Google Bengaluru Office: बेंगलुरु स्थित गूगल के अनंता कैंपस में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ बाहर से आने वाले कैब ड्राइवरों को भी कई सुविधाएं मिलने की बात सामने आई है। एक कैब ड्राइवर ने बताया कि यहां मुफ्त खाना, चाय-कॉफी, स्नैक्स और पार्किंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं। उन्होंने कहा कि गूगल ऑफिस में उन्हें मेहमान जैसा महसूस होता है।
कैब ड्राइवर के अनुभव ने खींचा ध्यान
बेंगलुरु की राइटर और कोच तान्या माथुर भट्टाचार्या ने LinkedIn पर एक पोस्ट में कैब ड्राइवर शरद के साथ हुई बातचीत का अनुभव साझा किया। यह बातचीत गूगल के बेंगलुरु स्थित अनंता कैंपस में हुई, जहां तान्या ऐप डेवलपमेंट लीडर्स के लिए आयोजित एक वर्कशॉप में पहुंची थीं।
तान्या ने शरद को सुबह 11:30 बजे पिक-अप के लिए बुलाया था। हालांकि, मीटिंग, कॉफी और लंच के चलते वह करीब एक घंटे बाद यानी दोपहर 12:30 बजे कैब तक पहुंच पाईं। देरी के लिए उन्होंने ड्राइवर से माफी मांगी।
लेकिन शरद का जवाब सुनकर वह हैरान रह गईं। ड्राइवर ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें देर करने के लिए धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि उन्हें गूगल के ऑफिस में आना पसंद है।
गूगल ऑफिस में ड्राइवरों को क्या मिलता है?
शरद ने बातचीत में बताया कि गूगल कैंपस में बाहर से आने वाले कैब ड्राइवरों के लिए भी कई सुविधाओं की व्यवस्था है। उनके मुताबिक, ड्राइवरों के लिए बेसमेंट में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि कैंपस में कैब ड्राइवरों को चाय, कॉफी, स्नैक्स और तीन वक्त का खाना भी मुफ्त में मिलता है। खाने को लेकर भी एक खास व्यवस्था का जिक्र उन्होंने किया।
शरद के अनुसार, लोगों को सलाह दी जाती है कि जितना खा सकें उतना ही प्लेट में लें और खाना बर्बाद न करें। हालांकि, जरूरत होने पर वे दोबारा खाना ले सकते हैं।
‘यहां हमें मेहमान जैसा महसूस होता है’
शरद ने कहा कि कई कंपनियां कैब ड्राइवरों को बाहर खाना खाने के लिए अलग से अलाउंस देती हैं। लेकिन उनके अनुभव में गूगल का कैंपस इससे अलग है।
उन्होंने गूगल ऑफिस के माहौल की तारीफ करते हुए कहा कि यहां उन्हें मेहमान जैसा महसूस कराया जाता है। यही वजह है कि उन्हें गूगल में आना पसंद है।
यह अनुभव इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि आमतौर पर कंपनियों में मिलने वाली सुविधाओं की चर्चा कर्मचारियों के संदर्भ में होती है। लेकिन यहां एक बाहरी व्यक्ति के अनुभव ने कंपनी के वर्कप्लेस कल्चर पर ध्यान खींचा।
वर्कप्लेस कल्चर का असली टेस्ट क्या है?
तान्या माथुर के लिए कैब ड्राइवर के साथ हुई यह बातचीत एक बड़ी सीख बन गई। उन्होंने अपनी पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि किसी कंपनी की संस्कृति को सिर्फ उसके शानदार ऑफिस, आधुनिक डिजाइन या कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं से नहीं समझा जा सकता।
उनके मुताबिक, किसी संगठन के कल्चर की असली परीक्षा इस बात से होती है कि वह उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है जो सीधे कंपनी के कर्मचारी नहीं हैं। इनमें कैब ड्राइवर, सिक्योरिटी गार्ड, हाउसकीपिंग कर्मचारी और वेंडर्स जैसे लोग शामिल हैं।
अगर किसी कंपनी में इन लोगों को भी सम्मान और सुविधाएं मिलती हैं, तो यह उसके संगठनात्मक मूल्यों के बारे में काफी कुछ बताता है।
LinkedIn पर वायरल हुई पोस्ट
तान्या की यह पोस्ट LinkedIn पर चर्चा का विषय बन गई। कई यूजर्स ने उनके अनुभव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंपनी की संस्कृति केवल बड़े-बड़े वैल्यू स्टेटमेंट से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार से दिखाई देती है।
एक यूजर ने कहा कि कॉर्पोरेट वैल्यूज के लंबे-चौड़े बयानों की तुलना में ऐसी छोटी घटनाएं कंपनी की सोच को ज्यादा बेहतर तरीके से दिखाती हैं।
वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा कि किसी कंपनी के कल्चर को केवल उन लोगों को मिलने वाली सुविधाओं से नहीं परखा जाना चाहिए, जिनकी कंपनी में सबसे ज्यादा पहुंच है। असली सवाल यह है कि बेसमेंट में इंतजार करने वाले ड्राइवर, हाउसकीपिंग स्टाफ और सिक्योरिटी गार्ड के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।
एक अन्य प्रतिक्रिया में कहा गया कि ऐसी छोटी-छोटी बातचीत अक्सर किसी संगठन की बड़ी सोच और उसके मूल्यों को सामने लाती है।
गूगल के कैंपस ने खींचा ध्यान
बेंगलुरु का गूगल अनंता कैंपस पहले से ही अपने आधुनिक डिजाइन और सुविधाओं के कारण चर्चा में रहा है। अब कैब ड्राइवर के इस अनुभव ने कैंपस की चर्चा को एक अलग नजरिया दे दिया है।
हालांकि, तान्या द्वारा साझा की गई यह एक व्यक्तिगत बातचीत है और इसमें बताई गई सुविधाएं उनके ड्राइवर के अनुभव पर आधारित हैं। फिर भी, इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि किसी कंपनी की संस्कृति का असर उसके कर्मचारियों से आगे वहां आने वाले लोगों पर भी किस तरह पड़ सकता है।


