Subhash Chandra Repayment Plan: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय बड़ी बेंच ने सुभाष चंद्रा के ₹6.5 करोड़ के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने वाले पिछले आदेश पर रोक लगा दी है। 1 सितंबर को हुई सुनवाई में बेंच ने कहा कि टाई-ब्रेकर जज की राय को बहुमत का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अब इस मामले पर पांच सदस्यीय बेंच आगे सुनवाई करेगी।
तीन सदस्यीय बेंच में नहीं बनी थी सहमति
सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान से जुड़ा मामला पहले दिल्ली स्थित NCLT की तीन सदस्यीय बेंच के सामने था। प्लान को मंजूरी देने के मुद्दे पर बेंच के सदस्यों के बीच एकमत नहीं बन पाया था।
इसके बाद मामले में टाई-ब्रेकर जज की राय सामने आई और इसी के आधार पर रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दिए जाने की स्थिति बनी। हालांकि, अब पांच सदस्यीय बेंच ने स्पष्ट किया है कि टाई-ब्रेकर जज की राय को अपने आप में बहुमत का फैसला नहीं माना जा सकता।
यही वजह है कि पहले दिए गए मंजूरी आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
₹22,007 करोड़ के दावों के सामने सिर्फ ₹6.5 करोड़
इस मामले का सबसे अहम पहलू सुभाष चंद्रा की ओर से पेश किया गया रिपेमेंट प्लान है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके खिलाफ करीब ₹22,007 करोड़ के दावे मंजूर किए गए थे, जबकि रिपेमेंट प्लान में सिर्फ ₹6.5 करोड़ चुकाने की पेशकश की गई।
इतनी बड़ी रकम के दावों की तुलना में भुगतान की पेशकश बेहद कम होने के कारण कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इसका विरोध किया।
Canara Bank समेत इन संस्थानों ने किया विरोध
रिपेमेंट प्लान के खिलाफ Canara Bank, Axis Bank, HDFC Bank और LIC Housing Finance ने आपत्ति जताई थी। इन संस्थानों ने NCLT के सामने प्लान को मंजूरी नहीं देने की मांग की थी।
आपत्ति जताने वाले संस्थानों का तर्क था कि प्रस्तावित ₹6.5 करोड़ की रकम मंजूर दावों के मुकाबले बहुत कम है। उनका कहना था कि यह रकम सुभाष चंद्रा की कुल संपत्तियों के मूल्य का महज 0.028% बताई गई है।
इसी आधार पर लेनदारों ने प्लान की पर्याप्तता पर सवाल उठाए और इसे खारिज करने की मांग की।
अब पांच सदस्यीय बड़ी बेंच करेगी सुनवाई
अब इस पूरे मामले पर NCLT की पांच सदस्यीय बेंच आगे सुनवाई करेगी। इस बेंच में न्यायिक सदस्य अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल, बाचू वेंकट बलराम दास और महेंद्र खंडेलवाल शामिल हैं।
वहीं, तकनीकी सदस्यों में अतुल चतुर्वेदी और रविंद्र चतुर्वेदी शामिल हैं।
पांच सदस्यीय बेंच के सामने अब यह मामला दोबारा आगे बढ़ेगा। ऐसे में सुभाष चंद्रा के ₹6.5 करोड़ वाले रिपेमेंट प्लान की मंजूरी पर अंतिम स्थिति बड़ी बेंच की सुनवाई और उसके आदेश पर निर्भर करेगी।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, विवाद का केंद्र यह है कि ₹22,007 करोड़ के मंजूर दावों के मुकाबले सिर्फ ₹6.5 करोड़ का भुगतान प्रस्ताव कितना स्वीकार्य है और इस प्लान को मंजूरी देने के लिए NCLT की पिछली कार्यवाही में टाई-ब्रेकर जज की राय को किस तरह माना जाना चाहिए।
अब पांच सदस्यीय बेंच पहले के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद मामले के कानूनी और वित्तीय पहलुओं पर सुनवाई करेगी। इसका अगला फैसला यह तय करने में अहम होगा कि सुभाष चंद्रा का मौजूदा रिपेमेंट प्लान आगे बढ़ेगा या इसमें बदलाव की जरूरत पड़ेगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट्स और जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य केवल सूचना देना है। किसी भी निवेश या वित्तीय निर्णय से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


