Anil Agarwal News: वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे के जरिए समय की कीमत और काम को टालने की आदत पर महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि कबीर का यह दोहा उनके जीवन के सबसे पसंदीदा दोहों में से एक है। अनिल अग्रवाल का मानना है कि अगर व्यक्ति समय पर अपने काम को पूरा करने की आदत डाल ले, तो वह निजी जिंदगी के साथ-साथ कारोबार में भी तेजी से आगे बढ़ सकता है।
अनिल अग्रवाल ने सुनाया कबीर का प्रसिद्ध दोहा
हमारे पारंपरिक दोहे कितनी सादगी से सिर्फ़ कुछ लाइनों में बहुत कुछ कह जाते हैं।
कैसी भी परिस्थिति हो, हमेशा सही राह दिखाते हैं।
कबीर के दोहों में से ये मेरा सबसे पसंदीदा है। और मैं पूरी तरह से इसपे अमल करता हूँ। pic.twitter.com/0VSc3RHzcZ
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) August 11, 2026 अनिल अग्रवाल ने अपने वीडियो में संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा सुनाया, जो समय की अहमियत और काम को टालने से बचने की सीख देता है।
‘काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब।’
कबीर के इस दोहे का सीधा संदेश है कि किसी भी जरूरी काम को कल के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। अगर कोई काम आज किया जा सकता है, तो उसे आज ही पूरा कर लेना बेहतर है। वहीं, जो काम इसी समय किया जा सकता है, उसे बाद के लिए टालने के बजाय तुरंत पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।
अनिल अग्रवाल ने इसी सीख को अपने कारोबारी और व्यक्तिगत जीवन से जोड़ते हुए कहा कि समय किसी के लिए रुकता नहीं है। इसलिए काम को टालने की आदत व्यक्ति की प्रगति में बाधा बन सकती है।
‘आलस मत करो, काम फटाफट कर दो’
अनिल अग्रवाल ने अपने वीडियो में कहा कि वह अपने दोस्तों से भी अक्सर यही कहते हैं कि आलस नहीं करना चाहिए। जिस काम को करना है, उसे टालने के बजाय जल्द से जल्द पूरा कर देना चाहिए।
उनकी बात का सार यही है कि किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिर्फ योजना बनाना पर्याप्त नहीं है। उस योजना पर समय रहते काम शुरू करना भी उतना ही जरूरी है। कई बार लोग किसी काम को कल, अगले सप्ताह या सही समय आने तक टालते रहते हैं। इस वजह से जरूरी मौके हाथ से निकल सकते हैं।
अनिल अग्रवाल के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति अपने काम को समय पर पूरा करने की आदत विकसित करता है, तो उसकी कार्यक्षमता बढ़ती है और उसे आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर मिलते हैं।
बिजनेस में भी लागू होती है कबीर की सीख
कबीर का यह दोहा सिर्फ व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं है। कारोबारी दुनिया में भी समय पर फैसला लेना और सही मौके का फायदा उठाना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
बिजनेस में किसी नए प्रोजेक्ट को शुरू करना हो, निवेश का फैसला लेना हो, किसी ग्राहक की जरूरत पूरी करनी हो या बाजार में बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलनी हो—हर जगह समय की अहम भूमिका होती है। फैसला लेने में बहुत ज्यादा देरी होने पर प्रतिस्पर्धी कंपनियां आगे निकल सकती हैं।
अनिल अग्रवाल खुद लंबे समय से कारोबार की दुनिया में सक्रिय हैं। ऐसे में उनकी ओर से कबीर के दोहे को बिजनेस की सीख से जोड़ना बताता है कि पारंपरिक भारतीय ज्ञान आज के कारोबारी माहौल में भी कितना प्रासंगिक हो सकता है।
कबीर का दोहा अनिल अग्रवाल को क्यों पसंद है?
अनिल अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में बताया कि भारतीय परंपरा के दोहे बेहद सरल शब्दों में जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समझाने का काम करते हैं। कम शब्दों में कही गई इन बातों में व्यवहार, समय, मेहनत और जीवन को लेकर गहरी सीख छिपी होती है।
उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, ऐसे दोहे व्यक्ति को सही रास्ता दिखा सकते हैं। यही वजह है कि कबीर के कई दोहों में से यह दोहा उन्हें विशेष रूप से पसंद है।
अनिल अग्रवाल ने यह भी संकेत दिया कि वह सिर्फ इस दोहे को सुनना या साझा करना पसंद नहीं करते, बल्कि इसकी सीख को अपनी जिंदगी में लागू करने की कोशिश भी करते हैं। उनके लिए इसका सबसे महत्वपूर्ण संदेश काम को टालने के बजाय समय पर पूरा करना है।
सफलता के लिए समय की समझ जरूरी
कारोबार में सफलता के लिए कई चीजों की जरूरत होती है, जैसे सही रणनीति, मेहनत, जोखिम लेने की क्षमता और बाजार को समझने की योग्यता। लेकिन इन सभी के बीच समय पर फैसला लेना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
कई बार किसी अवसर की कीमत इसलिए कम हो जाती है क्योंकि उस पर सही समय पर कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से कबीर का ‘काल करे सो आज कर’ वाला संदेश आधुनिक बिजनेस की दुनिया में भी प्रासंगिक दिखाई देता है।
अनिल अग्रवाल की बात को इस नजरिए से देखें तो उनका संदेश सिर्फ बिजनेस करने वालों के लिए नहीं है। छात्र, नौकरीपेशा व्यक्ति, उद्यमी या कोई भी व्यक्ति अपने रोजमर्रा के जीवन में इस सीख को अपना सकता है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने भी की तारीफ
अनिल अग्रवाल की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा कि उनकी बात में सिर्फ कबीर की सीख ही नहीं, बल्कि उनके अपने जीवन-दर्शन की झलक भी दिखाई देती है।
यूजर के मुताबिक, सरल शब्दों में गहरी बात कहना और फिर उसे अपने जीवन में उतारना ही असली प्रेरणा है। उन्होंने अनिल अग्रवाल की सादगी, विनम्रता और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता की भी तारीफ की।
वहीं, एक अन्य यूजर ने कबीर के दोहों को जीवन का आईना बताते हुए कहा कि इनमें शब्द कम होते हैं, लेकिन सीख बहुत बड़ी होती है। मुश्किल परिस्थितियों में भी ऐसी सीख व्यक्ति को सही दिशा दिखाने का काम कर सकती है।
अनिल अग्रवाल का संदेश क्या है?
अनिल अग्रवाल की इस पोस्ट से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख यही है कि काम को अनावश्यक रूप से टालना नहीं चाहिए। अगर कोई जरूरी काम आज किया जा सकता है तो उसे कल पर छोड़ने की जरूरत नहीं है। और अगर उसे अभी किया जा सकता है, तो तुरंत शुरुआत करना बेहतर है।
कबीर का सदियों पुराना दोहा आज भी यही याद दिलाता है कि समय लगातार आगे बढ़ रहा है। बीता हुआ समय वापस नहीं आता। इसलिए जीवन और कारोबार दोनों में अवसर को पहचानना और सही समय पर कार्रवाई करना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अनिल अग्रवाल ने कबीर की इस सीख को अपने अनुभव के साथ जोड़कर एक बेहद सरल संदेश दिया है—आलस छोड़िए, काम को टालिए मत और जो करना है, उसे सही समय पर पूरा करने की कोशिश कीजिए।


