Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार मंगलवार, 1 सितंबर को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में दबाव में रहा। हालांकि, दिन के निचले स्तरों से निफ्टी ने करीब 72 अंकों की रिकवरी की और लगभग सपाट स्तर पर कारोबार समाप्त किया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल बाजार में किसी स्पष्ट दिशा का अभाव है और निफ्टी के लिए 23,950-24,000 का स्तर अहम सपोर्ट, जबकि 24,170-24,200 का जोन प्रमुख रेजिस्टेंस बना हुआ है।
डेली चार्ट पर निफ्टी ने हाई वेव कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया है। यह पैटर्न बाजार में अनिश्चितता और खरीदारों-बिकवालों के बीच संतुलन का संकेत देता है। ऐसे में 2 सितंबर को बाजार की दिशा तय करने में सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल की अहम भूमिका रह सकती है।
सेंसेक्स-निफ्टी हल्की गिरावट के साथ बंद
कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 12.99 अंक यानी 0.02 फीसदी की गिरावट के साथ 76,944.28 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 24.60 अंक यानी 0.10 फीसदी फिसलकर 24,055.80 पर सेटल हुआ।
बाजार में गिरावट का दबाव व्यापक रहा। करीब 1,668 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,467 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
निफ्टी के कमजोर प्रदर्शन वाले प्रमुख शेयरों में श्रीराम फाइनेंस, मारुति सुजुकी, नेस्ले, इंटरग्लोब एविएशन और मैक्स हेल्थकेयर शामिल रहे। दूसरी ओर ITC, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, HCL टेक और ONGC में खरीदारी देखने को मिली।
फार्मा, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी पर दबाव
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी फार्मा में 1.5 फीसदी की गिरावट रही। इसके बाद निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी रियल्टी में करीब 1.4 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई।
वहीं निफ्टी ऑटो और निफ्टी PSU बैंक करीब 1.2 फीसदी नीचे बंद हुए। निफ्टी बैंक में 1 फीसदी और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.9 फीसदी की गिरावट रही।
इसके उलट निफ्टी FMCG और निफ्टी IT में करीब 0.9 फीसदी की तेजी देखने को मिली। निफ्टी इंफ्रा, मीडिया और ऑयल एंड गैस इंडेक्स भी लगभग 0.3 फीसदी ऊपर रहे।
ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.4 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.2 फीसदी कमजोर रहा।
ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच संतुलन बना रहा बाजार
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, भारतीय बाजार इस समय मजबूत घरेलू ग्रोथ और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ घरेलू मांग और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। हालांकि, मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का अपेक्षाकृत सख्त रुख महंगाई और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा रहा है।
इसके अलावा लागत में लगातार बढ़ोतरी का असर कंपनियों के मुनाफे और मांग में सुधार की रफ्तार पर पड़ सकता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और विदेशी पूंजी की निकासी ने भी निवेशकों को सतर्क रखा है।
नायर के अनुसार, इसका सबसे ज्यादा दबाव वित्तीय शेयरों पर दिखाई दिया, जबकि FMCG और IT जैसे अपेक्षाकृत डिफेंसिव सेक्टर में खरीदारी बनी रही।
आगे बाजार की दिशा एनर्जी मार्केट, ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में निवेश के रुझान से प्रभावित हो सकती है।
निफ्टी के लिए 23,950 का स्तर बेहद अहम
LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी मंगलवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के बाद अपनी इंट्राडे रिकवरी को बरकरार नहीं रख पाया।
