Robert Kiyosaki Debt News: दुनिया को फाइनेंशियल फ्रीडम, बिजनेस और निवेश के जरिए अमीर बनने का तरीका बताने वाले ‘Rich Dad Poor Dad’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी इन दिनों अपने भारी-भरकम कर्ज को लेकर चर्चा में हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कियोसाकी ने खुद बताया है कि उन पर करीब 1.2 अरब डॉलर यानी ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज है। हालांकि, उनकी पूर्व पत्नी किम कियोसाकी का कहना है कि इस आंकड़े को समझने का तरीका अलग है और इसमें पूरी पार्टनरशिप से जुड़ा कर्ज शामिल है।
कियोसाकी लंबे समय से लोगों को यह समझाते रहे हैं कि सही तरीके से इस्तेमाल किया गया कर्ज भी संपत्ति बनाने का जरिया बन सकता है। लेकिन उनके कर्ज का यह आंकड़ा सामने आने के बाद सोशल मीडिया और निवेश की दुनिया में एक बार फिर बहस छिड़ गई है कि आखिर ‘गुड डेट’ और खतरनाक कर्ज के बीच अंतर क्या है?
कियोसाकी ने खुद स्वीकार किया- मेरे ऊपर है 1.2 अरब डॉलर का कर्ज
न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रॉबर्ट कियोसाकी ने ‘गेट रिच एजुकेशन’ पॉडकास्ट में अपने कर्ज को लेकर खुलकर बात की। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने करीब 1.2 अरब डॉलर के कर्ज की बात स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें इस बात को लेकर कोई शर्मिंदगी नहीं है।
कियोसाकी का तर्क है कि हर कर्ज खराब नहीं होता। उनका मानना है कि अगर कर्ज का इस्तेमाल ऐसी संपत्ति खरीदने के लिए किया जाए, जिसकी वैल्यू या उससे होने वाली कमाई समय के साथ बढ़ सकती है, तो यह आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आम लोगों को बिना समझे उनकी रणनीति की नकल नहीं करनी चाहिए। कर्ज के जरिए संपत्ति खड़ी करने की रणनीति में जोखिम काफी ज्यादा होता है और इसके लिए वित्तीय समझ जरूरी है।
आखिर इतना बड़ा कर्ज कैसे तैयार हुआ?
रिपोर्ट में कियोसाकी की रियल एस्टेट रणनीति का भी जिक्र किया गया है। बताया जाता है कि वह रियल एस्टेट में लेवरेज यानी उधार के पैसे का इस्तेमाल करके निवेश करते हैं।
इस मॉडल में निवेशक बैंक से कर्ज लेकर प्रॉपर्टी खरीदता है। अगर समय के साथ उस प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, तो बढ़ी हुई वैल्यू के आधार पर दोबारा फाइनेंसिंग या नया कर्ज लिया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी संपत्ति की कीमत 10 करोड़ रुपये है और कुछ वर्षों बाद उसकी वैल्यू 15 करोड़ रुपये हो जाती है, तो निवेशक उस बढ़ी हुई इक्विटी का इस्तेमाल आगे की फाइनेंसिंग के लिए कर सकता है।
यही रणनीति बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने पर कर्ज का आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है।
कर्ज को ‘इनकम’ नहीं मानने का क्या है तर्क?
कियोसाकी लंबे समय से टैक्स और कर्ज को लेकर अपनी अलग सोच के लिए जाने जाते हैं। उनके तर्क के मुताबिक, बैंक से लिया गया लोन सामान्य कमाई यानी वेतन या बिजनेस इनकम की तरह नहीं होता।
यही वजह है कि वह कर्ज को संपत्ति खरीदने और कैश फ्लो तैयार करने की रणनीति के हिस्से के रूप में देखते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कर्ज हमेशा टैक्स-फ्री या बिना किसी लागत के पैसा होता है। लोन पर ब्याज, शर्तें, जोखिम और repayment obligations बने रहते हैं।
यानी कियोसाकी की रणनीति को समझने के लिए सिर्फ ‘कर्ज’ का आंकड़ा देखना पर्याप्त नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि उस कर्ज के बदले कितनी संपत्ति है और उससे कितना कैश फ्लो पैदा हो रहा है।
हर प्रॉपर्टी के लिए अलग कंपनी का इस्तेमाल
रिपोर्ट के मुताबिक, कियोसाकी अपने रियल एस्टेट निवेशों के लिए अलग-अलग Limited Liability Companies यानी LLCs का इस्तेमाल करते हैं।
ऐसी संरचना का एक उद्देश्य अलग-अलग कारोबारी संपत्तियों और देनदारियों को अलग रखना हो सकता है। अगर किसी एक प्रोजेक्ट में परेशानी आती है, तो बाकी व्यवसायों को उससे अलग रखने की कोशिश की जाती है।
कियोसाकी इसी तरह की संरचनाओं को अमीर निवेशकों की रणनीति का हिस्सा बताते रहे हैं। हालांकि, LLC का इस्तेमाल अपने आप में कर्ज या निवेश जोखिम को खत्म नहीं करता। वास्तविक सुरक्षा कंपनी की संरचना, गारंटी, कर्ज की शर्तों और लागू कानूनों पर निर्भर करती है।
पूर्व पत्नी किम कियोसाकी ने बताई अलग तस्वीर
रॉबर्ट कियोसाकी के कर्ज को लेकर उनकी पूर्व पत्नी और बिजनेस पार्टनर किम कियोसाकी ने भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
वैनिटी फेयर की रिपोर्ट के मुताबिक, किम का कहना है कि 1.2 अरब डॉलर का आंकड़ा रॉबर्ट का व्यक्तिगत कर्ज नहीं है। यह आंकड़ा उनकी पार्टनरशिप से जुड़ी 1,500 से ज्यादा अपार्टमेंट यूनिट्स के कर्ज को भी शामिल करता है।
उनके मुताबिक, रॉबर्ट कियोसाकी का व्यक्तिगत हिस्सा करीब 3 करोड़ से 6 करोड़ डॉलर के बीच हो सकता है।
इसका मतलब यह हुआ कि सुर्खियों में दिख रहा 1.2 अरब डॉलर का आंकड़ा और कियोसाकी की व्यक्तिगत देनदारी एक ही चीज नहीं हैं।
कियोसाकी के ‘गुड डेट’ वाले सिद्धांत पर क्यों हो रही बहस?
