PM Modi on Gold Buying: अगर आप त्योहारी या शादी के सीजन में सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील आपके लिए अहम है। पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा है कि अगर जरूरत न हो तो सोना खरीदने से बचें। इसके साथ ही उन्होंने विदेश यात्रा के बजाय देश में घूमने और ‘Wed in India’ को बढ़ावा देने की अपील की है। आखिर सरकार सोने की खरीदारी को लेकर बार-बार ऐसी अपील क्यों करती है और इसका अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है? आइए समझते हैं।
‘जरूरत न हो तो सोना न खरीदें’, पीएम मोदी की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से अपने खर्च करने के तरीके में बदलाव करने और गैर-जरूरी विदेशी खर्च को कम करने का आग्रह किया है। इसी क्रम में उन्होंने सोने की खरीदारी को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि अगर बहुत ज्यादा जरूरत न हो तो सोना खरीदने से बचना चाहिए। भारत में सोना बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है और इसके लिए देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है।
यही वजह है कि सोने के आयात में कमी को विदेशी मुद्रा बचाने और देश के बाहरी भुगतान संतुलन को बेहतर रखने के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता है।
सोने के आयात से देश को क्या नुकसान?
7.8% growth.
Strong numbers.
Even stronger confidence. pic.twitter.com/ZVPpnAXrVU
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2026 भारत दुनिया के बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। भारत में ज्वेलरी, निवेश और पारंपरिक जरूरतों के लिए सोने की मांग काफी मजबूत रहती है। लेकिन घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है।
जब सोने का आयात बढ़ता है तो इसके भुगतान के लिए विदेशी मुद्रा बाहर जाती है। इसका असर देश के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit-CAD) पर पड़ सकता है।
इसीलिए सरकार समय-समय पर लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी और दूसरे विदेशी खर्चों को कम करने की अपील करती रही है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि लोगों को जरूरत के मुताबिक सोना खरीदना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। पीएम मोदी की अपील का जोर खास तौर पर गैर-जरूरी खरीदारी पर है।
विदेश घूमने के बजाय भारत में करें पर्यटन
प्रधानमंत्री ने सिर्फ सोने की खरीदारी को लेकर ही अपील नहीं की। उन्होंने लोगों से विदेशों में छुट्टियां बिताने के बजाय भारत के अलग-अलग हिस्सों में घूमने का भी आग्रह किया।
उनका कहना है कि अगर भारतीय देश के भीतर ही पर्यटन पर खर्च करते हैं तो इसका फायदा घरेलू कारोबार, होटल, परिवहन, स्थानीय दुकानदारों और दूसरे सेवा क्षेत्रों को मिलता है।
इससे देश के भीतर आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर भी पैदा होते हैं।
शादी के लिए ‘Wed in India’ का संदेश
पीएम मोदी ने शादी समारोहों को लेकर भी ‘Wed in India’ का मंत्र दिया। उनका संदेश है कि भारतीय परिवार अपनी शादियों और उससे जुड़े कार्यक्रमों को देश में ही आयोजित करने पर विचार करें।
भारत में शादी का कारोबार बहुत बड़ा है और इससे होटल, कैटरिंग, कपड़े, ज्वेलरी, सजावट, यात्रा और इवेंट मैनेजमेंट जैसे कई क्षेत्रों को कारोबार मिलता है। इसलिए देश में होने वाली बड़ी शादियों का पैसा घरेलू अर्थव्यवस्था में घूमता है।
7.8% GDP ग्रोथ का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि का भी उल्लेख किया। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही।
हालांकि यह पिछली तिमाही के 8.6% के मुकाबले कम है, लेकिन आर्थिक वृद्धि की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। पीएम मोदी ने इस प्रदर्शन को देशवासियों के सामूहिक प्रयास और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे काम से जोड़ा।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध, सप्लाई चेन की चुनौतियों और आर्थिक अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है।
पीएम मोदी के संदेश का मकसद क्या है?
पीएम मोदी की अपील को व्यापक रूप से ‘स्वदेशी’ और आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखा जा सकता है। विचार यह है कि भारतीय उपभोक्ता अपनी जरूरतों और खर्च का कुछ हिस्सा घरेलू उत्पादों, घरेलू पर्यटन और देश के भीतर होने वाली सेवाओं पर खर्च करें।
सोने के मामले में मुख्य चिंता इसका आयात है। वहीं विदेश यात्रा और विदेशों में आयोजित होने वाले बड़े कार्यक्रमों पर खर्च भी विदेशी मुद्रा के इस्तेमाल से जुड़ा होता है।
ऐसे में गैर-जरूरी विदेशी खर्च घटाने और घरेलू अर्थव्यवस्था में अधिक पैसा रखने से देश के भीतर मांग और कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।
क्या सोना खरीदना पूरी तरह गलत है?
पीएम मोदी की अपील को सोना खरीदने पर पूर्ण प्रतिबंध या निवेश संबंधी सलाह के तौर पर नहीं समझना चाहिए। उनका जोर जरूरत न होने पर होने वाली गैर-जरूरी खरीदारी को कम करने पर है।
भारत में सोने का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व काफी पुराना है। त्योहारों और शादियों के दौरान इसकी मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति आभूषण या अन्य जरूरी उद्देश्य के लिए सोना खरीद रहा है, तो यह अलग स्थिति है।
निवेश के नजरिए से भी सोने में पैसा लगाने से पहले व्यक्ति को अपनी वित्तीय जरूरत, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘जरूरत न हो तो सोना न खरीदें’ वाली अपील के पीछे मुख्य विचार विदेशी मुद्रा की बचत, आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही ‘Wed in India’ और देश में पर्यटन को बढ़ावा देने का संदेश भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा है।
हालांकि सोना भारतीय परिवारों की बचत और परंपरा का अहम हिस्सा है, इसलिए पीएम की अपील का केंद्र जरूरत की खरीदारी रोकना नहीं, बल्कि गैर-जरूरी खर्च को कम करना और घरेलू अर्थव्यवस्था में खर्च को बढ़ावा देना है।


