Student Protest: NEET परीक्षा पेपर लीक को लेकर जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह राहत दी।
हालांकि, अदालत ने साफ किया कि यह राहत उन सभी लोगों पर लागू नहीं होगी जिनका गंभीर आपराधिक इतिहास है। ऐसे 2,873 लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस को नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई का असर मामले से जुड़े अन्य लोगों के अधिकारों और हितों पर नहीं पड़ना चाहिए।
20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज FIR पर बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 1 सितंबर को NEET पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुई घटनाओं के संबंध में राज्यों में दर्ज अन्य FIR को बंद माना जाएगा।
कोर्ट का यह फैसला छात्र प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। जुलाई में NEET परीक्षा को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी थी।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस बात को भी रिकॉर्ड पर लिया गया कि 20 से 25 जुलाई की घटनाओं के संबंध में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
2,873 लोगों पर क्यों होगी कार्रवाई?
सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द करने की राहत को सीमित रखते हुए गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को इससे अलग रखा है। अदालत के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ऐसे 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज कर सकती है, जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस कार्रवाई के कारण मामले में शामिल अन्य पक्षों के अधिकार या हित प्रभावित नहीं होने चाहिए। यानी सामान्य छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जुलाई में दर्ज FIR बंद होंगी, लेकिन गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े लोगों पर कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है।
CJP का प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च भी रद्द
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से प्रस्तावित ‘इंडिया गेट मार्च’ भी रद्द कर दिया गया है। संगठन ने छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में FIR रद्द करने की मांग को लेकर मार्च का ऐलान किया था।
CJP के प्रवक्ता और सह-संयोजक सौरव दास मंगलवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने पेश हुए। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार की ओर से FIR रद्द करने की दिशा में कदम उठाए जाने के बाद प्रस्तावित मार्च वापस लिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने संगठन के इस कदम की सराहना की।
आर्टिकल 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने लिया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संविधान के आर्टिकल 142 के तहत मिली विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया। यह प्रावधान शीर्ष अदालत को किसी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश देने की शक्ति देता है।
केंद्र सरकार के अनुरोध के बाद अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR को खत्म करने का आदेश दिया। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जिनके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान मामले दर्ज किए गए थे।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र को ऐसे परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
NEET परीक्षा को लेकर लंबे समय से छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश प्रदर्शन से जुड़े मामलों और प्रभावित परिवारों के लिए अहम माना जा रहा है।
छात्रों के लिए बड़ी राहत, गंभीर मामलों में कार्रवाई जारी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक तरफ 20 से 25 जुलाई के बीच छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR बंद करने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, अदालत ने गंभीर आपराधिक इतिहास वाले 2,873 लोगों को राहत के दायरे से बाहर रखा है।
इस तरह अदालत ने सामान्य प्रदर्शनकारियों को राहत देते हुए गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखने की व्यवस्था की है। साथ ही, 20 से 25 जुलाई की घटनाओं के संबंध में नई FIR दर्ज नहीं करने की बात भी स्पष्ट कर दी गई है।


