Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन सिर्फ कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के उस रिश्ते का जश्न है जिसमें प्यार के साथ नोक-झोंक, शरारत, नाराजगी और मुश्किल वक्त में एक-दूसरे के लिए खड़े रहने का जज्बा भी शामिल होता है। बॉलीवुड ने इस खूबसूरत रिश्ते को अलग-अलग अंदाज में पर्दे पर उतारा है।
कहीं भाई अपनी बहन की हिफाजत के लिए पूरी दुनिया से लड़ता नजर आया, तो कहीं बहन ने भाई को मुश्किल परिस्थितियों से निकालने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। कुछ फिल्मों में भाई-बहन की दोस्ती और मस्ती देखने को मिली, जबकि कुछ कहानियां उनके रिश्ते के त्याग और भावनात्मक गहराई को सामने लाती हैं।
इस रक्षाबंधन अगर आप परिवार के साथ कोई ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो भाई-बहन के रिश्ते की अहमियत याद दिलाए, तो बॉलीवुड की ये 7 फिल्में आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।
1. दिल धड़कने दो (2015)
जोया अख्तर की फिल्म ‘दिल धड़कने दो’ में प्रियंका चोपड़ा और रणवीर सिंह ने भाई-बहन आयशा और कबीर मेहरा का किरदार निभाया है। दोनों एक ही परिवार का हिस्सा होने के बावजूद अपने-अपने तरीके से जिंदगी को देखते हैं और कई मुद्दों पर उनकी सोच बिल्कुल अलग नजर आती है।
फिल्म की खास बात यह है कि उनका रिश्ता केवल प्यार और भावुकता तक सीमित नहीं है। दोनों के बीच दोस्ताना बातचीत, बहस, मजाक और एक-दूसरे को समझने की कोशिश भी दिखाई देती है। परिवार की परेशानियों के बीच दोनों एक-दूसरे का साथ देते हैं।
यह फिल्म भाई-बहन के उस रिश्ते को दिखाती है जिसमें कभी मतभेद होते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर दोनों एक-दूसरे के सबसे मजबूत सपोर्ट सिस्टम बन जाते हैं।
2. हम साथ-साथ हैं (1999)
सूरज बड़जात्या की ‘हम साथ-साथ हैं’ बॉलीवुड की उन पारिवारिक फिल्मों में शामिल है, जिन्हें आज भी परिवार के साथ देखने के लिए पसंद किया जाता है। फिल्म में प्रेम, विनोद और विवेक के बीच भाईचारा कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
परिवार में परिस्थितियां बदलने के बावजूद भाई एक-दूसरे के प्रति सम्मान और अपनापन बनाए रखने की कोशिश करते हैं। वहीं उनकी भाभियां भी परिवार के रिश्तों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं।
फिल्म की कहानी संयुक्त परिवार, प्यार, गलतफहमियों और रिश्तों की मजबूती के इर्द-गिर्द घूमती है। यही वजह है कि रक्षाबंधन जैसे मौके पर यह फिल्म एक बार फिर देखने का मन करता है।
3. अग्निपथ (2012)
ऋतिक रोशन की ‘अग्निपथ’ भले ही मुख्य रूप से बदले और संघर्ष की कहानी है, लेकिन विजय दीनानाथ चौहान और उसकी बहन शिक्षा का रिश्ता फिल्म में एक मजबूत भावनात्मक आधार देता है।
पिता की मौत और परिवार पर आई मुश्किलों के बाद विजय के कंधों पर कई जिम्मेदारियां आ जाती हैं। अपनी बहन को सुरक्षित रखने और उसके भविष्य की चिंता उसके फैसलों को भी प्रभावित करती है।
विजय का किरदार जितना कठोर दिखाई देता है, बहन के प्रति उसका लगाव उसके व्यक्तित्व के दूसरे और भावुक पक्ष को सामने लाता है। यही रिश्ता उसकी संघर्षपूर्ण यात्रा को एक निजी भावनात्मक वजह भी देता है।
4. सरबजीत (2016)
