Bank Debits: अगर आपके बैंक खाते से आपकी जानकारी के बिना कोई रकम कट गई है या बैंक ने गलत चार्ज लगा दिया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, केवल कस्टमर केयर पर फोन करके शिकायत करना पर्याप्त नहीं होता। पैसा वापस पाने के लिए सही तरीके से शिकायत दर्ज करना, सभी सबूत सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर RBI के शिकायत निवारण सिस्टम का इस्तेमाल करना जरूरी है।
आजकल बैंकिंग से जुड़े मामलों में ग्राहकों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनमें अनधिकृत डिजिटल ट्रांजैक्शन, गलत बैंकिंग चार्ज, अतिरिक्त फीस या ऐसी कटौती शामिल हो सकती है, जिसकी ग्राहक को जानकारी नहीं थी। ऐसी स्थिति में जितनी जल्दी कार्रवाई की जाए, उतना ही बेहतर रहता है।
RBI ने अनधिकृत डिजिटल लेनदेन को लेकर ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए नियम बनाए हैं। वहीं, बैंक से शिकायत का समाधान नहीं होने पर ग्राहक RBI के Integrated Ombudsman Scheme के तहत शिकायत कर सकते हैं।
अगर आपके खाते से भी गलत तरीके से पैसे कट गए हैं, तो ये 6 काम तुरंत करें।
1. अनधिकृत लेनदेन की तुरंत जानकारी बैंक को दें
अगर आपके बैंक खाते से ऐसा कोई ट्रांजैक्शन हुआ है जिसे आपने नहीं किया है, तो सबसे पहले बैंक को इसकी सूचना दें। इसके लिए बैंक के आधिकारिक मोबाइल ऐप, वेबसाइट, हेल्पलाइन या शाखा जैसे उपलब्ध आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें।
अनधिकृत डिजिटल ट्रांजैक्शन के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण है। RBI के नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में यदि ग्राहक बैंक से ट्रांजैक्शन अलर्ट मिलने के 3 कार्यदिवस के भीतर अनधिकृत लेनदेन की जानकारी देता है, तो ग्राहक की देनदारी शून्य हो सकती है।
इसलिए अगले बैंक स्टेटमेंट का इंतजार न करें। जैसे ही आपको किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी मिले, तुरंत बैंक को सूचित करें।
2. कस्टमर केयर के साथ लिखित शिकायत भी करें
सिर्फ फोन पर शिकायत करके रुक जाना सही तरीका नहीं है। बैंक को लिखित शिकायत देना भी जरूरी है, ताकि आपके पास शिकायत का आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद रहे।
आप बैंक के मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग, ईमेल, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल या बैंक शाखा के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
शिकायत में इन जानकारियों को जरूर शामिल करें:
- ट्रांजैक्शन की तारीख
- काटी गई रकम
- ट्रांजैक्शन का विवरण
- खाते से पैसे कटने का कारण
- आपको क्यों लगता है कि कटौती गलत या अनधिकृत है
- रिफंड की मांग
शिकायत दर्ज होने के बाद Complaint Reference Number जरूर लें। ईमेल, स्क्रीनशॉट, बैंक स्टेटमेंट और बैंक की ओर से मिले जवाबों को भी सुरक्षित रखें।
कुछ मामलों में लागू RBI नियमों के तहत बैंक को अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन की सूचना मिलने के बाद निर्धारित समय के भीतर विवादित राशि का प्रोविजनल क्रेडिट देना होता है।
3. अगर गलत फीस कटी है तो बैंक से हिसाब मांगें
हर गलत डेबिट फ्रॉड नहीं होता। कई बार समस्या बैंक द्वारा लगाए गए चार्ज से जुड़ी होती है।
उदाहरण के लिए, अगर बैंक ने किसी सर्विस के लिए निर्धारित शुल्क से ज्यादा रकम काट ली है या ऐसा चार्ज लगाया है जिसकी जानकारी आपको नहीं दी गई थी, तो बैंक से उसका स्पष्ट कारण पूछें।
ऐसे मामलों में बैंक से लिखित रूप में पूछ सकते हैं:
- यह चार्ज किस सेवा के लिए लगाया गया?
- बैंक की फीस और चार्ज लिस्ट में इसकी जानकारी कहां है?
- इस रकम की गणना कैसे हुई?
- क्या इस चार्ज की जानकारी ग्राहक को पहले दी गई थी?
