Jackson Hole Meeting: अमेरिका में जिस जैक्सन होल बैठक पर दुनिया भर के निवेशकों की नजर थी, वह पूरी हो चुकी है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के भाषण के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में शुरुआती बढ़त कमजोर पड़ गई और प्रमुख इंडेक्स दबाव में आ गए। खासतौर पर टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों ने फेड की मौद्रिक नीति और महंगाई को लेकर दिए गए संकेतों का आकलन शुरू कर दिया है।
ऐतिहासिक तौर पर जैक्सन होल में फेड चेयरमैन का भाषण शेयर बाजार के लिए हमेशा बड़ा ट्रिगर नहीं रहा है। वर्ष 2000 से अब तक ऐसे भाषण के बाद अगले सप्ताह अमेरिकी इंडेक्स में औसतन करीब 0.4% का बदलाव देखा गया है। हालांकि, जब यह भाषण मौद्रिक नीति में संभावित बदलाव से पहले आता है, तब बाजार की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
S&P 500 में गिरावट, Nasdaq पर भी दबाव
फेड चेयरमैन के भाषण के बाद अमेरिका के प्रमुख शेयर बाजार इंडेक्स में उतार-चढ़ाव बढ़ गया। S&P 500 करीब 0.2% नीचे आया। इंडस्ट्रियल और आईटी शेयरों में कमजोरी ने इंडेक्स पर दबाव बनाया।
वहीं, टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए अहम Nasdaq 100 करीब 0.7% फिसल गया। इंडेक्स ने शुरुआती बढ़त गंवा दी। सेमीकंडक्टर कंपनियों में भी व्यापक बिकवाली देखने को मिली और इस क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियों के शेयर लाल निशान में आ गए।
खास तौर पर Nvidia के शेयरों में ज्यादा दबाव देखने को मिला। टेक शेयरों में कमजोरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऊंची ब्याज दरों का असर आमतौर पर ज्यादा वैल्यूएशन वाले ग्रोथ और टेक शेयरों पर पड़ता है।
Dow Jones Industrial Average भी शुरुआती बढ़त बरकरार नहीं रख सका और मामूली गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया।
फेड के रुख से क्यों घबराए निवेशक?
फेड चेयरमैन केविन वार्श ने अपने भाषण में आने वाले समय की मौद्रिक नीति को लेकर स्पष्ट दिशा बताने से परहेज किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए जिसमें बाजार अपने अगले ट्रेड के लिए मुख्य रूप से फेडरल रिजर्व के फैसलों का इंतजार करे।
उनके मुताबिक एक शांत और स्थिर फेडरल रिजर्व अपने उद्देश्यों को हासिल करने में ज्यादा सक्षम होता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में अभी काफी काम बाकी है।
यही बयान बाजार के लिए महत्वपूर्ण बन गया। निवेशकों को आशंका हुई कि महंगाई पर नियंत्रण फेड की प्राथमिकता बनी हुई है और ब्याज दरों में जल्द या आक्रामक कटौती की उम्मीदों को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है।
महंगाई को लेकर फेड की चिंता बरकरार
वार्श ने कहा कि महंगाई लंबे समय से जरूरत से ज्यादा ऊंची बनी हुई है। फेड का दीर्घकालिक लक्ष्य 2% महंगाई दर के आसपास है और निवेशक यह जानना चाहते हैं कि केंद्रीय बैंक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह की नीति अपनाएगा।
बाजार में ब्याज दरों की उम्मीदों का असर सीधे तौर पर बॉन्ड यील्ड, डॉलर और शेयरों के वैल्यूएशन पर पड़ता है। इसलिए फेड चेयर के भाषण में भविष्य की दरों को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिलने से ट्रेडर्स सतर्क हो गए।
तेल की कीमतों में भी गिरावट
अमेरिकी शेयर बाजार के साथ कमोडिटी मार्केट में भी हलचल देखने को मिली। तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसका एक कारण तेल बाजार से जुड़ी भू-राजनीतिक और आपूर्ति संबंधी खबरों को माना जा रहा है।
तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC से वेनेजुएला के बाहर निकलने पर विचार किए जाने की खबर भी बाजार के लिए चर्चा का विषय रही। हालांकि, तेल की कीमतों पर असर डालने वाले कई अन्य कारक भी मौजूद हैं, इसलिए केवल एक खबर के आधार पर कीमतों की दिशा तय करना उचित नहीं होगा।
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
सिटी वेल्थ की चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर केट मूर ने Bloomberg TV के साथ बातचीत में कहा कि निवेशक अमेरिकी अर्थव्यवस्था, कंपनियों के मुनाफे और 2% महंगाई लक्ष्य को लेकर फेड की प्रतिबद्धता पर स्पष्टता चाहते थे और उन्हें इसका संकेत मिला है।
उनके मुताबिक इसी वजह से भाषण के बाद इक्विटी मार्केट में कुछ स्थिरता भी देखने को मिली। यानी बाजार की प्रतिक्रिया पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही, बल्कि निवेशकों ने फेड के संकेतों को समझने के बाद आगे की रणनीति तय करने की कोशिश की।
भारतीय शेयर बाजार के लिए क्या मतलब?
अमेरिकी बाजार की चाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। खासकर Nifty और Sensex में सोमवार के कारोबार के दौरान ग्लोबल संकेतों का असर देखने को मिल सकता है।
अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में मजबूती आती है तथा निवेशक ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कम करते हैं, तो उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के प्रवाह पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर भारतीय इक्विटी पर भी हो सकता है।
दूसरी ओर, अगर बाजार फेड के रुख को पहले से अनुमानित मानता है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को सकारात्मक रूप में लेता है, तो बिकवाली का दबाव सीमित भी रह सकता है।
निवेशकों को किन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों के लिए कुछ प्रमुख संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे:
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव
- डॉलर इंडेक्स की चाल
- फेड की अगली ब्याज दर बैठक को लेकर बाजार की उम्मीदें
- अमेरिकी महंगाई और रोजगार से जुड़े आंकड़े
- Nvidia समेत बड़े टेक शेयरों की चाल
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख
कुल मिलाकर, जैक्सन होल बैठक के बाद बाजार को ब्याज दरों और महंगाई पर फेड के रुख से मिले संकेतों का मूल्यांकन करना होगा। फिलहाल निवेशकों के लिए यह समझना ज्यादा जरूरी है कि फेड आगे के फैसले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर कैसे लेता है। इसलिए आने वाले महंगाई, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के आंकड़े अमेरिकी बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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