Asian Market Today: कमजोर अमेरिकी जॉब रिपोर्ट के बाद एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली। निक्केई और कोस्पी में करीब 1.5% तक की बढ़त रही। वहीं, कच्चे तेल और सोने की कीमतों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।
Asian Market Today: एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को तेजी का माहौल देखने को मिला। कमजोर अमेरिकी जॉब रिपोर्ट के बाद शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट में आई मजबूत बढ़त का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। अमेरिका में जुलाई के रोजगार आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के बाद निवेशकों को ब्याज दरों में राहत की संभावना नजर आने लगी है।
अमेरिकी बाजार में S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ, जबकि Nasdaq में भी 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी रही। इसका सकारात्मक असर एशिया के प्रमुख बाजारों पर पड़ा। जापान का Nikkei करीब 1.29% ऊपर रहा, जबकि दक्षिण कोरिया का KOSPI 1.47% चढ़ा। Topix में भी 0.36% की बढ़त दर्ज की गई।
हालांकि, अमेरिकी शेयर वायदा बाजार में मिलाजुला रुख दिखाई दिया। S&P 500 Futures करीब 0.2% नीचे रहा, जबकि Nasdaq-100 Futures में 0.1% की मामूली तेजी देखी गई।
कमजोर अमेरिकी जॉब रिपोर्ट से बाजार को मिला सपोर्ट
ग्लोबल बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी लेबर मार्केट से आई कमजोर खबर रही। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी नियोक्ताओं ने जुलाई में उम्मीद के विपरीत नौकरियों में कटौती की। इसके अलावा पिछले दो महीनों के रोजगार आंकड़ों को भी नीचे की ओर संशोधित किया गया।
कमजोर रोजगार आंकड़ों ने निवेशकों के बीच यह उम्मीद बढ़ाई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपना सकता है। आम तौर पर ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ने पर शेयर बाजार और सोने जैसी एसेट्स को सपोर्ट मिलता है।
यही वजह रही कि शुक्रवार के अमेरिकी कारोबार में प्रमुख इंडेक्स मजबूत होकर बंद हुए और सोमवार को एशियाई बाजारों में भी इसका असर देखने को मिला।
जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में जोरदार तेजी
एशियाई बाजारों में सोमवार को जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार खास तौर पर मजबूत रहे।
| बाजार | बढ़त |
|---|---|
| Nikkei | 1.29% |
| KOSPI | 1.47% |
| Topix | 0.36% |
| Hang Seng Futures | 0.50% |
Hong Kong के Hang Seng Futures में करीब 0.5% की तेजी रही। हालांकि, अमेरिकी बाजार के Futures में पूरी तरह एक जैसा रुख नहीं रहा। S&P 500 Futures में लगभग 0.2% की गिरावट रही।
इससे संकेत मिलता है कि निवेशक एक तरफ कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से उत्साहित हैं, लेकिन दूसरी तरफ वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर सावधानी भी बरत रहे हैं।
Strait of Hormuz को लेकर बढ़ी चिंता
एशियाई बाजारों के बीच निवेशकों की नजर Strait of Hormuz की स्थिति पर भी बनी हुई है। रविवार रात S&P 500 Futures में गिरावट की एक वजह अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर बढ़ती अनिश्चितता रही।
S&P 500 से जुड़े Futures में करीब 0.2% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं Nasdaq-100 Futures लगभग 0.1% ऊपर रहे। Dow Jones Industrial Average Futures भी करीब 99 अंक या 0.2% नीचे रहे।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह का लंबा व्यवधान कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए बाजार की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट की स्थिति पर बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने तेल बाजार में सतर्क रुख अपनाया।
Brent Crude Futures करीब 91 सेंट या 1.09% बढ़कर $84.46 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI Crude Futures में 61 सेंट या 0.78% की तेजी रही और यह $78.79 प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
हालांकि, इससे पहले पिछले सप्ताह दोनों प्रमुख क्रूड बेंचमार्क में 7% से ज्यादा की गिरावट आई थी। बाजार में यह उम्मीद बनी थी कि ईरान और ओमान के बीच संभावित समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता साफ हो सकता है।
युद्ध से पहले दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता था। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि महंगाई, परिवहन लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव पर बाजार की नजर
