MediElaj: भारत में हेल्थकेयर की पहुंच को लेकर शहरों और छोटे कस्बों के बीच अब भी बड़ा अंतर है। बड़े महानगरों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टर, अस्पताल और आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हैं, वहीं टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोगों को सामान्य स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ सलाह के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इसी चुनौती को तकनीक के जरिए कम करने की कोशिश कर रहा है MediElaj।
2023 में शुरू हुआ MediElaj एक AI-संचालित डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म है, जिसका फोकस हेल्थ स्क्रीनिंग, शुरुआती जोखिम की पहचान, डॉक्टर कंसल्टेशन और डायग्नोस्टिक सेवाओं को लोगों के करीब लाने पर है। कंपनी हेल्थ कियोस्क, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के जरिए खासतौर पर उन इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दे रही है, जहां पारंपरिक हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है।
MediElaj के सह-संस्थापक और CEO उमेश खत्री को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनके मुताबिक, हेल्थकेयर में AI का उद्देश्य डॉक्टरों को हटाना नहीं, बल्कि उनकी पहुंच और क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए।
2023 में हुई MediElaj की शुरुआत, क्या है कंपनी का उद्देश्य?
MediElaj की शुरुआत 2023 में इस विचार के साथ हुई कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कंपनी AI और डिजिटल हेल्थ तकनीक का इस्तेमाल करके देश के अलग-अलग हिस्सों में हेल्थकेयर की पहुंच को आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उमेश खत्री के अनुसार, भारत में एक तरफ विश्वस्तरीय अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद हैं, लेकिन दूसरी तरफ बड़ी आबादी ऐसी भी है, जिसे शुरुआती स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञ सलाह और समय पर बीमारी की पहचान के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
खासकर छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता, दूरी, इलाज का खर्च और समय बड़ी चुनौतियां हैं। कई बार इन्हीं कारणों से लोग बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और इलाज तब शुरू होता है जब समस्या गंभीर हो चुकी होती है।
MediElaj का उद्देश्य इसी अंतर को कम करना है। कंपनी ऐसा हेल्थकेयर मॉडल विकसित करना चाहती है, जिसमें तकनीक डॉक्टरों या अस्पतालों का विकल्प न बने, बल्कि उनकी पहुंच और क्षमता को बढ़ाने का माध्यम बने।
छोटे शहरों में हेल्थकेयर की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन चुनौती केवल अस्पताल या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी तक सीमित नहीं है। यहां एक्सेस, अफोर्डेबिलिटी और अवेलेबिलिटी के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है।
कई छोटे शहरों में मरीज को सामान्य मेडिकल कंसल्टेशन के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। विशेषज्ञ डॉक्टर हर क्षेत्र में उपलब्ध नहीं होते और डायग्नोस्टिक सेवाओं की सुविधा भी हर जगह समान नहीं है।
इसका सीधा असर बीमारी की पहचान पर पड़ता है। अगर किसी बीमारी का पता देर से चलता है तो इलाज की जटिलता और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं।
यही वजह है कि केवल अस्पतालों और डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। ऐसे हेल्थकेयर डिलीवरी मॉडल की जरूरत है, जो सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद ज्यादा लोगों तक प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा सके।
यहीं डिजिटल हेल्थ एक अहम भूमिका निभा सकता है।
AI और डिजिटल हेल्थ कैसे बदल सकते हैं हेल्थकेयर की तस्वीर?