उमंग कुमार की फिल्म ‘सरबजीत’ भाई-बहन के रिश्ते की ताकत को बेहद गंभीर और भावुक तरीके से सामने रखती है। फिल्म में रणदीप हुड्डा ने सरबजीत सिंह और ऐश्वर्या राय बच्चन ने उनकी बहन दलबीर कौर की भूमिका निभाई।
सरबजीत के पाकिस्तान की जेल में पहुंचने के बाद दलबीर उसकी रिहाई के लिए लगातार संघर्ष करती रहती हैं। वर्षों तक चलने वाली इस लड़ाई में उनका भाई के प्रति विश्वास और उम्मीद कमजोर नहीं पड़ती।
दलबीर का संघर्ष दिखाता है कि एक बहन अपने भाई के लिए किस हद तक जा सकती है। फिल्म का भावनात्मक पक्ष दर्शकों को भाई-बहन के रिश्ते में मौजूद त्याग, उम्मीद और मजबूती का एहसास कराता है।
5. जोश (2000)
‘जोश’ में शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय बच्चन ने जुड़वां भाई-बहन मैक्स और शर्ली का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी गोवा की पृष्ठभूमि में दो प्रतिद्वंद्वी गैंग्स और उनके बीच चलने वाले संघर्ष के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है।
इस सबके बीच मैक्स और शर्ली का रिश्ता कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहता है। दोनों के व्यक्तित्व अलग हैं और उनके जीवन में कई तरह के तनाव आते हैं, लेकिन एक-दूसरे के लिए उनकी चिंता लगातार दिखाई देती है।
फिल्म यह भी बताती है कि परिवार और भाई-बहन का रिश्ता कई बार मुश्किल हालात में इंसान के लिए सबसे बड़ा सहारा बन जाता है।
6. माई ब्रदर… निखिल (2005)
‘माई ब्रदर… निखिल’ भाई-बहन के रिश्ते पर बनी सबसे संवेदनशील फिल्मों में से एक मानी जाती है। फिल्म में निखिल के जीवन में उस समय बड़ा बदलाव आता है जब उसे HIV पॉजिटिव होने का पता चलता है।
समाज और आसपास के लोग उससे दूरी बनाने लगते हैं, लेकिन उसकी बहन अनामिका उसका साथ नहीं छोड़ती। मुश्किल समय में वह भाई के साथ मजबूती से खड़ी रहती है और उसे अकेला महसूस नहीं होने देती।
फिल्म का सबसे मजबूत संदेश यही है कि सच्चा रिश्ता मुश्किल वक्त में सामने आता है। अनामिका का अपने भाई के प्रति बिना शर्त प्यार और समर्थन इस कहानी को बेहद भावुक बना देता है।
7. फिजा (2000)
ऋतिक रोशन और करिश्मा कपूर की फिल्म ‘फिजा’ भाई-बहन के रिश्ते की एक अलग और गंभीर कहानी पेश करती है। फिल्म में फिजा अपने भाई अमान के लापता होने के बाद उसे खोजने के लिए लगातार प्रयास करती है।
मुंबई के सांप्रदायिक दंगों के बाद अमान के गायब हो जाने से परिवार पूरी तरह टूट जाता है। लेकिन फिजा उम्मीद नहीं छोड़ती और अपने भाई को वापस घर लाने की कोशिश करती रहती है।
फिल्म में बहन का अपने भाई के लिए अटूट प्यार, चिंता और उम्मीद कहानी का भावनात्मक केंद्र बन जाता है। यह दिखाती है कि किसी अपने को वापस पाने की चाह इंसान को कितनी दूर तक जाने की ताकत दे सकती है।
रक्षाबंधन पर क्यों खास हैं ये फिल्में?
इन सातों फिल्मों की कहानियां अलग हैं, लेकिन इनका मूल भाव एक ही है—भाई-बहन का रिश्ता सिर्फ खून का रिश्ता नहीं, बल्कि भरोसे, दोस्ती, सुरक्षा और साथ का रिश्ता है।
कभी भाई अपनी बहन के लिए ढाल बनता है तो कभी बहन मुश्किल समय में भाई का सबसे बड़ा सहारा बन जाती है। यही वजह है कि इन फिल्मों के किरदार और उनकी कहानियां दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं।
इस रक्षाबंधन अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो रिश्तों की अहमियत को महसूस कराए, तो इन फिल्मों को अपनी वॉचलिस्ट में शामिल कर सकते हैं।


