डबलिन में Google की नौकरी, करीब 83 लाख रुपये का सालाना पैकेज और विदेश की जिंदगी छोड़कर मंताज सिद्धू ने पंजाब लौटने का फैसला किया। अब वह ऑर्गेनिक खेती के जरिए ऐसा बिजनेस चला रहे हैं, जिसमें परिवार सीधे खेत से जुड़ सकते हैं।
किसी बड़ी टेक कंपनी में नौकरी, लाखों रुपये की सैलरी और विदेश में शानदार करियर का सपना आज लाखों युवा देखते हैं। लेकिन पंजाब के मंताज सिद्धू ने इस सपने से अलग रास्ता चुना। उन्होंने दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google में करीब पांच साल काम करने के बाद नौकरी छोड़ दी और भारत लौटकर ऑर्गेनिक खेती को अपना नया करियर बना लिया।
मंताज सिद्धू का यह फैसला सिर्फ नौकरी बदलने तक सीमित नहीं था। उन्होंने कॉर्पोरेट करियर से निकलकर खेती और खाने से जुड़े ऐसे बिजनेस की शुरुआत की, जिसका मकसद लोगों को यह समझाना भी है कि उनकी थाली में पहुंचने वाला खाना आखिर पैदा कैसे होता है।
Google में शुरू हुआ था करियर
मंताज सिद्धू ने 2018 में हैदराबाद से Google के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। वह Google Ads पार्टनरशिप और बिजनेस स्ट्रैटेजी से जुड़े काम करते थे। बाद में उनका ट्रांसफर कंपनी की डबलिन टीम से जुड़ गया, जहां उनकी जिम्मेदारी ब्रिटेन की बड़ी एडवरटाइजिंग एजेंसियों के साथ काम करने की थी।
कोविड-19 महामारी के कारण उनका आयरलैंड जाना कुछ समय के लिए टल गया। इस दौरान उन्होंने करीब दो साल तक डबलिन की टीम के साथ रिमोट तरीके से काम किया। आखिरकार 2021 के अंत में वह डबलिन पहुंच गए।
उस समय उनका करियर काफी अच्छा चल रहा था। बोनस और शेयर समेत उनका सालाना पैकेज करीब €100,000 था, जो उस समय भारतीय मुद्रा में लगभग 83 लाख रुपये के बराबर बैठता था।
विदेश की जिंदगी के बीच उठने लगा सवाल
बाहर से देखने पर सिद्धू की जिंदगी पूरी तरह व्यवस्थित नजर आती थी। बड़ी टेक कंपनी की नौकरी, अच्छा पैकेज और इंटरनेशनल एक्सपोजर—ऐसी स्थिति में नौकरी छोड़ना आसान फैसला नहीं था।
लेकिन समय के साथ उनके मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या वह वास्तव में इसी करियर को आगे जारी रखना चाहते हैं।
उन्होंने महसूस किया कि कॉर्पोरेट दुनिया में ऊंचे पद तक पहुंचने के बाद भी रोजमर्रा का तनाव, काम का दबाव और जीवनशैली बहुत ज्यादा नहीं बदलती। फर्क सिर्फ इतना हो सकता है कि कमाई बढ़ जाती है।
यही सोच उनके लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी। उन्हें लगा कि वह जिस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, वह उनकी वास्तविक प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाती।
2022 में Google को कहा अलविदा
जून 2022 तक सिद्धू भारत लौटने को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे थे। कुछ ही समय बाद उन्होंने Google की नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया और पंजाब वापस आ गए।
उनके लिए पंजाब लौटना किसी नए शहर में नौकरी तलाशने जैसा नहीं था। उनका बचपन खेती-बाड़ी के माहौल में बीता था। विदेश में रहने के दौरान खाने और उसके उत्पादन को लेकर उनकी सोच में भी काफी बदलाव आया।
भारत लौटने के बाद उनका ध्यान इस बात पर गया कि खेती में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और कीटनाशकों के बारे में आम उपभोक्ता को कितनी कम जानकारी होती है। खासकर अपने परिवार और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और बेहतर भोजन को लेकर उनकी चिंता बढ़ती गई।