AI और डिजिटल हेल्थ की एक बड़ी खासियत यह है कि इनकी मदद से स्वास्थ्य सेवाओं और विशेषज्ञता को भौगोलिक सीमाओं से कुछ हद तक अलग किया जा सकता है।
इसका मतलब है कि छोटे शहर या दूरदराज के इलाके में रहने वाले व्यक्ति को हर स्वास्थ्य समस्या के लिए महानगर की यात्रा करने की जरूरत न पड़े। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रारंभिक हेल्थ असेसमेंट, स्क्रीनिंग, रिस्क आइडेंटिफिकेशन और डॉक्टर से कंसल्टेशन तक पहुंच आसान हो सकती है।
AI का इस्तेमाल खासतौर पर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और अर्ली रिस्क डिटेक्शन में उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति में हाइपरटेंशन, डायबिटीज या किसी क्रॉनिक कंडीशन से जुड़े शुरुआती जोखिम संकेत दिखाई देते हैं, तो तकनीक उसे समय रहते मेडिकल सलाह लेने के लिए प्रेरित कर सकती है।
हालांकि MediElaj AI को डॉक्टर का विकल्प नहीं मानता। कंपनी के अनुसार, AI का बेहतर इस्तेमाल डॉक्टरों की पहुंच बढ़ाने, शुरुआती स्क्रीनिंग और रिस्क असेसमेंट को बेहतर बनाने तथा हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को अधिक जानकारी उपलब्ध कराने में किया जा सकता है।
इसी सोच के साथ MediElaj AI, डायग्नोस्टिक्स और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को एक साथ जोड़ने वाले टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड मॉडल पर काम कर रहा है।
छोटे शहरों में AI हेल्थकेयर को अपनाने में क्या दिक्कतें हैं?
AI आधारित हेल्थकेयर को छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में सिर्फ तकनीक विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है। इसके सामने कई दूसरी चुनौतियां भी हैं।
1. तकनीक पर भरोसा
हेल्थकेयर एक संवेदनशील क्षेत्र है। मरीजों को यह समझना जरूरी है कि AI किस तरह उनकी मदद कर रहा है और मेडिकल निर्णय लेने में डॉक्टर की भूमिका क्या है।
2. डिजिटल लिटरेसी
तकनीक उपलब्ध होने और उसका सही तरीके से इस्तेमाल होने में अंतर है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल हेल्थ सेवाओं को सफल बनाने के लिए लोगों में जागरूकता और डिजिटल समझ बढ़ाना भी जरूरी होगा।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर
रिलायबल इंटरनेट कनेक्टिविटी, डायग्नोस्टिक उपकरण, डिवाइस इंटरऑपरेबिलिटी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।
4. डेटा सिक्योरिटी और प्राइवेसी
हेल्थ डेटा बेहद संवेदनशील होता है। इसलिए डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स के लिए डेटा सिक्योरिटी, प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
5. क्लिनिकल वैलिडेशन
AI हेल्थकेयर सिस्टम को केवल टेक्नोलॉजी के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। इसकी उपयोगिता, सुरक्षा और क्लिनिकल परिणामों का उचित मूल्यांकन भी जरूरी है।
उमेश खत्री के अनुसार, इंडस्ट्री को जिम्मेदार इनोवेशन, क्लिनिकल वैलिडेशन, साइबर सिक्योरिटी और रेगुलेटरी कंप्लायंस पर लगातार निवेश करना होगा। वहीं नीति-निर्माताओं को ऐसे नियम तैयार करने होंगे जो इनोवेशन को बढ़ावा देने के साथ मरीजों की सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी भी सुनिश्चित करें।
क्या छोटे शहरों में डिजिटल हेल्थ का इस्तेमाल महानगरों से ज्यादा बढ़ सकता है?
आने वाले पांच वर्षों में छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल हेल्थ के तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि महानगरों में पहले से ही मजबूत हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।
इसके विपरीत, छोटे शहरों में डिजिटल हेल्थ मौजूदा कमियों को दूर करने का एक नया रास्ता दे सकता है।
जिस तरह मोबाइल टेक्नोलॉजी ने कई क्षेत्रों में पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को कम करने में मदद की, उसी तरह डिजिटल हेल्थ भी हेल्थकेयर डिलीवरी का नया मॉडल तैयार कर सकता है।
हालांकि इसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग महत्वपूर्ण होगा।
सरकार के पास बड़े पैमाने पर पब्लिक हेल्थ नेटवर्क और पहुंच है, जबकि निजी क्षेत्र टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और एक्जीक्यूशन की क्षमता ला सकता है। दोनों के सहयोग से हेल्थकेयर को केवल अर्बन-सेंट्रिक मॉडल से निकालकर ज्यादा पॉपुलेशन-सेंट्रिक मॉडल की ओर ले जाया जा सकता है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में किन स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे ज्यादा जरूरत?