रॉबर्ट कियोसाकी की सबसे चर्चित वित्तीय सोच में से एक है—सभी कर्ज खराब नहीं होते।
उनके अनुसार, अगर कर्ज लेकर ऐसी संपत्ति खरीदी जाए जो आगे चलकर पैसा कमाए, तो उसे ‘गुड डेट’ माना जा सकता है। इसके उलट ऐसी चीजों के लिए कर्ज लेना जो लगातार जेब से पैसा निकालती रहें, आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।
लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब बाजार का रुख बदल जाता है।
रियल एस्टेट की कीमतें गिरने पर संपत्ति की वैल्यू कम हो सकती है। वहीं लोन की किस्त और ब्याज का भुगतान जारी रहता है। अगर किराये या दूसरे कैश फ्लो में भी गिरावट आ जाए, तो लेवरेज वाला निवेश काफी जोखिम भरा हो सकता है।
यही वजह है कि विशेषज्ञ आम निवेशकों को किसी बड़े निवेशक की रणनीति को हूबहू अपनाने से पहले अपनी आय, जोखिम क्षमता और कर्ज चुकाने की क्षमता का आकलन करने की सलाह देते हैं।
‘रिच डैड पुअर डैड’ की करोड़ों प्रतियां बिक चुकी हैं
रॉबर्ट कियोसाकी की किताब ‘Rich Dad Poor Dad’ दुनिया की सबसे चर्चित पर्सनल फाइनेंस किताबों में शामिल है। 1997 में प्रकाशित इस किताब में उन्होंने दो अलग-अलग वित्तीय सोच के जरिए संपत्ति, देनदारी, नौकरी, बिजनेस और निवेश को समझाने की कोशिश की।
किताब की अब तक 4.4 करोड़ से ज्यादा प्रतियां बिकने का दावा किया जाता है और इसका कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
कियोसाकी ने इस किताब के जरिए लोगों को सिर्फ नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय संपत्ति बनाने, बिजनेस और निवेश के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया।
क्या 1.2 अरब डॉलर का कर्ज उन्हें ‘गरीब’ बनाता है?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि कर्ज की रकम और किसी व्यक्ति की नेटवर्थ एक ही चीज नहीं होती।
अगर किसी व्यक्ति पर 100 करोड़ रुपये का कर्ज है लेकिन उसके पास 150 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्तियां हैं जिनसे कमाई होती है, तो उसकी वित्तीय स्थिति को सिर्फ 100 करोड़ रुपये के कर्ज से नहीं समझा जा सकता।
दूसरी तरफ, अगर संपत्तियों की कीमत तेजी से गिर जाए और कर्ज की रकम बहुत ज्यादा हो, तो वही लेवरेज बड़ी समस्या बन सकता है।
इसलिए कियोसाकी के मामले में भी 1.2 अरब डॉलर के आंकड़े के साथ उनकी संपत्तियों, आय, कर्ज की संरचना और व्यक्तिगत देनदारी को अलग-अलग समझना जरूरी है।
रॉबर्ट कियोसाकी की कहानी से आम निवेशक क्या सीख सकते हैं?
कियोसाकी का मामला एक दिलचस्प वित्तीय सबक जरूर देता है। कर्ज अपने आप में न तो अच्छा है और न ही बुरा—उसका इस्तेमाल और जोखिम सबसे महत्वपूर्ण है।
अगर कर्ज लेकर ऐसी संपत्ति खरीदी जाती है जिससे पर्याप्त कैश फ्लो आता है, तो वह रणनीति काम कर सकती है। लेकिन ब्याज दर बढ़ने, प्रॉपर्टी की कीमत गिरने या आय कम होने की स्थिति में यही कर्ज परेशानी भी बन सकता है।
इसलिए आम निवेशक के लिए सबसे जरूरी सबक यह है कि किसी अरबपति या मशहूर निवेशक की रणनीति को सिर्फ इसलिए कॉपी न करें क्योंकि उसने उससे पैसा बनाया है। उनकी आर्थिक स्थिति, पूंजी, कर्ज की शर्तें और जोखिम उठाने की क्षमता आपसे बिल्कुल अलग हो सकती है।
रॉबर्ट कियोसाकी का 1.2 अरब डॉलर का कर्ज भी इसी विरोधाभास को सामने लाता है—एक तरफ वह कर्ज को संपत्ति बनाने का औजार बताते हैं, तो दूसरी तरफ इतनी बड़ी देनदारी अपने साथ बड़ा वित्तीय जोखिम भी लेकर आती है।


