Gold Prices Surge Jefferies Report: सोने की कीमतों में जारी तेजी सिर्फ ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए ही मायने नहीं रखती, बल्कि इसका असर भारतीय परिवारों की कुल संपत्ति और देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय घरों में करीब 25,000 टन सोना मौजूद है। मार्च 2026 तक इसकी अनुमानित वैल्यू बढ़कर करीब ₹325 लाख करोड़ हो चुकी है। रिपोर्ट का कहना है कि सोने से पैदा हुआ यह ‘वेल्थ इफेक्ट’ भारत की GDP को करीब 0.80% से 1% तक अतिरिक्त मजबूती दे सकता है।
भारतीय घरों में 25,000 टन सोना, वैल्यू ₹325 लाख करोड़
जेफरीज के अनुमान के अनुसार भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000 टन सोना है। मार्च 2026 तक इसकी कुल कीमत लगभग $3.9 ट्रिलियन यानी ₹325 लाख करोड़ आंकी गई है।
खास बात यह है कि पिछले दो वर्षों में ही भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की कुल वैल्यू में करीब $1.9 ट्रिलियन का इजाफा हुआ है। इसका मतलब है कि सोने की कीमतों में तेजी ने बिना नया सोना खरीदे भी मौजूदा सोने की संपत्ति का मूल्य काफी बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की वैल्यू देश के घरेलू शेयर बाजार में परिवारों के निवेश की तुलना में करीब चार गुना है। इतना ही नहीं, RBI के पास मौजूद करीब $111 बिलियन के गोल्ड रिजर्व की तुलना में भारतीय परिवारों के पास लगभग 35 गुना ज्यादा सोना मौजूद है।
घर, बैंक FD और शेयरों के मुकाबले सोने का बढ़ा दबदबा
पिछले कुछ वर्षों में सोना भारतीय परिवारों के एसेट पोर्टफोलियो में और मजबूत हुआ है। सोने की कीमतों में लगातार तेजी से घरेलू बचत में इसकी हिस्सेदारी का महत्व बढ़ा है।
इसके साथ ही Gold ETF में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। जेफरीज के आंकड़ों के अनुसार गोल्ड ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट मार्च 2023 में करीब $2.8 बिलियन था, जो जुलाई 2026 तक बढ़कर $18.1 बिलियन हो गया।
यानी फिजिकल गोल्ड के साथ-साथ वित्तीय माध्यमों से सोने में निवेश करने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ा है।
ग्रामीण परिवारों के लिए सोना बना वित्तीय सहारा
सोने की बढ़ती कीमतों का एक बड़ा फायदा ग्रामीण भारत और मध्यम वर्ग को मिल सकता है। शेयर बाजार में निवेश की तुलना में सोने की पहुंच समाज के कहीं बड़े हिस्से तक है।
जब परिवारों को अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो वे अपने सोने को गिरवी रखकर बैंक या NBFC से गोल्ड लोन ले सकते हैं। ऐसे समय में बढ़ी हुई सोने की कीमत परिवारों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा का काम करती है।
जेफरीज के अनुसार मार्च 2026 तक भारत का संगठित गोल्ड लोन बाजार करीब $197 बिलियन का हो चुका था। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक घरों में मौजूद कुल सोने का अभी सिर्फ करीब 15% हिस्सा ही लोन के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इससे भविष्य में गोल्ड लोन बाजार के और विस्तार की संभावना दिखाई देती है।
सोने की तेजी का दूसरा पहलू भी है, बढ़ रहा आयात बिल
हालांकि सोने की कीमतों में तेजी का असर पूरी तरह सकारात्मक नहीं है। भारत अपनी घरेलू जरूरत का बड़ा हिस्सा सोने के आयात के जरिए पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने पर देश का आयात बिल भी बढ़ जाता है।
जेफरीज के मुताबिक भारत का गोल्ड इंपोर्ट बिल वित्त वर्ष 2023 में करीब $36 बिलियन था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर लगभग $79 बिलियन हो गया। यह देश की GDP के करीब 2% के बराबर है।
महंगे सोने का आयात व्यापार घाटे पर भी दबाव डाल सकता है। दूसरी तरफ RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। मार्च 2024 में यह करीब 8% थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर लगभग 16% यानी $111 बिलियन हो गई।
गोल्ड और सिल्वर की तेजी पर इन शेयरों पर जेफरीज की नजर
सोने और चांदी की कीमतों में तेजी को देखते हुए जेफरीज ने अपने India Model Portfolio में भी बदलाव किए हैं।
मणप्पुरम फाइनेंस
गोल्ड लोन कारोबार में संभावित तेजी को देखते हुए जेफरीज ने मणप्पुरम फाइनेंस को ‘Buy’ रेटिंग के साथ मॉडल पोर्टफोलियो में शामिल किया है। वहीं मुथूट फाइनेंस पर ‘Hold’ रेटिंग बरकरार रखी गई है।
हिंदुस्तान जिंक
चांदी की कीमतों में तेजी और कंपनी के सिल्वर एक्सपोजर को देखते हुए हिंदुस्तान जिंक को भी पोर्टफोलियो में जगह दी गई है।
नवीन फ्लोरीन और मीशो
जेफरीज ने नवीन फ्लोरीन और मीशो को भी अपने मॉडल पोर्टफोलियो में शामिल किया है। इसके अलावा टाइटन, कल्याण ज्वैलर्स, MCX और IIFL फाइनेंस को भी सोने की तेजी से फायदा उठाने वाले संभावित शेयरों के तौर पर देखा गया है।
इन शेयरों को पोर्टफोलियो से किया बाहर
जेफरीज ने अपने मॉडल पोर्टफोलियो में फंड की उपलब्धता के लिए कुछ शेयरों को बाहर भी किया है। इनमें अंबुजा सीमेंट्स और जिंदल स्टेनलेस शामिल हैं। वहीं बजाज फाइनेंस जैसी कुछ कंपनियों में हिस्सेदारी घटाई गई है।
आम परिवारों के लिए क्यों खास है सोने की तेजी?
जेफरीज की रिपोर्ट से यह साफ होता है कि भारत में सोना सिर्फ आभूषण या निवेश का साधन नहीं है। यह करोड़ों परिवारों की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा है।
सोने की कीमत बढ़ने पर एक तरफ परिवारों की नेटवर्थ बढ़ती है, वहीं जरूरत पड़ने पर यही सोना लोन लेने के लिए गिरवी भी रखा जा सकता है। यही वजह है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, घरेलू खपत और गोल्ड लोन सेक्टर के लिए सोने की कीमतों में तेजी का असर महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, भारत के लिए महंगे सोने का बढ़ता आयात एक चुनौती बना रहेगा। इसलिए सोने की तेजी जहां भारतीय परिवारों के लिए संपत्ति बढ़ाने का जरिया बन रही है, वहीं देश के आयात बिल और व्यापार घाटे पर इसका दबाव भी बढ़ सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या निवेश में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in की ओर से किसी निवेश की सलाह या खरीद-बिक्री की सिफारिश नहीं की जाती है।


