Rakhi Bandhne Ke Niyam: रक्षा बंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। राखी बांधते समय भाई और बहन की दिशा से लेकर तिलक, अक्षत और राखी बांधने की विधि तक कई बातों का ध्यान रखने की परंपरा है। जानिए राखी बांधने के जरूरी नियम।
Rakhi Bandhne Ke Niyam: रक्षा बंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आपसी स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनके सुखी, स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने को लेकर कई धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें भाई और बहन के बैठने की दिशा, तिलक-अक्षत लगाने, राखी बांधने और आरती करने की विधि शामिल है। मान्यता है कि शुभ दिशा और विधि का ध्यान रखकर राखी बांधने से पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
राखी बांधते समय भाई का मुख किस दिशा में होना चाहिए?
ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। इसलिए संभव हो तो भाई को इसी दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को यम और पितरों से संबंधित माना जाता है। इसलिए राखी बांधते समय भाई का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखने से बचने की सलाह दी जाती है।
बहन का मुख किस दिशा में होगा?
अगर भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर है, तो राखी बांधते समय बहन का मुख स्वाभाविक रूप से पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर होगा। प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे राखी बांधने के लिए उचित स्थिति माना जाता है।
राखी बांधते समय इन नियमों का रखें ध्यान
1. सिर पर कपड़ा रखें
राखी बंधवाते समय भाई के सिर पर रुमाल, साफ कपड़ा या कोई अन्य वस्त्र रखने की परंपरा कई परिवारों में मानी जाती है। धार्मिक दृष्टि से इसे शुभ माना जाता है।
2. सबसे पहले तिलक लगाएं
राखी बांधने से पहले बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाती है। इसके बाद तिलक पर अक्षत यानी चावल लगाए जाते हैं। धार्मिक परंपरा में साबुत अक्षत को शुभ माना जाता है।
3. दाहिनी कलाई पर बांधें राखी
परंपरा के अनुसार भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधते समय भाई का हाथ सहज स्थिति में होना चाहिए।
4. राखी में तीन गांठें लगाना शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी में तीन गांठें लगाना शुभ माना जाता है। इन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में राखी बांधने की परंपराएं अलग हो सकती हैं।
5. राखी बांधने के बाद आरती करें
राखी बांधने के बाद भाई की आरती करने की परंपरा है। इसके बाद बहन भाई का मुंह मीठा कराती है। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके सुख और समृद्ध जीवन की कामना करता है।
भद्रा और राहुकाल का भी रखें ध्यान
रक्षा बंधन पर राखी बांधने के लिए शुभ समय का ध्यान रखना धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। खासकर भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की मान्यता है। इसके अलावा कुछ लोग राहुकाल को भी शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं मानते।
इसलिए राखी बांधने से पहले उस दिन के स्थानीय पंचांग में भद्रा, राहुकाल और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त की जानकारी जरूर देख लें। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय समय के अंतर के कारण मुहूर्त में बदलाव हो सकता है।
राखी बांधने की आसान विधि
रक्षा बंधन के दिन सबसे पहले पूजा की थाली तैयार करें। इसमें रोली या कुमकुम, अक्षत, राखी, दीपक और मिठाई रखें। भाई को शुभ दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। इसके बाद तिलक लगाएं, अक्षत लगाएं और दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधने के बाद आरती करें और मिठाई खिलाएं।
ध्यान रखें कि ये नियम धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में रक्षा बंधन मनाने की विधि कुछ अलग हो सकती है।


