B. Nagendra Resignation: कर्नाटक की राजनीति में कथित वाल्मीकि घोटाले को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नागेंद्र के पास योजना और सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी थी। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कथित तौर पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में हुई वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी तेज कर दी है।
बी. नागेंद्र ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कथित घोटाले में उनकी कोई भूमिका नहीं है और उन्होंने अपनी इच्छा से मंत्री पद से इस्तीफा दिया है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री भी मानते हैं कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है।
बीजेपी की पदयात्रा से पहले आया इस्तीफा
मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा बीजेपी की प्रस्तावित पदयात्रा से ठीक पहले आया है। विपक्षी दल ने कथित वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर 1 सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक करीब 170 किलोमीटर की पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है।
बीजेपी और उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS लगातार नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रही थीं। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी धन के इस्तेमाल में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं।
नागेंद्र ने अपने इस्तीफे के बाद बीजेपी के आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने बिना पर्याप्त आधार के इस मामले को बड़ा मुद्दा बनाया और इससे निर्दोष लोगों की छवि प्रभावित हुई।
‘मैंने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया’
इस्तीफे के बाद बी. नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने खुद की इच्छा से पद छोड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और सरकार के विकास एजेंडे का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी विवाद की वजह से राज्य के विकास कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए।
नागेंद्र के अनुसार, उन्हें कथित घोटाले में आरोपी की तरह पेश किया गया, जबकि उनका कहना है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इस मुद्दे को इस्तेमाल किया।
पहले भी मंत्री पद से दे चुके हैं इस्तीफा
बी. नागेंद्र के लिए यह पहली बार नहीं है, जब किसी विवाद के बीच उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा हो। इससे पहले 2024 में कर्नाटक अनुसूचित जनजाति विकास बोर्ड से जुड़े कथित फंड डायवर्जन मामले में उनका नाम सामने आने के बाद उन्होंने सिद्धारमैया सरकार में अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
उस मामले में करीब 94 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन के आरोप सामने आए थे। बाद में इस मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई।
नागेंद्र ने मौजूदा विवाद के संदर्भ में कहा कि मामले की जांच SIT और CID द्वारा भी की गई थी। उन्होंने दावा किया कि बाद में CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच भी हुई और उन्हें गिरफ्तार कर करीब तीन महीने जेल में रहना पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि बाद में दाखिल की गई दूसरी चार्जशीट में उनका नाम शामिल किया गया, जिसे उन्होंने अनुचित बताया।
कर्नाटक विधानसभा में भी उठा था मुद्दा
कथित वाल्मीकि निगम घोटाले का मुद्दा कर्नाटक विधानसभा के मॉनसून सत्र में भी जोरदार तरीके से उठा था। बीजेपी ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की थी।
विपक्ष का कहना था कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर, नागेंद्र और कांग्रेस की ओर से आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया गया।
नागेंद्र ने विपक्ष पर विधानसभा में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सूखे, KPSC और दूसरे मुद्दों पर चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय विरोध प्रदर्शन को प्राथमिकता दी।
बीजेपी ने लगाए गंभीर आरोप
बीजेपी एमएलसी एन. रवि कुमार ने नागेंद्र के इस्तीफे को लेकर कहा कि मंत्री को इस्तीफा देना ही था। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित घोटाले में बड़ी संख्या में बैंक खातों के जरिए सरकारी धन का लेनदेन किया गया।
बीजेपी नेता ने दावा किया कि करीब 600 खातों में पैसे जमा किए गए और आरोप लगाया कि सरकारी धन का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों और अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया।
हालांकि, ये सभी आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और नागेंद्र ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
अब कांग्रेस सरकार पर बढ़ेगा दबाव
बी. नागेंद्र के इस्तीफे के बाद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर विपक्ष का दबाव और बढ़ सकता है। बीजेपी पहले ही इस मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी कर चुकी है।
रायचूर से बल्लारी तक प्रस्तावित पदयात्रा के जरिए बीजेपी सरकार को घेरने की कोशिश करेगी। वहीं, कांग्रेस के सामने यह चुनौती होगी कि वह कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवालों का राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर जवाब दे।
फिलहाल नागेंद्र ने स्पष्ट किया है कि वह खुद को निर्दोष मानते हैं और कथित वाल्मीकि घोटाले में अपनी भूमिका से इनकार करते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच और विपक्षी आंदोलन के बीच यह मामला कर्नाटक की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।