MediElaj के अनुभव के अनुसार, छोटे शहरों में जरूरत सिर्फ बीमारी का इलाज उपलब्ध कराने की नहीं है। इससे पहले की प्रक्रिया—यानी समय पर स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच—भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
कई लोग तब हेल्थकेयर सिस्टम तक पहुंचते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। ऐसे में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को प्राथमिक स्तर पर मजबूत करना जरूरी हो जाता है।
MediElaj इसी दिशा में एक इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर इकोसिस्टम तैयार करने पर काम कर रहा है। इसमें AI-बेस्ड हेल्थ असेसमेंट, डिजिटल हेल्थ एक्सेस और डायग्नोस्टिक क्षमताओं को एक साथ लाने की कोशिश की जा रही है।
कंपनी का हेल्थ कियोस्क मॉडल विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है।
इन कियोस्क के जरिए लोगों को अपने आसपास बेसिक हेल्थ स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक सेवाओं तक पहुंच देने और जरूरत पड़ने पर उन्हें मेडिकल कंसल्टेशन तथा अन्य हेल्थकेयर सुविधाओं से जोड़ने का लक्ष्य है।
कंपनी के अनुसार, तकनीक तभी उपयोगी है जब उसका फायदा मरीज को कम समय, कम दूरी और कम लागत में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में मिले।
अगले दशक में कैसा होगा भारत का हेल्थकेयर मॉडल?
आने वाले वर्षों में भारत के हेल्थकेयर सिस्टम में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख भूमिका प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, AI, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कनेक्टेड डायग्नोस्टिक्स की हो सकती है।
प्रिवेंटिव और प्रेडिक्टिव हेल्थकेयर
हेल्थकेयर का फोकस केवल बीमारी के इलाज से आगे बढ़कर बीमारी की शुरुआती पहचान और कई मामलों में उसे रोकने की दिशा में जा सकता है।
AI-असिस्टेड हेल्थकेयर
AI डॉक्टरों को रिप्लेस करने के बजाय स्क्रीनिंग, रिस्क असेसमेंट, डॉक्यूमेंटेशन, पेशेंट मॉनिटरिंग और डिसीजन सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में मदद कर सकता है।
मरीज के करीब पहुंचेगी हेल्थकेयर
भविष्य में हेल्थ सेवाएं केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रहने के बजाय हेल्थ कियोस्क, प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर, मोबाइल हेल्थ यूनिट्स, फार्मेसी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए मरीजों के करीब पहुंच सकती हैं।
कनेक्टेड डायग्नोस्टिक्स और हेल्थ रिकॉर्ड
डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और कनेक्टेड डायग्नोस्टिक सिस्टम मरीज की स्वास्थ्य यात्रा को अलग-अलग कंसल्टेशन के बजाय एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में समझने में मदद कर सकते हैं।
AI से ज्यादा जरूरी है भरोसा
MediElaj के मुताबिक, भविष्य का हेल्थकेयर सिर्फ टेक्नोलॉजी-ड्रिवन नहीं होगा, बल्कि ट्रस्ट-ड्रिवन और पेशेंट-सेंट्रिक भी होना जरूरी है।
AI कितना एडवांस्ड है, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि उसका इस्तेमाल क्लिनिकली वैलिडेटेड, सुरक्षित, किफायती और मरीजों के लिए वास्तविक रूप से उपयोगी हो।
MediElaj का दीर्घकालिक विजन ऐसा हेल्थकेयर इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें किसी व्यक्ति को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता उसकी भौगोलिक स्थिति या आर्थिक क्षमता से तय न हो।
कंपनी का मानना है कि AI और डिजिटल हेल्थ भारत के मौजूदा हेल्थकेयर सिस्टम को खत्म करने के बजाय उसे एक्सटेंड, स्ट्रेंथेन और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का काम कर सकते हैं।
अगर इस बदलाव को सही तरीके से लागू किया जाता है, तो भारत न केवल अपने हेल्थकेयर एक्सेस गैप को कम कर सकता है, बल्कि ग्लोबल साउथ के दूसरे देशों के लिए भी एक स्केलेबल डिजिटल हेल्थकेयर मॉडल पेश कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख MediElaj द्वारा उपलब्ध कराए गए इंटरव्यू के सवाल-जवाब पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार, अनुमान और भविष्य से जुड़े दावे संबंधित वक्ता/संस्था के हैं। NewsJagran.in किसी उत्पाद, तकनीक, स्वास्थ्य सेवा या उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं करता। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए प्रकाशित की गई है।


