Highest Paying Jobs: भारत में अच्छी कमाई के लिए IIT, बड़ी टेक कंपनी या DSA में महारत को सबसे बड़ा रास्ता माना जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक मजेदार लिस्ट ने इस सोच को उलट दिया है। इसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियरों से ज्यादा कमाई करने वालों में PG मालिक, मकान मालिक, पानी के टैंकर वाले और चाय-सिगरेट दुकानदार शामिल हैं।
भारत में अक्सर युवाओं को बताया जाता है कि IIT से पढ़ाई, बड़ी टेक कंपनी में नौकरी या Data Structures and Algorithms (DSA) में महारत हासिल करना अच्छी कमाई का सबसे बेहतर रास्ता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक मजेदार पोस्ट ने इस सोच पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। टेक और AI कमेंटेटर साक्षी ने भारत में ज्यादा कमाई करने वालों की एक मजाकिया रैंकिंग शेयर की, जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर टॉप पर नहीं, बल्कि काफी पीछे नजर आए।
इस वायरल लिस्ट में PG मालिक, टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट बेचने वाला दुकानदार, मकान मालिक, पानी के टैंकर संचालक और प्रॉपर्टी ब्रोकर जैसे लोगों को जगह दी गई है। पोस्ट का मकसद गंभीर आय सर्वे पेश करना नहीं, बल्कि टेक इंडस्ट्री और रोजमर्रा के कारोबार के बीच मजेदार तुलना करना है।
नंबर-1 पर PG मालिक, एक कमरे से लाखों की कमाई
साक्षी की इस मजेदार रैंकिंग में सबसे ऊपर PG मालिक को रखा गया। पोस्ट में शहरों में नौकरी और किराए की बढ़ती मांग का हवाला देते हुए बताया गया कि PG कारोबार कुछ लोगों के लिए काफी कमाई वाला हो सकता है।
वायरल पोस्ट के मुताबिक, एक कमरे में तीन लोगों को रखा जाता है और प्रत्येक व्यक्ति से करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक किराया लिया जाता है। इस हिसाब से पर्याप्त कमरों और ऑक्यूपेंसी वाले PG में मासिक आय काफी ज्यादा हो सकती है। पोस्ट में खर्च निकालने के बाद ₹1 लाख से ₹1.5 लाख महीने तक कमाई का अनुमान भी दिया गया है।
हालांकि, यह आंकड़ा हर PG मालिक पर लागू नहीं होता। कमाई शहर, प्रॉपर्टी का आकार, किराया, ऑक्यूपेंसी, बिजली-पानी, स्टाफ, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों पर निर्भर करती है।
बेंगलुरु के मकान मालिक भी कम नहीं
लिस्ट में बेंगलुरु के मकान मालिकों का भी जिक्र किया गया। देश की प्रमुख टेक हब में शामिल बेंगलुरु में किराए की मांग लंबे समय से चर्चा का विषय रही है।
पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया कि दो बेडरूम का फ्लैट खरीदकर उसे करीब ₹50,000 महीने के किराए पर देना, समय-समय पर किराया बढ़ाना और WhatsApp पर सिर्फ ‘last price’ लिखकर बातचीत खत्म कर देना भी कमाई का शानदार तरीका बन गया है।
असल में मकान से होने वाली कमाई को सिर्फ किराए से नहीं देखा जा सकता। इसमें प्रॉपर्टी की खरीद कीमत, लोन की EMI, मेंटेनेंस, टैक्स और खाली रहने की अवधि जैसे कई खर्च शामिल होते हैं।
पानी के टैंकर वाले बने ‘बिजनेस किंग’
बेंगलुरु की पानी से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा होती रही है। इसी संदर्भ में वायरल पोस्ट ने पानी के टैंकर संचालकों को भी कमाई वाली सूची में शामिल किया।
पोस्ट में मजाकिया अंदाज में कहा गया कि ये लोग बेंगलुरु का ही पानी वापस बेंगलुरु के लोगों को बेचते हैं। पानी की कमी या सप्लाई में परेशानी के दौरान टैंकरों की मांग बढ़ सकती है, जिससे इस कारोबार की आय भी बढ़ती है।
हालांकि, टैंकर कारोबार में वाहन, पानी की उपलब्धता, ईंधन, परमिट, स्टाफ और संचालन जैसी लागत भी शामिल होती है। इसलिए वायरल पोस्ट में बताए गए अंदाज को निश्चित कमाई का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
प्रॉपर्टी ब्रोकरों की कमाई का भी जिक्र
रैंकिंग में प्रॉपर्टी ब्रोकरों को भी शामिल किया गया है। पोस्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकर किरायेदारों को कई प्रॉपर्टी दिखाने के बाद डील होने पर किरायेदार और मकान मालिक दोनों से लगभग एक महीने के किराए के बराबर कमीशन लेते हैं।
