
यह कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़ी है और इस पर आरोप है कि उसने प्रोजेक्ट कॉन्ट्रैक्ट्स को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और फंड्स का गलत इस्तेमाल किया। इस मामले में Central Bureau of Investigation और Enforcement Directorate भी जांच कर रहे हैं।
2. दूसरा बड़ा डिफॉल्टर
- Lavasa Corporation
- बकाया: ₹3,767 करोड़
पुणे के पास प्राइवेट प्लान्ड सिटी प्रोजेक्ट के लिए चर्चित यह कंपनी भी दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है।
3. अन्य प्रमुख डिफॉल्टर्स
- Cox & Kings – ₹2,632 करोड़
- Bombay Rayon Fashions – ₹2,357 करोड़
- Gujarat NRE Coke – ₹2,431 करोड़
बड़े कॉर्पोरेट नाम भी सूची में
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बड़े कारोबारी समूह भी डिफॉल्टर्स की सूची में शामिल हैं:
- Lanco Group – ₹2,024 करोड़
- Reliance Capital – ₹1,772 करोड़
इसके अलावा:
- Coastal Projects – ₹1,624 करोड़
- Ramsarup Industries – ₹1,143 करोड़
- Educomp Solutions – ₹1,025 करोड़
₹600–₹1,000 करोड़ के बीच डिफॉल्ट करने वाली कंपनियां
इस श्रेणी में भी कई कंपनियां शामिल हैं, जिनका बैंक पर भारी कर्ज है:
- Simplex Infrastructure – ₹863 करोड़
- GOL Offshore – ₹736 करोड़
- Vidarbha Industries Power – ₹667 करोड़
- Geodesic Technology Solutions – ₹657 करोड़
- Jaypee Infratech – ₹636 करोड़
- Parekh Aluminex – ₹622 करोड़
बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या संकेत?
Axis Bank के इस खुलासे से कुछ बड़े संकेत मिलते हैं:
1. NPA (Non-Performing Assets) का दबाव
बड़े कॉर्पोरेट डिफॉल्ट्स बैंकिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ाते हैं और बैलेंस शीट को प्रभावित करते हैं।
2. कानूनी कार्रवाई में तेजी
3,209 केस दर्ज करना यह दिखाता है कि बैंक अब रिकवरी को लेकर ज्यादा आक्रामक रुख अपना रहे हैं।
3. जांच एजेंसियों की भूमिका
CBI और ED की जांच से यह स्पष्ट है कि कई मामलों में सिर्फ बिजनेस फेलियर नहीं, बल्कि संभावित धोखाधड़ी भी शामिल हो सकती है।
आम ग्राहकों पर असर
बड़े डिफॉल्ट्स का असर सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम ग्राहकों पर भी पड़ता है:
- लोन की ब्याज दरें प्रभावित हो सकती हैं
- बैंकिंग सिस्टम में जोखिम बढ़ता है
- नए कर्ज देने में सख्ती बढ़ सकती है
निष्कर्ष
Axis Bank द्वारा ₹66,338 करोड़ की रिकवरी के लिए उठाए गए कदम यह दिखाते हैं कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर अब बड़े डिफॉल्टर्स के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है। हालांकि, इतनी बड़ी राशि की वसूली आसान नहीं होगी और इसमें लंबा समय लग सकता है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इन मामलों में कितनी रिकवरी होती है और क्या इससे बैंकिंग सिस्टम में स्थिरता आती है या नहीं।
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