US Fed Chair Kevin Warsh: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में इंफ्लेशन अभी 2% के लक्ष्य तक नहीं पहुंचा है और इस दिशा में फेड को अभी और काम करना होगा। वार्श की टिप्पणी से सितंबर की ब्याज दर बैठक को लेकर बाजार की नजरें और ज्यादा टिक गई हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई को लेकर अहम संकेत दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका में महंगाई को 2% के लक्ष्य तक लाने के लिए अभी और प्रयास की जरूरत है। उनके मुताबिक, हाल के कुछ आंकड़े उम्मीद से बेहतर जरूर रहे हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि महंगाई की समस्या पूरी तरह खत्म हो गई है।
वार्श ने यह टिप्पणी शुक्रवार को अमेरिका के व्योमिंग में आयोजित जैक्सन होल में फेड के वार्षिक सम्मेलन के दौरान की। मई में फेड चेयरमैन का पद संभालने के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक भाषण था। उनके बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे सितंबर में होने वाली फेड की अगली बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है।
2% महंगाई लक्ष्य पर फेड का फोकस
केविन वार्श ने कहा कि फेडरल रिजर्व का 2% महंगाई लक्ष्य अभी भी बरकरार है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करना है और इस लक्ष्य को हासिल करना उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
उन्होंने संकेत दिया कि महंगाई में गिरावट आने के बावजूद फेड अभी यह मानने की स्थिति में नहीं है कि कीमतों का दबाव पूरी तरह नियंत्रण में आ गया है। ऐसे में मौद्रिक नीति को लेकर आने वाले आर्थिक आंकड़े बेहद अहम रहेंगे।
PCE और CPI के आंकड़े उम्मीद से बेहतर
वार्श ने माना कि गर्मियों के दौरान अमेरिका के PCE और CPI महंगाई आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। इससे महंगाई के मोर्चे पर कुछ राहत जरूर मिली है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ बेहतर आंकड़ों के आधार पर महंगाई की व्यापक स्थिति में बड़े सुधार का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अमेरिका में महंगाई अभी भी फेड के 2% लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
यही वजह है कि फेड के सामने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बनी हुई है।
ब्याज दर फेड का सबसे बड़ा हथियार
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेडरल रिजर्व के पास सबसे प्रभावी साधनों में से एक ब्याज दर है। वार्श के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय परिस्थितियां बहुत ज्यादा सख्त नहीं हैं। ऐसे में ब्याज दरों के जरिए महंगाई पर दबाव बनाए रखना फेड की नीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
उनके बयान से संकेत मिलता है कि अगर महंगाई 2% की ओर लगातार और भरोसेमंद तरीके से आगे नहीं बढ़ती है, तो फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है।
ब्याज दरों को लेकर अर्थशास्त्रियों में मतभेद
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले महीनों में फेड ब्याज दरों के साथ क्या रुख अपनाता है। इस मुद्दे पर अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई अपेक्षा के मुताबिक नीचे नहीं आती है, तो फेड को ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। वहीं दूसरी ओर, अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार में कमजोरी के संकेत मिलने के कारण कुछ बाजार प्रतिभागी मौद्रिक नीति में नरमी की उम्मीद कर रहे हैं।
जुलाई की बैठक में फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था। हालांकि, कई अधिकारियों ने दरों में बढ़ोतरी का समर्थन किया था। बैठक के मिनट्स में भी संकेत मिले थे कि यदि महंगाई में पर्याप्त कमी नहीं आती है तो केंद्रीय बैंक को अपनी नीति को और सख्त करने पर विचार करना पड़ सकता है।
पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर हुई थी आलोचना
जुलाई की फेड बैठक के बाद केविन वार्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी सवाल उठे थे। आलोचकों का कहना था कि वह ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले की वजह को पर्याप्त स्पष्टता के साथ पेश नहीं कर पाए।
इसके बाद अमेरिकी बॉन्ड बाजार में भी हलचल देखने को मिली। निवेशकों ने लंबी अवधि वाले अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की बिकवाली की, जिससे उनकी यील्ड काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
बाजार में इसे फेड के 2% महंगाई लक्ष्य को लेकर निवेशकों के भरोसे से जोड़कर देखा गया।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में दिख रहे सुस्ती के संकेत
दूसरी तरफ, जुलाई की फेड बैठक के बाद सामने आए कुछ आर्थिक आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत दिए हैं।
जुलाई में रिटेल बिक्री में एक साल से अधिक समय में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वहीं कोर महंगाई में भी बढ़ोतरी सीमित रही। इसके अलावा, कंपनियों ने जुलाई में उम्मीद के उलट नौकरियों की संख्या घटाई।
इससे पहले के दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी संशोधन किया गया था। रोजगार बाजार में कमजोरी के संकेतों ने फेड के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि ब्याज दरों में ज्यादा बढ़ोतरी से आर्थिक गतिविधियों पर और दबाव पड़ सकता है।
सितंबर में दर बढ़ने की संभावना कितनी?
महंगाई को लेकर फेड चेयरमैन की सख्त टिप्पणी के बावजूद बाजार में सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद पहले की तुलना में कम हुई है।
शुक्रवार सुबह फेडरल फंड्स फ्यूचर्स के अनुसार, सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना करीब 36% थी। जुलाई के अंत में यह संभावना 70% से ज्यादा आंकी जा रही थी।
इस बदलाव से पता चलता है कि निवेशक अब महंगाई के साथ-साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के कमजोर पड़ने वाले संकेतों को भी गंभीरता से देख रहे हैं।
आगे क्या रहेगा बाजार के लिए अहम?
अब बाजार की नजर अमेरिका के आने वाले महंगाई, रोजगार और आर्थिक विकास से जुड़े आंकड़ों पर रहेगी। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बनी रहती है तो फेड के सख्त रुख की संभावना बढ़ सकती है। वहीं, अगर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी तेज होती है और महंगाई लगातार नीचे आती है, तो ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद मजबूत हो सकती है।
ऐसे में सितंबर की फेड बैठक से पहले आने वाला हर बड़ा आर्थिक आंकड़ा अमेरिकी शेयर बाजार, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और दुनियाभर के वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
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