बड़े शहरों में लगातार नौकरी बदलने और किराए के घर की तलाश करने वाले लोगों की संख्या के कारण रेंटल ब्रोकरेज एक सक्रिय कारोबार है। हालांकि, कमीशन की रकम और भुगतान का तरीका हर बाजार और डील के हिसाब से अलग हो सकता है।
टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट की दुकान भी हिट
वायरल लिस्ट में दूसरे नंबर पर टेक पार्क के बाहर चाय, सिगरेट और स्नैक्स बेचने वाले दुकानदार को रखा गया। पोस्ट में उसे टेक इंडस्ट्री का ‘अनसंग हीरो’ बताया गया है।
इसके पीछे तर्क भी काफी दिलचस्प है। हजारों सॉफ्टवेयर कर्मचारी रोजाना चाय, कॉफी, स्नैक्स और दूसरी छोटी चीजों के लिए टेक पार्क के आसपास की दुकानों पर निर्भर रहते हैं। अच्छी लोकेशन और ज्यादा ग्राहकों वाली दुकान के लिए यह कारोबार कमाई का अच्छा जरिया बन सकता है।
पोस्ट में ऐसी दुकान से ₹30,000 से ₹50,000 महीने तक कमाई का अनुमान लगाया गया है। लेकिन यहां भी बिक्री और वास्तविक मुनाफे में अंतर समझना जरूरी है। किराया, माल की लागत, कर्मचारियों की सैलरी और दूसरे खर्च निकालने के बाद बची रकम ही वास्तविक मुनाफा होगी।
न MBA, न फंडिंग, फिर भी कमाई का रास्ता
इस पोस्ट का सबसे मजेदार हिस्सा यही है। चाय-स्नैक्स की दुकान शुरू करने के लिए न MBA की जरूरत है, न pitch deck की और न ही startup funding की।
यही तुलना करते हुए पोस्ट में टेक इंडस्ट्री पर तंज कसा गया है। जहां इंजीनियर नौकरी, प्रमोशन और बेहतर पैकेज के लिए लगातार मेहनत करते हैं, वहीं छोटे कारोबारी रोजमर्रा की जरूरतों के आधार पर अपना कारोबार चला रहे हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि छोटे कारोबार में सफलता आसान है। लोकेशन, ग्राहक, लागत, प्रतिस्पर्धा और रोजाना के संचालन की चुनौती किसी भी बिजनेस की कमाई को प्रभावित करती है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर सबसे बड़ा तंज
पोस्ट के अंत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लेकर सबसे मजेदार टिप्पणी की गई। वायरल पोस्ट में कहा गया कि जब बाकी लोग अलग-अलग तरीकों से कमाई कर रहे हैं, तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात 2 बजे तक DSA के सवाल हल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगली salary hike अच्छी होगी।
यही लाइन इस पूरी पोस्ट का सबसे वायरल हिस्सा बन गई। इसका मकसद इंजीनियरों की कमाई की वास्तविक तुलना करना नहीं, बल्कि उस आम धारणा पर मजाक करना है जिसमें टेक नौकरी को सफलता और ज्यादा आय का सबसे सीधा रास्ता माना जाता है।
सोशल मीडिया यूजर्स ने भी लिए खूब मजे
साक्षी की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी। खबर लिखे जाने तक पोस्ट को 1.5 लाख से ज्यादा व्यूज मिलने की बात सामने आई।
एक यूजर ने मजाक में कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने कमाई का सबसे मुश्किल रास्ता चुना है और उन्हें DSA की तैयारी करने के बजाय पानी का टैंकर खरीद लेना चाहिए था।
एक अन्य यूजर ने बेंगलुरु का ‘product-market fit’ बताते हुए AI और सॉफ्टवेयर के बजाय चाय, प्रॉपर्टी और मेट्रो से दूरी के गणित को ज्यादा अहम बताया।
वहीं, एक यूजर ने टैक्स को लेकर भी मजाक किया और कहा कि इन सभी लोगों में शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही ऐसा व्यक्ति है जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और ITR जैसी चीजों से जूझता है।
क्या सच में सॉफ्टवेयर इंजीनियर से ज्यादा कमाते हैं ये लोग?
वायरल पोस्ट को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि PG मालिक, चायवाला या टैंकर संचालक हर स्थिति में सॉफ्टवेयर इंजीनियर से ज्यादा कमाता है। किसी भी पेशे की आय कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सैलरी अनुभव, कंपनी, शहर, तकनीकी कौशल और पद के अनुसार काफी अलग हो सकती है। इसी तरह किसी PG या दुकान की कमाई लोकेशन, निवेश, ग्राहकों की संख्या और खर्चों पर निर्भर करती है।
इसलिए वायरल लिस्ट को कमाई का आधिकारिक या वैज्ञानिक सर्वे नहीं, बल्कि टेक और बिजनेस कल्चर पर आधारित एक सोशल मीडिया मजाक के तौर पर देखना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। NewsJagran इन दावों और पोस्ट में दिए गए आय के अनुमानों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।