ऊपरी स्तरों पर इंडेक्स को 50-EMA के आसपास रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा। हालांकि, निचले स्तरों पर एक मॉडिफाइड राइजिंग चैनल के पास शुरुआती सपोर्ट मिला।
रूपक डे के मुताबिक, अगर निफ्टी 23,950 के नीचे लगातार बना रहता है, तो बाजार में करेक्शन का अगला दौर शुरू हो सकता है। ऐसी स्थिति में कमजोरी और बढ़ सकती है। वहीं, अगर इंडेक्स 23,950 के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो शॉर्ट टर्म में अच्छी रिकवरी की संभावना बनी रहेगी।
हालांकि, ऊंचे स्तरों पर बिकवाली का दबाव जारी रह सकता है। 24,200 का स्तर निफ्टी के लिए शुरुआती अहम रेजिस्टेंस बन सकता है।
24,000-23,950 बना अहम सपोर्ट जोन
SBI सिक्योरिटीज के हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह के मुताबिक, निफ्टी फिलहाल अपने महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है।
50-डे, 100-डे और 200-डे EMA काफी हद तक सपाट हैं। यह बाजार में मजबूत दिशात्मक मोमेंटम की कमी और कंसोलिडेशन के संकेत देता है। मोमेंटम इंडिकेटर और ऑसिलेटर भी इसी तरह का साइडवेज ट्रेंड दिखा रहे हैं।
पिछले 15 कारोबारी सत्रों में डेली RSI एक सीमित दायरे में रहा है। इससे भी संकेत मिलता है कि फिलहाल बाजार में न तो मजबूत तेजी का रुझान है और न ही स्पष्ट मंदी का।
सुदीप शाह के मुताबिक, 24,000-23,950 का जोन निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट जोन है। अगर निफ्टी लगातार 23,950 के नीचे फिसलता है तो शॉर्ट-टर्म मार्केट स्ट्रक्चर कमजोर हो सकता है और इंडेक्स 23,800 के स्तर तक नीचे जा सकता है।
वहीं दूसरी तरफ 24,170-24,200 का 50-डे EMA बैंड तत्काल और महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन है। इस स्तर के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट बाजार के सेंटीमेंट को बेहतर कर सकता है और निफ्टी में मजबूत रिकवरी का रास्ता खोल सकता है।
Bank Nifty: 57,000-56,900 पर सपोर्ट
बैंक निफ्टी पर सुदीप शाह का कहना है कि यह इंडेक्स पिछले करीब 20 कारोबारी सत्रों से एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इस दौरान इसमें लगभग 1,075 अंकों के बैंड में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
यह सेटअप फिलहाल किसी स्पष्ट ट्रेंड के बजाय कंसोलिडेशन की ओर इशारा कर रहा है। प्रमुख मोमेंटम इंडिकेटर और ऑसिलेटर भी साइडवेज मार्केट स्ट्रक्चर का संकेत दे रहे हैं।
आगे बैंक निफ्टी के लिए 57,900-58,000 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में महत्वपूर्ण रहेगा। अगर इंडेक्स इस जोन को पार करता है तो तेजी का मोमेंटम मजबूत हो सकता है।
वहीं नीचे की तरफ 57,000-56,900 का स्तर अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। इस सपोर्ट के नीचे कमजोरी बढ़ने पर बैंकिंग शेयरों में दबाव देखने को मिल सकता है।
2 सितंबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
एक्सपर्ट्स के तकनीकी संकेतों को देखें तो 2 सितंबर को निफ्टी के लिए 23,950-24,000 का सपोर्ट जोन और 24,170-24,200 का रेजिस्टेंस जोन सबसे महत्वपूर्ण रहेगा।
- 23,950 के ऊपर: बाजार में रिकवरी की संभावना बनी रह सकती है।
- 23,950 के नीचे: करेक्शन बढ़ सकता है और निफ्टी 23,800 की ओर जा सकता है।
- 24,170-24,200 के ऊपर: सेंटीमेंट में सुधार और मजबूत रिकवरी के संकेत मिल सकते हैं।
- Bank Nifty: 56,900-57,000 सपोर्ट और 57,900-58,000 रेजिस्टेंस पर नजर रहेगी।
फिलहाल बाजार में स्पष्ट ट्रेंड के बजाय कंसोलिडेशन और उतार-चढ़ाव का दौर नजर आ रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस के आसपास प्राइस एक्शन पर नजर रखना जरूरी होगा।
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