यहीं से उन्हें ऑर्गेनिक खेती को बिजनेस के रूप में आगे बढ़ाने का विचार आया।
कजिन के साथ शुरू किया ‘गिल ऑर्गेनिक्स’
सिद्धू ने अपने कजिन डॉ. बलजीत सिंह गिल के साथ मिलकर ‘गिल ऑर्गेनिक्स’ नाम से फार्म-टू-टेबल वेंचर शुरू किया।
दोनों का जुड़ाव खेती से पहले से था। उनके मुताबिक, वे खेती करने वाले परिवार में पले-बढ़े और उनके दादाजी की ऑर्गेनिक खेती को लेकर सोच ने भी उन्हें काफी प्रभावित किया।
इस साझेदारी में दोनों की अलग-अलग विशेषज्ञता काम आई। सिद्धू अपने साथ टेक्नोलॉजी, एडवरटाइजिंग और बिजनेस स्ट्रैटेजी का अनुभव लेकर आए, जबकि उनके कजिन के पास खेती और कृषि से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी थी।
इस तरह दोनों ने मिलकर खेती को आधुनिक बिजनेस मॉडल के साथ जोड़ने की कोशिश की।
परिवारों को खेत से जोड़ता है ‘क्लाउड फार्म’
गिल ऑर्गेनिक्स की खास पहल उसका ‘क्लाउड फार्म’ प्रोग्राम है। इसके तहत परिवारों को एक तय प्लॉट पर सब्जियां उगाने का अवसर दिया जाता है।
इस मॉडल में ग्राहक सीधे खेती की प्रक्रिया से जुड़ सकते हैं। वे चाहें तो फार्म पर जाकर अपनी फसल और खेती की स्थिति देख सकते हैं या फिर घर पर ही अपनी उपज मंगवा सकते हैं।
इसका मकसद सिर्फ ऑर्गेनिक सब्जियां उपलब्ध कराना नहीं है। इसके जरिए परिवारों को यह अनुभव भी मिलता है कि उनके खाने की चीजें किस तरह उगाई जाती हैं और खेत से उनकी रसोई तक कैसे पहुंचती हैं।
बिजनेस की कमाई बढ़ी, लेकिन निजी आय Google से कम
मंताज सिद्धू के नए बिजनेस से होने वाली कमाई अब उनकी पिछली नौकरी की सैलरी से ज्यादा बताई जाती है। हालांकि, बिजनेस का पूरा रेवेन्यू उनकी निजी कमाई नहीं है।
खेती और बिजनेस को चलाने के लिए कर्मचारियों, उत्पादन, संचालन और दूसरी गतिविधियों पर खर्च होता है। इसके अलावा कंपनी में कमाई का एक हिस्सा दोबारा बिजनेस बढ़ाने के लिए लगाया जाता है।
इस वजह से सिद्धू की व्यक्तिगत आय अभी भी Google में मिलने वाले पैकेज से कम है।
लेकिन उनके लिए सफलता का पैमाना सिर्फ बैंक अकाउंट में आने वाली रकम नहीं है।
‘अब अपना समय अपने विजन के लिए लगाता हूं’
सिद्धू के मुताबिक, Google में काम करते समय उनके जागने के समय का बड़ा हिस्सा किसी दूसरे संगठन के विजन को पूरा करने में जाता था। आज उनकी निजी कमाई भले ही कम हो, लेकिन उनके समय और ऊर्जा पर उनका अपना नियंत्रण है।
उनके लिए यही इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
एक तरफ 83 लाख रुपये के करीब सालाना पैकेज वाली विदेशी नौकरी थी, वहीं दूसरी तरफ पंजाब लौटकर खेती से जुड़ा अपना बिजनेस शुरू करने का जोखिम। सिद्धू ने आर्थिक सुरक्षा के बजाय ऐसा काम चुना, जिसमें उन्हें अपने समय, काम और उद्देश्य पर ज्यादा नियंत्रण महसूस होता है।
उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि करियर की सफलता का मतलब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता। किसी के लिए बड़ी सैलरी और विदेशी नौकरी सफलता हो सकती है, तो किसी दूसरे के लिए अपने शहर लौटकर ऐसा काम करना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है, जिसमें उसे अपने फैसलों और समय पर पूरा अधिकार मिले।


