US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर हो गया है। अमेरिका ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप (Larak Island) पर हमला कर वहां मौजूद दो मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाने की बात कही है। इसके बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की बात कही है।
इस घटनाक्रम से फरवरी से चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बनी शांति एक बार फिर खतरे में पड़ गई है। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां सैन्य तनाव बढ़ने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका ने लारक द्वीप पर क्यों किया हमला?
लारक द्वीप ईरान के प्रमुख बंदरगाह बंदर अब्बास के नजदीक स्थित है और होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद रणनीतिक हिस्से में आता है। अमेरिका के अनुसार, ईरानी बल इस क्षेत्र में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें तैनात करने की तैयारी कर रहे थे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कमांडर टिम हॉकिन्स ने बताया कि अमेरिकी सेना ईरान के IRGC की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेना को ऐसी गतिविधियों के संकेत मिले थे जिनसे होर्मुज में समुद्री आवाजाही के लिए खतरा पैदा हो सकता था।
इसी वजह से लारक द्वीप पर मौजूद दो मिसाइल लॉन्चरों को अमेरिकी कार्रवाई में निशाना बनाया गया।
लारक द्वीप की रणनीतिक अहमियत
लारक द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित होने के कारण सैन्य और समुद्री रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यह इलाका फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान इस इलाके से गुजरने वाले कुछ टैंकरों की आवाजाही पर निगरानी बढ़ा रहा था। कुछ जहाजों से भारी शुल्क वसूले जाने की बात भी सामने आई है।
अगर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय व्यापार पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
ईरान ने अमेरिका को दी बदले की चेतावनी
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। IRGC ने अमेरिकी कार्रवाई को गंभीर रणनीतिक गलती बताया है और अमेरिका को इसके आर्थिक तथा सैन्य परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
ईरान से जुड़े तस्नीम न्यूज के मुताबिक, लारक द्वीप पर हमला ड्रोन के जरिए किया गया था। एजेंसी ने हमले में दो लोगों की मौत और दो अन्य के घायल होने का दावा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसके बाद ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया गया।
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमला
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों किंग हुसैन और अल-अजराक को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया।
ईरान का दावा है कि हमले में अमेरिकी ठिकानों के तकनीकी ढांचे, रखरखाव सुविधाओं और लड़ाकू विमानों से संबंधित क्षेत्रों को निशाना बनाया गया।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ मिसाइलों को रोक लिया। जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार, ये मिसाइलें सोमवार तड़के जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई थीं।
ट्रंप ने समुद्री बारूदी सुरंगों को लेकर दी थी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों को लेकर ईरान को चेतावनी दे चुके हैं।
ट्रंप ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि ईरान की ओर से बिछाई गई समुद्री सुरंगों को नष्ट या हटा दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान दोबारा किसी जहाज या नाव के जरिए नई समुद्री सुरंगें बिछाने की कोशिश करता है तो उसे निशाना बनाया जाएगा।
हालांकि, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए इसे प्रचार और भ्रम फैलाने वाला बयान बताया था।
अमेरिका ने ईरान पर बढ़ाया आर्थिक दबाव
सैन्य तनाव के साथ अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक टकराव भी बढ़ रहा है। अमेरिका ने 24 अगस्त को ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की थी।
अमेरिका का उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अलग-थलग करना तथा उससे जुड़े सहयोगी देशों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने इन प्रतिबंधों को अमेरिकी आर्थिक दबाव का विस्तार बताया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका सैन्य मोर्चे पर दबाव बनाने के साथ-साथ आर्थिक प्रतिबंधों का इस्तेमाल कर रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की नजर क्यों?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। संघर्ष से पहले दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल और LNG का लगभग 20% हिस्सा इस समुद्री मार्ग से गुजरता था।
यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता।
अगर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है तो:
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
- टैंकरों और शिपिंग की लागत बढ़ सकती है।
- एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
- पेट्रोल-डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
- वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
छह महीने से चल रहा है अमेरिका-ईरान संघर्ष
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के अलावा खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाया।
इस संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
अब लारक द्वीप पर अमेरिकी हमला और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को फिर से बेहद संवेदनशील बना दिया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों देश इस नए सैन्य टकराव को आगे बढ़ाते हैं या फिर तनाव को सीमित करने की कोशिश करते हैं। अगर हमले बढ़ते हैं और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही दोबारा बाधित होती है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान की सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही और क्रूड ऑयल की कीमतों पर बाजार की खास नजर रहेगी।


