Bitcoin vs Gold vs Silver: निवेश के लिहाज से बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर तीनों ने अलग-अलग समय में शानदार प्रदर्शन किया है। हालांकि, इन तीनों एसेट्स का रिटर्न एक जैसा नहीं रहा। छोटी अवधि में बिटकॉइन ने बढ़त बनाई, जबकि 3 साल की अवधि में सिल्वर ने सालाना औसत रिटर्न के मामले में दोनों को पीछे छोड़ दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किस एसेट ने निवेशकों को सबसे ज्यादा कमाई कराई और क्या सिर्फ पुराने रिटर्न के आधार पर निवेश का फैसला लेना सही है?
अगर कोई निवेशक हर महीने ₹10,000 की SIP बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में करता, तो अलग-अलग अवधि में उसके निवेश का प्रदर्शन काफी अलग दिखाई देता। यही वजह है कि किसी भी एसेट को चुनने से पहले केवल रिटर्न ही नहीं, बल्कि जोखिम और उतार-चढ़ाव को समझना भी जरूरी है।
छोटी अवधि में बिटकॉइन रहा सबसे आगे
1 महीने और 6 महीने की अवधि के आंकड़ों में बिटकॉइन ने गोल्ड और सिल्वर के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। 1 महीने की अवधि में बिटकॉइन का रिटर्न 17.23% रहा, जबकि 6 महीने में यह बढ़कर 22.26% हो गया।
गोल्ड ने भी इस दौरान मजबूती दिखाई, लेकिन बिटकॉइन की तेजी अधिक रही। इससे साफ है कि छोटी अवधि में क्रिप्टोकरेंसी में तेज मूवमेंट देखने को मिल सकता है।
हालांकि, यही तेजी निवेशकों के लिए जोखिम भी बढ़ाती है। बिटकॉइन की कीमत कम समय में काफी तेजी से ऊपर या नीचे जा सकती है। इसलिए शॉर्ट टर्म के रिटर्न को देखकर इसके भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं मानी जा सकती।
3 साल में सिल्वर ने बिटकॉइन और गोल्ड को पछाड़ा
जब निवेश की अवधि बढ़ाकर 3 साल की जाती है, तो तस्वीर बदल जाती है। इस अवधि में सिल्वर सबसे आगे रहा।
3 साल की अवधि में सिल्वर का सालाना औसत रिटर्न 48.97% रहा। इसके मुकाबले बिटकॉइन का सालाना औसत रिटर्न 47.46% और गोल्ड का 41.06% रहा।
यानी तीन साल की अवधि में सिल्वर ने बिटकॉइन और गोल्ड दोनों को पीछे छोड़ दिया। यह आंकड़ा यह भी दिखाता है कि अलग-अलग एसेट का प्रदर्शन निवेश की अवधि के आधार पर काफी बदल सकता है।
₹10,000 की SIP से क्या तस्वीर सामने आती है?
मान लीजिए किसी निवेशक ने एक साल तक हर महीने ₹10,000 की रकम तीनों एसेट्स में नियमित रूप से निवेश की। इस तरह कुल निवेश ₹1.20 लाख होता।
SIP का फायदा यह है कि निवेशक को बाजार के किसी एक भाव पर पूरी रकम लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। हर महीने एक निश्चित रकम निवेश होने से अलग-अलग कीमतों पर यूनिट या एसेट खरीदा जाता है।
इससे बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान खरीदारी का औसत स्तर बदलता रहता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में SIP के नतीजे इनके वास्तविक प्राइस मूवमेंट और निवेश के तरीके पर निर्भर करेंगे।
बिटकॉइन ने 3 साल में भी की शानदार कमाई
CoinDCX की ग्रोथ और क्रिप्टो बिजनेस हेड मीनल ठुकराल के मुताबिक, बिटकॉइन का लंबी अवधि का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त 2023 को लगाए गए $26,162 बढ़कर $77,472 हो गए। यानी इस अवधि में निवेश की रकम करीब 3.44 गुना हो गई और रिटर्न 244% से ज्यादा रहा।
लेकिन बिटकॉइन का यह सफर बिल्कुल सीधा नहीं रहा। इस दौरान कीमत में कई बार बड़ी गिरावट भी देखने को मिली। इसलिए बिटकॉइन में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए केवल रिटर्न ही नहीं, बल्कि उस दौरान सहन किए गए उतार-चढ़ाव को समझना भी जरूरी है।
बिटकॉइन का सफर रहा बेहद उतार-चढ़ाव वाला
बिटकॉइन ने 7 अक्टूबर 2025 को $1,25,752 का ऑल टाइम हाई बनाया था। इसके बाद 2026 में इसकी कीमत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