अपने बैंक स्टेटमेंट, शुल्क संबंधी दस्तावेज और बैंक के साथ हुई बातचीत को सुरक्षित रखें। यही दस्तावेज आगे शिकायत बढ़ाने की स्थिति में आपके लिए महत्वपूर्ण सबूत बन सकते हैं।
4. पहले बैंक को शिकायत का समाधान करने का मौका दें
अगर बैंक से जुड़ी कोई शिकायत है तो सामान्य तौर पर पहले उसी बैंक के पास शिकायत दर्ज कराना जरूरी होता है। सीधे RBI Ombudsman के पास जाने से पहले बैंक की शिकायत निवारण प्रक्रिया का इस्तेमाल करें।
1 जुलाई 2026 से लागू RBI-Integrated Ombudsman Scheme, 2026 के तहत पात्र शिकायतों के लिए वित्तीय संस्थानों की सेवाओं में कमी से जुड़े मामलों का समाधान कराने की व्यवस्था है।
अगर बैंक को शिकायत करने के बाद 30 दिनों के भीतर कोई जवाब नहीं मिलता या बैंक के जवाब से आप संतुष्ट नहीं हैं, तो पात्रता शर्तें पूरी होने पर RBI Ombudsman के पास शिकायत की जा सकती है।
5. बैंक समाधान नहीं करे तो RBI CMS पर शिकायत करें
अगर बैंक से शिकायत करने के बावजूद आपकी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो आप RBI के Complaint Management System (CMS) के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
यह प्रक्रिया ग्राहकों के लिए उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था का हिस्सा है। शिकायत करते समय बैंक के साथ पहले की गई शिकायत का विवरण और उसका रेफरेंस नंबर जरूर रखें।
RBI की हेल्पलाइन 14448 के जरिए भी शिकायत निवारण प्रक्रिया और शिकायत की स्थिति से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
ध्यान रखें कि Ombudsman के पास शिकायत करने के लिए संबंधित योजना की पात्रता और समयसीमा की शर्तें लागू होती हैं। इसलिए बैंक से मिले जवाब, शिकायत नंबर और सभी दस्तावेज संभालकर रखें।
6. रिफंड मिलने तक खाते पर नजर रखें
शिकायत दर्ज करने के बाद अपनी जिम्मेदारी खत्म न समझें। खाते की निगरानी करते रहें और यह चेक करें कि बैंक ने विवादित रकम वापस की है या नहीं।
अगर बैंक ने आपको कोई Provisional Credit दिया है, तो उससे जुड़े सभी रिकॉर्ड संभालकर रखें और बैंक की ओर से मामले के अंतिम निपटारे की जानकारी का इंतजार करें।
भविष्य में ऐसी परेशानी से बचने के लिए:
- SMS और ईमेल ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू रखें।
- बैंक स्टेटमेंट नियमित रूप से चेक करें।
- संदिग्ध ट्रांजैक्शन तुरंत रिपोर्ट करें।
- बैंक की आधिकारिक फीस और चार्ज लिस्ट समय-समय पर देखें।
- शिकायत के सभी रेफरेंस नंबर सुरक्षित रखें।
- बैंक से बातचीत का रिकॉर्ड संभालकर रखें।
कितनी जल्दी शिकायत करना जरूरी है?
अनधिकृत डिजिटल ट्रांजैक्शन में देरी करना ग्राहक के लिए नुकसानदायक हो सकता है। RBI के नियमों में ग्राहक की देनदारी परिस्थितियों और रिपोर्ट करने में लगे समय के आधार पर तय होती है। इसलिए जैसे ही खाते में कोई ऐसा ट्रांजैक्शन दिखाई दे जिसे आपने नहीं किया है, तुरंत बैंक को सूचित करें।
वहीं, अगर मामला किसी गलत बैंक चार्ज का है, तो बैंक की फीस और चार्ज की जानकारी से अपने स्टेटमेंट का मिलान करें और गलत कटौती मिलने पर लिखित शिकायत करें।
निष्कर्ष
बैंक खाते से गलत तरीके से पैसे कटने पर केवल कस्टमर केयर को फोन करना पर्याप्त नहीं है। पहले बैंक को तुरंत सूचना दें, लिखित शिकायत दर्ज करें, सभी सबूत सुरक्षित रखें और जरूरत पड़ने पर RBI CMS/Ombudsman की व्यवस्था का इस्तेमाल करें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनधिकृत ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई में देरी न करें। समय पर शिकायत और सही दस्तावेज आपके मामले को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।


