Iran-US War: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमला करने का दावा किया है। ईरान के मुताबिक, उसने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित अल मिन्हाद एयर बेस को दर्जनों ड्रोन से निशाना बनाया। ईरानी दावे के अनुसार, हमले में उस क्षेत्र को टारगेट किया गया जहां अमेरिकी सैनिक और हेलीकॉप्टर तैनात थे।
ईरान की ओर से यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद तेहरान ने इसे जवाबी कार्रवाई बताया है। हालांकि, ईरान की ओर से किए गए इन दावों और हमले से हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
लारक द्वीप पर क्या हुआ था?
🇮🇷🇦🇪 Iran Says It Launched Drone Attack on Al Minhad Air Base in UAE
Iran’s regular army says it launched dozens of attack drones early Monday at Al Minhad Air Base, south of Dubai, targeting areas where U.S. forces and helicopters are stationed, according to Nournews.
🔸 The… pic.twitter.com/EOmDWIXYQk
— Drop Site (@DropSiteNews) August 31, 2026 इससे पहले अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने लारक द्वीप पर कार्रवाई की जानकारी दी थी। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, वहां मौजूद दो ईरानी लॉन्चरों को निशाना बनाया गया था। अमेरिका का आरोप था कि इन लॉन्चरों का इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौसैनिक बारूदी सुरंगें बिछाने या दागने की तैयारी के लिए किया जा रहा था।
अमेरिकी सेना के अनुसार, इन गतिविधियों से क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही और समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था। इसी वजह से लॉन्चरों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
वहीं, ईरान ने अमेरिकी हमले को लेकर अलग दावा किया। तेहरान के मुताबिक, अमेरिकी स्ट्राइक में उसके कई लड़ाके और नागरिक मारे गए तथा कई अन्य लोग घायल हुए हैं।
अल मिन्हाद एयर बेस को बनाया निशाना
ईरान ने सोमवार को दावा किया कि उसने UAE स्थित अल मिन्हाद एयर बेस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया। ईरानी दावे के मुताबिक, हमले में दर्जनों ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
तेहरान का कहना है कि ड्रोन हमले का मुख्य निशाना एयर बेस का वह हिस्सा था जहां अमेरिकी सैन्यकर्मी और हेलीकॉप्टर मौजूद थे। ईरान ने इसे लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई का सीधा जवाब बताया है।
हालांकि, इस हमले में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को कितना नुकसान हुआ, कितने ड्रोन लक्ष्य तक पहुंचे और किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की पुष्टि हुई या नहीं, इसे लेकर स्वतंत्र जानकारी सामने आना बाकी है।
जॉर्डन में भी मिसाइल हमले का दावा
ईरान ने केवल UAE तक अपनी जवाबी कार्रवाई सीमित रहने का दावा नहीं किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाने का दावा किया।
इस बीच जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ ईरानी मिसाइलों को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर लिया गया। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय देशों की एयर डिफेंस प्रणालियां भी बढ़ते तनाव के बीच हाई अलर्ट पर हैं।
जॉर्डन में मिसाइलों को रोके जाने की खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश पहले से ही अमेरिका और मध्य पूर्व के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच रणनीतिक रूप से संवेदनशील स्थिति में है।
ईरानी राष्ट्रपति ने क्या कहा?
बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपने देश का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी आक्रामक कार्रवाई के सामने वह चुप नहीं बैठेगा।
ईरान का यह बयान एक तरफ युद्ध को लेकर संयम का संकेत देता है, वहीं दूसरी तरफ जवाबी कार्रवाई के अधिकार पर भी जोर देता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
लारक द्वीप और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम सामने आने से इस पूरे घटनाक्रम का रणनीतिक महत्व और बढ़ जाता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस क्षेत्र में होने वाली हर सैन्य गतिविधि पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। यदि तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर मध्य पूर्व की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
अभी सबसे बड़ा सवाल क्या है?
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि ईरान द्वारा बताए गए ड्रोन हमले से अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को वास्तव में कितना नुकसान हुआ। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि अमेरिकी पक्ष इस हमले को लेकर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।
एक तरफ ईरान इसे लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले का जवाब बता रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका अपने सैन्य अभियानों को क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित खतरों से जोड़ रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद तनाव के बीच यदि हमले और जवाबी हमलों का सिलसिला आगे बढ़ता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। UAE, जॉर्डन और खाड़ी क्षेत्र के अन्य देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।


