Sugar Price Update: जून के बाद लगातार बढ़ रही चीनी की कीमतों में अब नरमी दिखाई देने लगी है। रक्षाबंधन के बाद मिल स्तर पर चीनी के दाम में गिरावट दर्ज की गई है और इसका असर जल्द ही खुदरा बाजार में भी दिखाई देने की उम्मीद है। इसी बीच केंद्र सरकार ने आने वाले त्योहारों के दौरान चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए बिक्री व्यवस्था में बदलाव किया है।
सरकार की ओर से देशभर की चीनी मिलों में फिजिकल स्टॉक वेरिफिकेशन कराया गया है। इस जांच में कई मिलों के पास घोषित मात्रा से अधिक चीनी का भंडार भी मिला। ऐसे में सरकार का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं है और लोगों को घबराकर जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर रखने की आवश्यकता नहीं है।
चीनी की कीमतों में अब क्यों आई गिरावट?
पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। जून के बाद कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बाजार में सप्लाई को लेकर भी सवाल उठने लगे थे। हालांकि, रक्षाबंधन से पहले मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 20 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने भी मिलों में कीमतों में आई नरमी का उल्लेख किया था। उनका अनुमान था कि इसका असर खुदरा बाजार में भी दिखाई देने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खुदरा बाजार में भी चीनी की कीमतों में कमी का सिलसिला शुरू हो चुका है। औसत खुदरा कीमत में करीब 73 पैसे प्रति किलोग्राम की कमी दर्ज की गई, जिसके बाद चीनी का भाव लगभग ₹64.33 प्रति किलोग्राम रह गया।
क्या त्योहारों में चीनी की कमी होगी?
आने वाले त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों के कारण चीनी की मांग बढ़ सकती है। इसी वजह से सरकार ने पहले ही चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक की स्थिति की जांच कराई है।
फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान कई जगहों पर मिलों के पास सरकार को दिए गए मासिक स्टॉक विवरण में बताई गई मात्रा से ज्यादा चीनी उपलब्ध मिली। इससे यह पुष्टि हुई है कि देश में फिलहाल चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है।
सरकार ने उपभोक्ताओं को भी संकेत दिया है कि बाजार में कमी की आशंका के चलते घबराकर खरीदारी करने या जरूरत से ज्यादा चीनी स्टोर करने की जरूरत नहीं है।
कुछ मिलों पर कम बिक्री का भी मामला
जांच के दौरान सरकार को यह भी पता चला कि कुछ चीनी मिलें उन्हें आवंटित मासिक कोटे की पूरी मात्रा बाजार में नहीं बेच रही थीं। निर्धारित कोटे के मुकाबले कम चीनी की बिक्री होने से बाजार में उपलब्ध सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा कुछ मामलों में महीने की शुरुआत में मिलों द्वारा बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई चीनी का उठान खरीदार महीने के अंत में कर रहे थे। इससे कागज पर सप्लाई उपलब्ध होने के बावजूद बाजार में अस्थायी रूप से कमी जैसी स्थिति बन सकती थी।
सितंबर से लागू होगी पखवाड़ेवार कोटा व्यवस्था
इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने सितंबर से चीनी के आवंटन की पखवाड़ेवार व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।
नई व्यवस्था के तहत 15 दिनों के लिए मिलों को जितना चीनी कोटा आवंटित किया जाएगा, उसमें से कम से कम 40 फीसदी मात्रा पहले सप्ताह में बेचनी होगी। बाकी मात्रा अगले सप्ताह में बाजार में उतारनी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य चीनी की बिक्री को एक साथ रोकने या महीने के अंत तक टालने की संभावनाओं को कम करना है। इससे बाजार में पूरे महीने सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार रियल टाइम में रखेगी नजर
नई पखवाड़ेवार व्यवस्था से सरकार को चीनी की बिक्री और बाजार में उपलब्धता पर पहले की तुलना में ज्यादा करीब से नजर रखने में मदद मिलेगी।
अगर किसी क्षेत्र में मांग के मुकाबले चीनी की उपलब्धता कम दिखाई देती है तो स्थिति के आधार पर अतिरिक्त कोटा जारी किया जा सकता है। इस तरह सरकार बाजार में सप्लाई की निगरानी रियल टाइम के आधार पर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
आम लोगों के लिए क्या है मतलब?
चीनी की कीमतों में मिल स्तर पर गिरावट आने के बाद खुदरा बाजार में भी इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देने की उम्मीद है। वहीं, सितंबर से लागू होने वाली नई बिक्री व्यवस्था का मकसद त्योहारों के दौरान बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखना है।
सरकार की जांच में पर्याप्त स्टॉक मिलने और पखवाड़ेवार कोटा व्यवस्था लागू होने से फिलहाल चीनी की कृत्रिम कमी की आशंका कम होती दिखाई दे रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं को जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है।


