Agri Export from India: भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र को बड़ी सफलता मिली है। केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख से पहली बार 5 मीट्रिक टन ऑर्गेनिक खुबानी (Apricot) की खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजी गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारतीय किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय ऑर्गेनिक उत्पादों की पहचान मजबूत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
Highlights
- लद्दाख से पहली बार 5 मीट्रिक टन ऑर्गेनिक खुबानी का यूएई को निर्यात
- देश के कुल खुबानी उत्पादन में लद्दाख की करीब 60% हिस्सेदारी
- एपीडा के सहयोग से किसानों को मिला वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर
- ऑर्गेनिक और औषधीय गुणों वाली खुबानी की विदेशों में बढ़ रही मांग
- हजारों किसानों की आय और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद
लद्दाख से पहली बार यूएई पहुंची ऑर्गेनिक खुबानी
पिछले कुछ समय से @APEDADOC के प्रयासों से देशभर के किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य और वैश्विक बाजार तक नई पहुंच मिल रही है। लद्दाख से UAE के लिए 5 मीट्रिक टन ऑर्गेनिक खुबानी की पहली खेप का निर्यात इसका एक और सशक्त उदाहरण है।
यह पहल भारतीय ऑर्गेनिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय… pic.twitter.com/cVC5neLYXQ
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) July 16, 2026 लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों में उगाई जाने वाली ऑर्गेनिक खुबानी की पहली खेप अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच गई है। 5 मीट्रिक टन खुबानी को यूएई के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर लद्दाख के उपराज्यपाल ने खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
स्थानीय भाषा में खुबानी को ‘चुली’ कहा जाता है। यह फल अपनी प्राकृतिक मिठास, उच्च गुणवत्ता और पोषक तत्वों के कारण देश और विदेश दोनों बाजारों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
पीयूष गोयल ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के प्रयासों से भारतीय किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य और वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिल रही है।
उन्होंने कहा कि लद्दाख से ऑर्गेनिक खुबानी का पहला निर्यात भारतीय कृषि निर्यात की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि भारतीय ऑर्गेनिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी मिलेगी।
क्यों खास है लद्दाख की खुबानी?
लद्दाख की खुबानी कई वजहों से विशेष मानी जाती है।
- पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से उत्पादन
- विटामिन A और C का अच्छा स्रोत
- एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर
- प्राकृतिक मिठास और बेहतरीन स्वाद
- औषधीय गुणों के कारण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
यही कारण है कि खाड़ी देशों समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
देश के उत्पादन में 60% हिस्सेदारी
भारत में व्यावसायिक स्तर पर खुबानी की खेती मुख्य रूप से लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों में होती है। इनमें अकेले लद्दाख की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है, जिससे यह देश का सबसे बड़ा खुबानी उत्पादक क्षेत्र बन जाता है।
एक परिपक्व पेड़ से सामान्यतः 60 किलोग्राम से 100 किलोग्राम (एक क्विंटल) तक खुबानी का उत्पादन हो सकता है। इसकी खेती के लिए सर्दियों में कम तापमान और गर्मियों में लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तक का मौसम उपयुक्त माना जाता है।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात बढ़ने से किसानों को स्थानीय मंडियों की तुलना में बेहतर कीमत मिलने की संभावना है। इससे लद्दाख के हजारों बागवानों की आय में बढ़ोतरी होगी।
इसके अलावा—
- निर्यात के नए बाजार खुलेंगे।
- ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय स्तर पर पैकेजिंग और प्रोसेसिंग उद्योग विकसित होंगे।
- युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
APEDA की क्या है भूमिका?
एपीडा (APEDA) भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सरकारी संस्था है। यह किसानों और निर्यातकों को कई प्रकार की सहायता उपलब्ध कराती है।
- निर्यात संबंधी प्रशिक्षण
- गुणवत्ता प्रमाणन में सहयोग
- कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में सहायता
- वित्तीय सहायता और विभिन्न योजनाओं का लाभ
- विदेशी बाजारों तक भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाना
इसी तरह की पहलों के जरिए भारत फल, सब्जियां, मसाले और अन्य ऑर्गेनिक कृषि उत्पादों के निर्यात को लगातार बढ़ा रहा है।
भारत के कृषि निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार
लद्दाख से ऑर्गेनिक खुबानी की पहली खेप का यूएई निर्यात केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं बल्कि भारत के कृषि निर्यात मिशन के लिए भी अहम कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि देश के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाले ऑर्गेनिक उत्पाद भी अब वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। आने वाले वर्षों में ऐसे निर्यात बढ़ने से किसानों की आय, स्थानीय अर्थव्यवस्था और भारत के एग्री एक्सपोर्ट सेक्टर—तीनों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।


