Supertech Flats: सुपरटेक लिमिटेड की अटकी हुई परियोजनाओं में घर का इंतजार कर रहे हजारों खरीदारों के लिए मामला अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने कंपनी की 16 रुकी हुई परियोजनाओं में निर्माण की धीमी रफ्तार पर गंभीर चिंता जताई है। ट्रिब्यूनल ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) से निर्माण कार्य की प्रगति को लेकर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
NCLAT ने कोर्ट द्वारा गठित एपेक्स कोर्ट कमेटी को भी निर्देश दिया है कि वह अब तक उठाए गए कदमों और चल रही परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी दो सप्ताह के भीतर पेश करे। यह निर्देश 25 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान दिया गया।
16 प्रोजेक्ट्स में करीब 14 हजार खरीदार फंसे
सुपरटेक की इन 16 परियोजनाओं में करीब 14,000 होमबॉयर्स लंबे समय से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। इनमें से कई खरीदारों की परेशानी 15 से 20 साल तक खिंच चुकी है। ये प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और कर्नाटक के अलग-अलग शहरों में स्थित हैं।
परियोजनाओं का बड़ा हिस्सा नोएडा और ग्रेटर नोएडा में है। इसके अलावा गुरुग्राम, मेरठ, रुद्रपुर और बेंगलुरु में भी सुपरटेक की अटकी हुई परियोजनाएं शामिल हैं।
ग्रेटर नोएडा में Sports Village, EcoVillage 1, EcoVillage 2, EcoVillage 3, UP Country और JAR Suites जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। वहीं नोएडा में EcoCity, Romano, CapeTown और North Eye परियोजनाएं हैं। गुरुग्राम में Hilltown और Araville, मेरठ में Green Village और Sports City, रुद्रपुर में Rivercrest तथा बेंगलुरु में Micasa प्रोजेक्ट शामिल हैं।
NBCC को टाइमलाइन पर NCLAT का सवाल
25 अगस्त की सुनवाई में होमबॉयर्स की ओर से पेश वकील ने एपेक्स कोर्ट कमेटी और NBCC की ओर से तय समय-सीमा के अनुसार काम आगे नहीं बढ़ने की चिंता जताई।
NCLAT ने अपने निर्देश में एपेक्स कोर्ट कमेटी से दो सप्ताह के भीतर अब तक उठाए गए कदमों की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। साथ ही NBCC से यह भी बताने को कहा गया है कि 6 मई 2026 के आदेश के अनुपालन में निर्माण कार्य के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है।
NCLAT के पहले के आदेश के मुताबिक NBCC को 31 जुलाई से पहले काम आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू करनी थी। इसके बाद एक महीने के भीतर कॉन्ट्रैक्ट देने और 1 अक्टूबर से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना थी। अब ट्रिब्यूनल ने इस टाइमलाइन पर हुई प्रगति का विवरण मांगा है।
2021 में शुरू हुई थी सुपरटेक की इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया
सुपरटेक लिमिटेड के खिलाफ इंसॉल्वेंसी की प्रक्रिया मार्च 2021 में शुरू हुई थी। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में IBC की धारा 7 के तहत याचिका दायर की थी।
25 मार्च 2021 को NCLT ने याचिका स्वीकार कर ली। मामला सुपरटेक के EcoVillage II प्रोजेक्ट से जुड़े करीब 432 करोड़ रुपये के लोन डिफॉल्ट से संबंधित था।
इसके बाद अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्तर पर समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
49,748 घरों वाली 16 परियोजनाओं की जिम्मेदारी NBCC को
12 दिसंबर 2024 को NCLAT ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और कर्नाटक में मौजूद सुपरटेक की 16 रुकी हुई परियोजनाओं के लिए NBCC को इम्प्लीमेंटिंग एजेंसी के रूप में मंजूरी दी थी।
इन परियोजनाओं में कुल करीब 49,748 घर शामिल हैं। NBCC को निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने, फंड मैनेजमेंट और परियोजनाओं से मिलने वाली रकम के वितरण की निगरानी जैसे कामों में भूमिका दी गई।
घर खरीदारों के हितों की निगरानी के लिए प्रोजेक्ट-वार सब-कमेटियों के साथ समन्वय में काम करने वाली एपेक्स कोर्ट कमेटी भी बनाई गई।
इसके बाद 6 मई 2026 को NCLAT ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कृष्ण मुरारी को एपेक्स कोर्ट कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया।
खरीदारों की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई
इन परियोजनाओं में लंबे समय से फंसे खरीदारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कानूनी प्रक्रिया और नई एजेंसी नियुक्त होने के बावजूद जमीन पर निर्माण की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी है।
रोमानो प्रोजेक्ट के एक घर खरीदार के मुताबिक, NBCC के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभालने के बाद भी लंबे समय तक जमीन पर कोई महत्वपूर्ण निर्माण गतिविधि दिखाई नहीं दी। ऐसे खरीदारों के लिए हर बीतता महीना आर्थिक दबाव और अनिश्चितता को बढ़ा रहा है।
खरीदारों का कहना है कि वे वर्षों से ईएमआई, किराया और अन्य खर्चों का बोझ उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने घर का कब्जा नहीं मिल पाया है।
CapeTown में 5,038 फ्लैट्स का मामला
नोएडा के सेक्टर 74 स्थित CapeTown परियोजना भी लंबे समय से चर्चा में रही है। इस प्रोजेक्ट में कुल 39 टावरों में करीब 5,038 फ्लैट्स बताए गए हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इनमें से तीन टावरों का काम अभी पूरा होना बाकी है। डेवलपर की ओर से करीब 4,419 फ्लैट्स सौंपे जा चुके हैं, जबकि लगभग 500 फ्लैट्स का हैंडओवर बाकी बताया गया है। जिन फ्लैट्स का कब्जा दिया गया है, उनमें से करीब 3,300 का रजिस्ट्रेशन भी हो चुका है।
यह आंकड़ा बताता है कि कुछ परियोजनाओं में डिलीवरी हुई है, लेकिन कई हिस्सों में काम अभी भी अधूरा है।
हर महीने करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा
नोएडा-ग्रेटर नोएडा के घर खरीदारों के संगठन NEFOWA के प्रेसिडेंट अभिषेक कुमार ने NBCC को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद भी निर्माण की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि करीब 21 महीने बीत जाने के बावजूद कई जगह जमीन पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने एपेक्स कमेटी के सदस्यों, सपोर्ट स्टाफ, कंसल्टेंट्स और अन्य व्यवस्थाओं पर हर महीने होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए।
फिलहाल NBCC के अधिकारियों की ओर से इस मामले पर कोई टिप्पणी उपलब्ध नहीं हो सकी।
अब NCLAT की रिपोर्ट पर टिकी नजर
NCLAT के ताजा निर्देश के बाद अब खरीदारों की नजर एपेक्स कोर्ट कमेटी और NBCC की स्टेटस रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 16 परियोजनाओं में निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या है, कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और आगे की टाइमलाइन क्या होगी।
करीब 14 हजार घर खरीदारों के लिए यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे वर्षों से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं। अब सवाल सिर्फ प्रोजेक्ट पूरा होने का नहीं, बल्कि यह भी है कि तय टाइमलाइन के मुताबिक निर्माण कब वास्तव में जमीन पर दिखाई देगा।


