Weather Update: उत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने पहाड़ी राज्यों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में तेज बारिश के कारण कालका-शिमला रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे रेल पटरी का एक हिस्सा करीब 50 मीटर तक हवा में लटक गया। ट्रैक को हुए नुकसान के बाद इस रूट पर चलने वाली 10 टॉय ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने ट्रैक की स्थिति सामान्य होने तक सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है।
वहीं, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का असर सड़क यातायात पर भी देखने को मिल रहा है। कई जगहों पर भूस्खलन और मलबा गिरने से सड़कें बंद हुई हैं। मौसम विभाग ने 5 सितंबर तक कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है।
बारिश ने बढ़ाई पहाड़ों में परेशानी
हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश के चलते कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। हिमाचल में तेज बारिश का सीधा असर सड़क और रेल नेटवर्क पर पड़ा है। सोलन जिले में कोटी-गुम्मन के बीच कालका-शिमला रेल लाइन के नीचे की मिट्टी बह जाने से ट्रैक को काफी नुकसान पहुंचा है।
बारिश के कारण रेलवे ट्रैक का एक हिस्सा जमीन का सहारा खो बैठा और करीब 50 मीटर तक हवा में लटक गया। स्थिति को देखते हुए रेलवे ने इस रूट पर ट्रेन संचालन रोक दिया है। फिलहाल ट्रैक की मरम्मत और सुरक्षा जांच के बाद ही सेवाएं बहाल करने पर फैसला लिया जाएगा।
10 टॉय ट्रेनें की गईं रद्द
कालका-शिमला रेलवे लाइन देश के प्रमुख हेरिटेज रेल मार्गों में शामिल है और इस पर टॉय ट्रेनें चलती हैं। ट्रैक को नुकसान पहुंचने के बाद करीब 10 ट्रेनों का संचालन रद्द किया गया है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब तक ट्रैक को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता, तब तक इस मार्ग पर ट्रेन सेवाएं शुरू नहीं की जाएंगी।
हिमाचल में 64 सड़कें बंद
भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश में सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में भूस्खलन और पहाड़ियों से मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। सोलन में रामशहर-स्वारघाट मार्ग पर पहाड़ी से मलबा और बड़े पत्थर गिरने के कारण सड़क पर आवाजाही प्रभावित हुई।
रविवार सुबह तक प्रदेश में 64 सड़कें बंद बताई गईं। इसके कारण कई इलाकों में लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
मंडी और सराज में भी हालात खराब
मंडी जिले में भारी बारिश के कारण 24 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। सराज इलाके में भी बारिश का असर देखने को मिला है, जहां 17 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई है।
प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से बंद सड़कों को खोलने का काम किया जा रहा है, लेकिन लगातार बारिश के कारण राहत और बहाली के काम में भी मुश्किलें आ रही हैं।
जम्मू-कश्मीर में भी बारिश और भूस्खलन का असर
जम्मू-कश्मीर में भी लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ है। कुछ प्रमुख मार्गों पर भूस्खलन और मलबा गिरने से आवाजाही रोकनी पड़ी।
सांबा-मानसर और बनी-बसोहली मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। हालांकि, जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर वाहनों की आवाजाही जारी रहने की जानकारी है। खराब मौसम और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
उत्तराखंड में भी भूस्खलन का खतरा
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भी लगातार बारिश के कारण कई जगह सड़कें प्रभावित हुई हैं। तेज बारिश के बाद कुछ स्थानों पर भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं।
पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान सड़क पर पत्थर गिरने और अचानक भूस्खलन का खतरा बना रहता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से संवेदनशील मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
5 सितंबर तक इन राज्यों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, 31 अगस्त से 5 सितंबर के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई जगहों पर बारिश होने की संभावना है।
इसके अलावा हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर तेज बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका भी जताई है।
पहाड़ी इलाकों में बढ़ी सावधानी की जरूरत
लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में सड़क, रेल और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। मिट्टी खिसकने और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
खासकर पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जाती है। बारिश का दौर जारी रहने तक कालका-शिमला रेल मार्ग समेत प्रभावित इलाकों में यातायात व्यवस्था पर नजर बनी रहेगी।


