R Praggnanandhaa: भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंदा ने शतरंज की दुनिया में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 27 अगस्त को सेंट लुइस में खेले गए ग्रैंड चेस टूर (GCT) के फाइनल में उन्होंने अमेरिका के दिग्गज ग्रैंडमास्टर फैबियानो कारुआना को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ प्रज्ञानंदा ग्रैंड चेस टूर का फाइनल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उन्हें इस ऐतिहासिक जीत के लिए 2 लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि भी मिली।
6 अंकों से पिछड़ने के बाद की शानदार वापसी
फाइनल के आखिरी दिन प्रज्ञानंदा के लिए चुनौती काफी बड़ी थी। मुकाबले की शुरुआत में वह फैबियानो कारुआना से 6 अंकों से पीछे थे। इस स्थिति में वापसी करना आसान नहीं था, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने दबाव में बेहतरीन खेल दिखाया।
रैपिड चरण में प्रज्ञानंदा ने लगातार दोनों गेम जीतकर मुकाबले का पूरा समीकरण बदल दिया। इन जीतों ने उन्हें न केवल आत्मविश्वास दिया, बल्कि फाइनल में वापसी का मजबूत मौका भी दिलाया।
इसके बाद ब्लिट्ज मुकाबलों में उन्होंने धैर्य के साथ खेल जारी रखा। जरूरी नतीजे हासिल करने के बाद प्रज्ञानंदा ने कुल 15-13 के स्कोर से फाइनल जीत लिया।
कारुआना के खिलाफ बदला मुकाबले का रुख
फाइनल में कारुआना ने शुरुआत में जबरदस्त बढ़त बनाई थी। शुरुआती क्लासिकल गेम में उन्होंने प्रज्ञानंदा को 6-0 से मात दी थी। इसके बाद भारतीय ग्रैंडमास्टर के सामने वापसी की बड़ी चुनौती थी।
बुधवार को खेले गए दूसरे क्लासिकल गेम में प्रज्ञानंदा ने मुकाबला 3-3 से ड्रॉ कराया। हालांकि इसके बाद भी कारुआना की बढ़त 6 अंकों की बनी रही। लेकिन अगले दिन रैपिड गेम में प्रज्ञानंदा ने लगातार दो जीत हासिल करके इस बढ़त को लगभग खत्म कर दिया।
यही प्रदर्शन आखिरकार फाइनल के नतीजे में निर्णायक साबित हुआ।
रैपिड और ब्लिट्ज में सुधार का मिला फायदा
प्रज्ञानंदा ने अपनी जीत के बाद रैपिड और ब्लिट्ज फॉर्मेट में हुए सुधार को सफलता की बड़ी वजह बताया। उन्होंने माना कि कारुआना जैसे मजबूत खिलाड़ी के खिलाफ एक जीत हासिल करना भी कठिन होता है, लेकिन एक ही दिन में लगातार दो रैपिड गेम जीतना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा।
भारतीय ग्रैंडमास्टर के मुताबिक पिछले साल की तुलना में उनके रैपिड और ब्लिट्ज खेल में काफी सुधार हुआ है। इसी बेहतर प्रदर्शन का फायदा उन्हें सेंट लुइस के फाइनल में मिला।
ब्लिट्ज में गलती के बावजूद नहीं छोड़ा धैर्य
ब्लिट्ज के शुरुआती मुकाबलों में भी प्रज्ञानंदा को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। पहले ब्लिट्ज गेम में उनके पास जीत का मौका था, लेकिन समय का दबाव बढ़ने के साथ उनसे गलती हो गई और उनकी स्थिति कमजोर हो गई।
हालांकि कारुआना उस मौके को जीत में नहीं बदल सके और मुकाबला ड्रॉ पर खत्म हुआ। प्रज्ञानंदा ने इसके बाद अपना धैर्य बनाए रखा और बाकी मुकाबलों में जरूरी नतीजे हासिल करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया।
प्रज्ञानंदा के करियर की बड़ी उपलब्धि
यह खिताब प्रज्ञानंदा के करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है। दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले भारतीय ग्रैंडमास्टर ने अब ग्रैंड चेस टूर का फाइनल भी अपने नाम कर लिया है।
उनकी यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वह GCT फाइनल जीतने वाले पहले भारतीय हैं। इससे भारतीय शतरंज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिली है।
वेस्ली सो ने भी किया शानदार कमबैक
तीसरे स्थान के मुकाबले में अमेरिका के ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो ने जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराया। रैपिड चरण में दोनों खिलाड़ियों ने एक-एक गेम जीता था।
इसके बाद ब्लिट्ज में वेस्ली सो ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार चार गेम जीत लिए। उन्होंने एक गेम बाकी रहते ही मुकाबला अपने नाम कर लिया। वेस्ली सो ने कुल 18-12 के स्कोर से जीत दर्ज की।
भारतीय शतरंज के लिए ऐतिहासिक दिन
आर. प्रज्ञानंदा की यह जीत भारतीय शतरंज के लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने न केवल दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी स्थिति और मजबूत की, बल्कि ग्रैंड चेस टूर का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बनकर देश के शतरंज इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।
छह अंकों की पिछड़ने के बावजूद जिस तरह प्रज्ञानंदा ने रैपिड और ब्लिट्ज में वापसी की, वह उनके मानसिक मजबूती और तेज फॉर्मेट में बढ़ते आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। सेंट लुइस में मिली यह जीत उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की यादगार उपलब्धियों में लंबे समय तक शामिल रहेगी।