15 जनवरी 2026 को बिटकॉइन करीब $96,931 तक पहुंचा था। इसके बाद इसमें गिरावट आई और 1 जुलाई को यह $58,562 तक फिसल गया।
अगस्त के पहले सप्ताह में बिटकॉइन करीब $62,000 से $65,000 के दायरे में कारोबार कर रहा था। वहीं 26 अगस्त तक इसकी कीमत करीब $80,000 से $80,300 के बीच पहुंच गई।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिटकॉइन में कुछ ही महीनों में काफी बड़ा प्राइस मूवमेंट देखने को मिल सकता है।
गोल्ड ने भी दिखाया बड़ा उतार-चढ़ाव
गोल्ड को आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसकी कीमत में भी हाल के समय में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
जनवरी 2026 में गोल्ड करीब $5,500 प्रति औंस के स्तर तक पहुंचा था। इसके बाद जुलाई में इसकी कीमत $4,000 प्रति औंस से नीचे चली गई।
हालांकि, इसके बाद गोल्ड ने फिर तेजी पकड़ी। 26 अगस्त तक इसकी कीमत $4,630 प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रही थी।
कमजोर डॉलर और अमेरिका की वित्तीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं ने भी गोल्ड की कीमतों को सपोर्ट किया।
सिल्वर में भी जुलाई के बाद आई तेजी
सिल्वर ने भी 2026 में काफी उतार-चढ़ाव देखा। जनवरी में इसकी कीमत करीब $120 प्रति औंस थी। इसके बाद जुलाई में यह गिरकर करीब $55-$60 प्रति औंस के दायरे में आ गया।
इसके बाद सिल्वर की कीमत में दोबारा तेजी देखने को मिली। 26 अगस्त तक यह करीब $63-$70 प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर रहा था।
सिल्वर की कीमत को गोल्ड की मजबूती से भी सपोर्ट मिला। इसके अलावा सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड भी इसकी कीमत के लिए अहम फैक्टर रहती है।
रिटर्न के साथ जोखिम देखना भी जरूरी
बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर के आंकड़े बताते हैं कि कोई एक एसेट हर अवधि में सबसे बेहतर प्रदर्शन नहीं करता।
- 1 महीने: बिटकॉइन आगे
- 6 महीने: बिटकॉइन आगे
- 3 साल: सिल्वर आगे
- 3 साल का सालाना औसत रिटर्न: सिल्वर 48.97%, बिटकॉइन 47.46%, गोल्ड 41.06%
इसलिए निवेश का फैसला केवल इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि पिछले कुछ समय में किस एसेट ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है।
बिटकॉइन में बहुत अधिक वोलैटिलिटी हो सकती है, जबकि सिल्वर में भी कीमतों में गोल्ड की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। गोल्ड अपेक्षाकृत स्थिर माना जाता है, लेकिन इसमें भी कीमतों में गिरावट संभव है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
निवेश से पहले अपनी जोखिम लेने की क्षमता, निवेश की अवधि और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी एसेट का पिछला रिटर्न भविष्य में उसी तरह का रिटर्न मिलने की गारंटी नहीं देता।
अगर निवेशक का लक्ष्य लंबी अवधि का है, तो केवल सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले एसेट के पीछे भागने के बजाय पोर्टफोलियो में जोखिम और विविधीकरण को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
निष्कर्ष: बिटकॉइन ने छोटी अवधि में बढ़त दिखाई, जबकि 3 साल की अवधि में सिल्वर ने सबसे ज्यादा सालाना औसत रिटर्न दिया। गोल्ड का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। इन आंकड़ों से एक बात स्पष्ट है—निवेश में केवल रिटर्न नहीं, बल्कि जोखिम और निवेश की अवधि को भी बराबर महत्व देना चाहिए।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की निवेश सलाह या सिफारिश नहीं है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या अन्य वित्तीय निर्णय से पहले योग्य वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। NewsJagran किसी भी वित्तीय प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।


