Tata Group-Shapoorji Pallonji Group: टाटा संस में शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप की 18.4% हिस्सेदारी को लेकर टाटा ग्रुप और एसपी ग्रुप के बीच बातचीत जारी है। हिस्सेदारी के निपटारे के लिए शेयर स्वैप, टाटा संस की ओर से हिस्सेदारी खरीदने और किसी बाहरी निवेशक को हिस्सेदारी बेचने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप और शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप के बीच लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी विवाद को सुलझाने की कोशिशें अब एक अहम मोड़ पर पहुंचती दिख रही हैं। दोनों पक्ष Tata Sons में एसपी ग्रुप की 18.4% हिस्सेदारी के भविष्य को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस हिस्सेदारी के समाधान के लिए कई विकल्पों पर चर्चा हो रही है। इनमें टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों के बदले टाटा संस की हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा टाटा संस खुद हिस्सेदारी खरीद सकता है या एसपी ग्रुप किसी बाहरी निवेशक को अपनी हिस्सेदारी बेच सकता है।
SP Group पर भारी कर्ज, जल्द समाधान की जरूरत
एसपी ग्रुप के लिए टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा या पूरी हिस्सेदारी बेचने का सबसे बड़ा कारण उसका कर्ज बताया जा रहा है। ग्रुप को आने वाले वर्षों में अपनी वित्तीय देनदारियों को पूरा करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, एसपी ग्रुप के हालिया बॉन्ड इश्यू का पहला ब्याज भुगतान जुलाई 2028 में होना है। ऐसे में अगले करीब 18 महीनों में हिस्सेदारी से जुड़े किसी समाधान तक पहुंचना समूह के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टाटा संस में 18.4% हिस्सेदारी एसपी ग्रुप की सबसे महत्वपूर्ण संपत्तियों में से एक है। अगर इस हिस्सेदारी का मौद्रीकरण होता है, तो इससे ग्रुप को कर्ज कम करने और अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
पहला विकल्प: Tata की कंपनियों के शेयरों से हो सकता है स्वैप
बातचीत में सबसे दिलचस्प विकल्प शेयर स्वैप का है। इसके तहत एसपी ग्रुप टाटा संस में अपनी कुछ या पूरी 18.4% हिस्सेदारी के बदले टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयर हासिल कर सकता है।
इसमें Tata Power जैसी कंपनियों के शेयर शामिल होने की संभावना बताई जा रही है।
इस व्यवस्था का फायदा यह होगा कि एसपी ग्रुप को टाटा संस जैसी अनलिस्टेड होल्डिंग के बदले ज्यादा लिक्विड और बाजार में आसानी से खरीदे-बेचे जा सकने वाले शेयर मिल सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इन शेयरों को बेचकर ग्रुप नकदी जुटा सकता है और कर्ज चुकाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता है।
हालांकि, इस विकल्प में दोनों पक्षों के लिए हिस्सेदारी की वैल्यू तय करना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।
दूसरा विकल्प: Tata Sons खुद खरीद सकता है हिस्सेदारी
दूसरा रास्ता यह है कि टाटा संस खुद एसपी ग्रुप की 18.4% हिस्सेदारी खरीद ले।
इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बैंकों से फंडिंग या क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल किए जाने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। अगर यह सौदा होता है, तो टाटा संस की शेयरहोल्डिंग संरचना में भी बड़ा बदलाव आएगा।
हालांकि, इतनी बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी। इसलिए फंडिंग की व्यवस्था, वैल्यूएशन और नियामकीय मंजूरियां इस विकल्प की सफलता में अहम भूमिका निभाएंगी।
तीसरा विकल्प: किसी बड़े बाहरी निवेशक को हिस्सेदारी बिक्री
तीसरा विकल्प एसपी ग्रुप की ओर से अपनी टाटा संस की हिस्सेदारी किसी बाहरी निवेशक को बेचने का है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस स्थिति में किसी बड़े वैश्विक निवेशक को प्राथमिकता दी जा सकती है। इससे एसपी ग्रुप को अपनी हिस्सेदारी के बदले सीधे नकदी मिल सकती है, जिसका इस्तेमाल कर्ज घटाने में किया जा सकता है।
लेकिन यहां भी एक बड़ी चुनौती सामने आएगी—टाटा संस की वैल्यूएशन। टाटा संस में एयर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई बड़े अनलिस्टेड कारोबार और संपत्तियां हैं। इसलिए कंपनी की उचित वैल्यू तय करना आसान नहीं होगा।
टाटा संस की वैल्यूएशन बन सकती है सबसे बड़ी चुनौती
टाटा संस के शेयर बाजार में सीधे लिस्टेड नहीं हैं। ऐसे में इसकी वैल्यूएशन को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाना सौदे की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हो सकता है।
इसके अलावा टाटा संस की संपत्तियों और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं को भी वैल्यूएशन में शामिल करना होगा। यही वजह है कि शेयर स्वैप हो या हिस्सेदारी की सीधी बिक्री, दोनों ही मामलों में कीमत तय करना अहम रहेगा।
कानूनी और रेगुलेटरी पहलू भी महत्वपूर्ण
प्रस्तावित सौदे को लेकर दोनों पक्षों के सलाहकार कानूनी और नियामकीय पहलुओं की भी जांच कर रहे हैं।
खासकर अगर टाटा की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों के बदले टाटा संस की हिस्सेदारी ट्रांसफर की जाती है, तो शेयर ट्रांसफर, वैल्यूएशन और अन्य बाजार नियमों का पालन करना होगा।
टाटा संस की शेयरहोल्डिंग संरचना और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के इससे जुड़े नियम भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाते हैं। इसलिए किसी भी समाधान के लिए सिर्फ दोनों पक्षों की कारोबारी सहमति पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि जरूरी नियामकीय प्रक्रियाओं को भी पूरा करना होगा।
Noel Tata की भूमिका क्यों अहम?
इस पूरी बातचीत में Noel Tata की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वह टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी है।
रिपोर्टों के अनुसार, नोएल टाटा के प्रतिनिधि इस समाधान को लेकर बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे हैं। टाटा परिवार की ओर से इस मामले में समझौते की कोशिशों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों परिवारों के बीच कारोबारी रिश्तों के साथ पारिवारिक संबंध भी हैं।
नोएल टाटा की शादी आलू मिस्त्री से हुई है, जो एसपी ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री की बहन हैं। इस पारिवारिक रिश्ते की वजह से दोनों पक्षों के बीच सीधे संवाद और समाधान की संभावना को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
N Chandrasekaran के बाद बदला समीकरण
टाटा संस के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने फरवरी में अपने पद से हटने का फैसला घोषित किया था। ऐसे में टाटा परिवार की ओर से नोएल टाटा की भूमिका इस मामले में और महत्वपूर्ण हो गई है।
हालांकि, हिस्सेदारी को लेकर बातचीत अभी किसी अंतिम समझौते तक पहुंची है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। तीनों विकल्पों में से कौन सा रास्ता अपनाया जाएगा, यह टाटा संस की वैल्यूएशन, फंडिंग की उपलब्धता, नियामकीय मंजूरियों और एसपी ग्रुप की वित्तीय जरूरतों पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, अगर एसपी ग्रुप अपनी 18.4% हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा नकदी या लिक्विड एसेट्स में बदलने में सफल होता है, तो इससे उसे कर्ज कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है। वहीं टाटा ग्रुप के लिए यह सौदा टाटा संस की ओनरशिप संरचना को और सरल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


