पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में चुनावी माहौल के बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने एक बड़ी राजनीतिक घोषणा करते हुए कहा कि अगर राज्य में Bharatiya Janata Party (BJP) की सरकार बनती है, तो Uniform Civil Code (UCC) लागू किया जाएगा।
उन्होंने यह भी साफ कहा कि राज्य में एक समान कानून लागू होगा और “कोई भी चार शादियां नहीं कर पाएगा”, जो उनके भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी तेज है और सभी दल अपने-अपने एजेंडे के साथ मतदाताओं को साधने में जुटे हैं।
TMC पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
अपने भाषण में Amit Shah ने सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress (TMC) पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कई बड़े घोटाले हुए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- शिक्षक भर्ती घोटाला
- नगर निगम भर्ती घोटाला
- राशन घोटाला
- कोयला और पशु तस्करी से जुड़े मामले
- मनरेगा और पीएम आवास योजना में अनियमितताएं
शाह ने कहा कि अगर BJP सत्ता में आती है तो “एक भी भ्रष्ट व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा” और सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
Uniform Civil Code पर जोर: चुनावी मुद्दा या बड़ा एजेंडा?
Uniform Civil Code को लेकर दिया गया बयान केवल एक वादा नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।
UCC का मतलब है कि देश के सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान कानून लागू हो।
शाह ने इसे “समानता” का मुद्दा बताते हुए कहा कि BJP सरकार बनने पर इसे लागू किया जाएगा।
हालांकि, यह मुद्दा लंबे समय से विवादित रहा है और अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच इस पर तीखी बहस होती रही है।
भाषाई पहचान पर फोकस: कुर्माली को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का वादा
रैली में Amit Shah ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की —
उन्होंने कहा कि BJP सरकार बनने पर कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने राजबंशी और कुर्माली भाषाओं को बंगाल, असम और झारखंड की प्रमुख भाषाएं बताते हुए उनकी मान्यता बढ़ाने का वादा किया।
यह कदम खास तौर पर क्षेत्रीय और जनजातीय वोटर्स को ध्यान में रखकर देखा जा रहा है।
सरकारी कर्मचारियों और युवाओं के लिए बड़े वादे
चुनावी रैली में BJP ने कई सामाजिक और आर्थिक वादे भी किए:
- 7th Pay Commission के लाभ लागू करने का आश्वासन
- बेरोजगार युवाओं के लिए विशेष योजनाएं
- ओवरएज हो चुके अभ्यर्थियों को नौकरी में राहत
इन घोषणाओं के जरिए पार्टी ने सरकारी कर्मचारियों और युवाओं को साधने की कोशिश की है।
किसानों का मुद्दा: आलू की कीमत पर राजनीति
Amit Shah ने अपने भाषण में किसानों की समस्याओं को भी उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बैंकुरा में आलू उत्पादन अधिक होने के बावजूद, राज्य सरकार की नीतियों के कारण किसानों को अपनी उपज बेहद कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।
शाह ने कहा कि BJP सरकार बनने पर:
- झारखंड और ओडिशा में आलू की सप्लाई की अनुमति दी जाएगी
- किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा
यह मुद्दा ग्रामीण और किसान वोटर्स को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
Mamata Banerjee का पलटवार: UCC का करेंगे विरोध
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने BJP के इन वादों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि:
- UCC का वह “जोरदार विरोध” करेंगी
- BJP पर “लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित करने” के आरोप लगाए
- चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि कुछ प्रक्रियाओं के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं, जिसे उन्होंने “बड़ा घोटाला” बताया।
चुनावी परिदृश्य: 2021 के नतीजे और इस बार की चुनौती
पश्चिम बंगाल की राजनीति को समझने के लिए पिछले चुनाव के आंकड़े अहम हैं:
- All India Trinamool Congress (TMC): 213 सीटें
- Bharatiya Janata Party (BJP): 77 सीटें
इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प माना जा रहा है, क्योंकि BJP पिछले चुनाव से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश में है, जबकि TMC अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखना चाहती है।
विश्लेषण: UCC और भ्रष्टाचार—दो बड़े चुनावी हथियार
अगर इस पूरे घटनाक्रम को गहराई से देखें, तो BJP दो बड़े मुद्दों पर चुनाव लड़ती नजर आ रही है:
1. भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई
2. Uniform Civil Code के जरिए समान कानून
वहीं All India Trinamool Congress अपनी रणनीति में:
- क्षेत्रीय पहचान
- सामाजिक योजनाएं
- और BJP के खिलाफ राजनीतिक नैरेटिव
पर फोकस कर रही है।
यानी यह चुनाव केवल सीटों का नहीं, बल्कि विचारधारा और नीतियों का टकराव बन चुका है।
निष्कर्ष: बयान से बढ़ा चुनावी तापमान
पुरुलिया रैली में Amit Shah का बयान यह साफ दिखाता है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल का चुनाव और ज्यादा गरमाने वाला है।
जहां एक तरफ BJP UCC और भ्रष्टाचार के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है, वहीं Mamata Banerjee और उनकी पार्टी इसका कड़ा विरोध कर रही है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किस मुद्दे को ज्यादा अहम मानते हैं और किसके पक्ष में फैसला देते हैं।
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