ईरान ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में है। हालांकि, तेहरान ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने से पहले अमेरिका को कुछ अतिरिक्त शर्तें पूरी करनी होंगी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, फिलहाल तेहरान और वॉशिंगटन के बीच सीधी बातचीत नहीं चल रही है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते का उल्लंघन करता रहेगा, तब तक बातचीत शुरू नहीं की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है। खासकर तेल, सोना और शेयर बाजार में निवेशक अमेरिका-ईरान संबंधों से जुड़े हर नए अपडेट पर नजर रख रहे हैं।
हूथी हमले के दावे से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
इस बीच, ईरान का समर्थन करने वाली हूथी सेनाओं ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरामको की जाज़ान रिफाइनरी को निशाना बनाया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य पूर्व में तनाव पहले से काफी बढ़ा हुआ है। सऊदी अरब द्वारा तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता किए जाने के बाद भी क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर बाजार की नजर बनी हुई है।
अलग से, संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी ADNOC ने शुक्रवार को बताया था कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उसके 15 जहाजों पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय हमले हुए हैं।
इन घटनाओं के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ा है और इसका असर आने वाले दिनों में क्रूड की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
सोने की कीमत आज: $4,345 के आसपास कारोबार
कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद सोने की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है। पिछले सप्ताह सोने ने जनवरी के बाद अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की थी। इसके बाद सोमवार को एशियाई बाजार में सोना लगभग $4,345 प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
कमजोर अमेरिकी लेबर मार्केट ने ब्याज दरों में संभावित नरमी की उम्मीद को बढ़ाया है। इससे सोने को सपोर्ट मिला है। आम तौर पर ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ने पर सोने जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।
सोना हाल के हफ्तों में $4,000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है। जून में युद्ध के कारण हुई भारी बिकवाली के बाद सोने की कीमतों में दबाव आया था, लेकिन इसके बाद निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से कीमतों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली।
हालांकि, हालिया तेजी के बावजूद सोना फरवरी के अंत में ईरान युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से करीब 20% नीचे बताया जा रहा है। इसलिए निवेशकों के लिए आगे अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, महंगाई और मध्य पूर्व के घटनाक्रम महत्वपूर्ण संकेतक बने रहेंगे।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर?
एशियाई बाजारों में तेजी और अमेरिकी बाजार की मजबूत क्लोजिंग का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआती धारणा पर भी पड़ सकता है। खासकर जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख बाजारों में तेजी से एशिया के व्यापक बाजार सेंटीमेंट को सपोर्ट मिल सकता है।
हालांकि, भारतीय बाजार के लिए सिर्फ ग्लोबल संकेत ही महत्वपूर्ण नहीं होंगे। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी डॉलर, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां और अमेरिका-ईरान तनाव भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अगर क्रूड की कीमतों में लगातार तेजी आती है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद से विदेशी निवेश और उभरते बाजारों की धारणा को फायदा मिल सकता है।
निवेशकों के लिए 5 बड़े संकेत
- अमेरिकी जॉब डेटा उम्मीद से कमजोर रहा।
- S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ।
- Nikkei और KOSPI में करीब 1.5% तक की तेजी रही।
- Brent और WTI Crude में सोमवार को तेजी आई।
- सोना करीब $4,345 प्रति औंस के आसपास बना रहा।
इस तरह सोमवार को ग्लोबल बाजार के लिए तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। एक तरफ कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद को बढ़ाकर शेयर और सोने को सपोर्ट दिया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बाजार के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है। आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर खास तौर पर क्रूड ऑयल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर और मध्य पूर्व से जुड़े नए घटनाक्रमों पर रहेगी।
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