TMC Rebel MP News: तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर बने नेशनल कांग्रेस प्रोग्रेसिव इनिशिएटिव (NCPI) के भीतर मतभेद की खबरें सामने आने लगी हैं। NCPI के 20 सांसदों में से तीन सांसदों ने NDA संसदीय दल की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इन सांसदों के दूरी बनाने से बीजेपी नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ NCPI की नजदीकी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पश्चिम बंगाल के तीन सांसदों की गैरमौजूदगी को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि लोकसभा में NCPI समूह को आधिकारिक मान्यता देने का मामला अभी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास लंबित है।
NDA की बैठक में शामिल नहीं हुए NCPI के तीन सांसद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और NDA के सहयोगी दलों के नेताओं की मौजूदगी में मंगलवार (4 अगस्त) को संसद भवन में सत्तारूढ़ गठबंधन के सांसदों की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई।
हालांकि, NCPI के तीन सांसद इस बैठक से दूर रहे। इनमें शामिल हैं—
- जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान
- मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहेर खान
- बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान
ये तीनों सांसद इससे पहले 21 जुलाई को हुई NDA संसदीय दल की पहली ‘मंगल मिलन’ बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे।
अबू ताहेर खान ने NDA से दूरी पर दिया बयान
मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि वह NDA के साथ नहीं हैं और न ही बीजेपी में शामिल होने की कोई योजना है।
उन्होंने कहा, “हम NDA के साथ नहीं हैं और न ही BJP में शामिल हो रहे हैं। आज भी NDA की बैठक थी, लेकिन हम तीनों उसमें नहीं गए।”
उन्होंने यह भी कहा कि वह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से बुलाई गई बैठक में शामिल होंगे, क्योंकि वह उनके संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों से जुड़ी है।
खान ने कहा कि वह किसी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेंगे जो मुसलमानों के खिलाफ हो।
मुस्लिम बहुल सीटों के सांसदों की दूरी बनी चर्चा का विषय
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र मुस्लिम बहुल हैं। बताया जा रहा है कि अपने क्षेत्रों में मतदाताओं के एक वर्ग द्वारा बीजेपी के साथ कथित नजदीकी को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद उन्होंने NDA की बैठक से दूरी बनाई।
इस घटनाक्रम ने NCPI के अंदर रणनीति और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
NCPI को मान्यता मिलने का मामला अभी लंबित
NCPI के लिए सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता हासिल करना है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने इस संबंध में फैसला लंबित है।
दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी अलग हुए समूह को संरक्षण तभी मिल सकता है, जब उसे मूल पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन हासिल हो।
TMC के पास लोकसभा में कुल 28 सांसद थे। ऐसे में NCPI को अलग समूह के रूप में मान्यता पाने के लिए कम से कम 19 सांसदों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है। NCPI के पास फिलहाल 20 सांसदों का दावा है।
सुदीप बंद्योपाध्याय ने मतभेद की खबरों को किया खारिज
NCPI के सदन नेता सुदीप बंद्योपाध्याय मंगलवार को पहली बार NDA संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए।
बैठक के बाद उन्होंने कहा कि NCPI पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा, “मैं देश के सबसे वरिष्ठ सांसदों में से एक हूं। NCPI में सभी एकजुट हैं। यह अच्छा अनुभव है।”
उन्होंने पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मतभेद की खबरों को खारिज किया।
NDA बैठक में कई बड़े नेता रहे मौजूद
‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा NDA के कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
बैठक में मौजूद नेताओं में शामिल थे—
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- गृह मंत्री अमित शाह
- विदेश मंत्री एस जयशंकर
- कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
- बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन
- NDA सहयोगी दलों के सांसद और नेता
NDA के सहयोगी दलों जैसे जनता दल यूनाइटेड (JDU), जनता दल सेक्युलर (JDS), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP), शिवसेना और NCPI के प्रतिनिधि भी बैठक में पहुंचे।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
NCPI का गठन TMC से अलग हुए सांसदों के समूह के रूप में हुआ है। ऐसे में इस गुट के कुछ सांसदों का NDA की बैठकों से दूरी बनाना बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर सकता है।
हालांकि NCPI नेतृत्व लगातार एकजुटता का दावा कर रहा है, लेकिन तीन सांसदों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर रणनीतिक मतभेदों की अटकलों को हवा दे दी है।
आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और NCPI सांसदों की राजनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी।


