बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। बातचीत का फोकस व्यापार, डिजिटल पेमेंट, खनन, यूरेनियम, उच्च शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति और आयुर्वेद जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर रहा। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
5 अरब डॉलर तक पहुंचेगा द्विपक्षीय व्यापार
प्रधानमंत्री मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच हुई बातचीत में आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य पर सहमत हुए हैं।
वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 1 अरब डॉलर से अधिक का है। ऐसे में नया लक्ष्य मौजूदा कारोबार की तुलना में कई गुना बड़ा है। इसके लिए दोनों पक्ष कारोबारियों के बीच संपर्क बढ़ाने और नए व्यापारिक अवसर तलाशने पर जोर देंगे।
UPI को UZQR से जोड़ने की तैयारी
भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था UPI की पहुंच अब उज्बेकिस्तान तक बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने भारतीय UPI और उज्बेकिस्तान के UZQR सिस्टम को जोड़ने पर सहमति जताई है।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद भारतीय यात्री उज्बेकिस्तान में स्थानीय व्यापारियों के UZQR को स्कैन करके अपने UPI ऐप से भुगतान कर सकेंगे। इससे पर्यटकों और कारोबारियों के लिए भुगतान आसान होने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी भी मजबूत हो सकती है।
यूरेनियम और खनन में बढ़ेगा सहयोग
पीएम मोदी की यात्रा के दौरान यूरेनियम और अन्य भूवैज्ञानिक संसाधनों को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। भारत और उज्बेकिस्तान ने खनन तथा भूवैज्ञानिक संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज के मुताबिक, यात्रा के दौरान खनन और भूवैज्ञानिक संसाधनों से जुड़े सहयोग को लेकर समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी।
यूरेनियम की आपूर्ति को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने दीर्घकालिक योजना तैयार करने की बात कही। दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
व्यापारिक नेताओं की होगी भागीदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष एक शिखर सम्मेलन आयोजित करेंगे, जिसमें भारत और उज्बेकिस्तान के कारोबारी नेता भी हिस्सा लेंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के उद्योगों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा देना और नए कारोबारी अवसरों की पहचान करना होगा।
हर हफ्ते 14 सीधी उड़ानें
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच कनेक्टिविटी को लेकर भी तस्वीर सकारात्मक है। राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के अनुसार, दोनों देशों के बीच फिलहाल हर सप्ताह 14 सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं।
बेहतर हवाई संपर्क से व्यापार के साथ-साथ पर्यटन, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हिंदी और खेलों को बढ़ावा देने पर जोर
दोनों देशों ने हिंदी और खेलों को बढ़ावा देने के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके लिए छात्रवृत्ति समेत कई पहलों पर काम किया जाएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान खेल तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए मिलकर काम करेंगे। इससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को नई मजबूती मिल सकती है।
बौद्ध स्थलों के संरक्षण पर समझौता
यात्रा के दौरान संस्कृति और विरासत से जुड़े समझौते भी हुए। उज्बेकिस्तान में स्थित फयाज़ टेपा और कारा टेपा बौद्ध स्थलों के संरक्षण को लेकर दोनों पक्षों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।
इसके अलावा खनन, संस्कृति, उच्च शिक्षा, पर्यटन और आयुर्वेद समेत कई क्षेत्रों में समझौतों और सहमति पत्रों का आदान-प्रदान हुआ।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों के लिए क्यों अहम है यात्रा?
पीएम मोदी की यात्रा में हुए समझौतों से साफ है कि भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध केवल पारंपरिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। 5 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य, UPI-UZQR कनेक्टिविटी, यूरेनियम सहयोग, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में हुए फैसले दोनों देशों के रिश्तों को आर्थिक और रणनीतिक रूप से नई दिशा दे सकते हैं।
खास तौर पर डिजिटल पेमेंट और खनन जैसे क्षेत्रों में सहयोग आने वाले वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच कारोबार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।


