Xi Jinping India Visit BRICS Summit: भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों से जारी तनाव के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे की अटकलों ने नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शी जिनपिंग भारत आ सकते हैं। खास बात यह है कि उनके साथ करीब 400 अधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आने की संभावना जताई जा रही है।
अगर इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह करीब सात वर्षों में शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में आई तल्खी को देखते हुए यह दौरा कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
सितंबर में नई दिल्ली में होगा BRICS शिखर सम्मेलन
भारत इस साल 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इसी सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि चीनी अधिकारियों की एक टीम संभावित यात्रा से जुड़ी तैयारियों में जुटी हुई है। इसमें होटल बुकिंग और सुरक्षा व्यवस्था जैसे इंतजाम शामिल बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मामले से परिचित भारतीय सूत्रों ने बताया कि शी जिनपिंग के साथ लगभग 400 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भारत आ सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह 2019 में शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा के दौरान आए करीब 200 अधिकारियों के दल की तुलना में लगभग दोगुना होगा।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी तक चीन की ओर से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
चीन ने क्या कहा?
शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय से सवाल पूछे जाने पर बीजिंग ने सीधे तौर पर उनके कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की।
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन ब्रिक्स सहयोग को काफी महत्व देता है और इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लेता है। साथ ही चीन ने ब्रिक्स सम्मेलन के मेजबान के तौर पर भारत के प्रयासों का समर्थन करने की बात भी कही।
हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उसके पास राष्ट्रपति शी जिनपिंग के यात्रा कार्यक्रम से संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए फिलहाल शी जिनपिंग के भारत आने की खबर को संभावित दौरे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, न कि आधिकारिक रूप से तय यात्रा के रूप में।
गलवान के बाद बिगड़ गए थे भारत-चीन के रिश्ते
भारत और चीन के रिश्तों में सबसे बड़ा झटका जून 2020 में लगा था। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में दोनों पक्षों के सैनिकों की जान गई और इसके बाद सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया।
गलवान की घटना के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर भारत और चीन ने बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य संसाधनों की तैनाती की। दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा।
इस तनाव का असर सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों पर भी पड़ा। हालांकि, सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत का सिलसिला लगातार जारी रहा।
अक्टूबर 2024 के बाद तनाव कम करने की कोशिश
कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद अक्टूबर 2024 में भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सहमति बनी। इसके बाद दोनों देशों के बीच संपर्क और संवाद को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की कोशिश हुई।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पूरी तरह खत्म हो गया है। LAC से जुड़े कई मुद्दे अभी भी दोनों देशों के बीच संवेदनशील बने हुए हैं।
ऐसे में शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा सिर्फ ब्रिक्स सम्मेलन तक सीमित एक औपचारिक यात्रा नहीं होगा, बल्कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संदेश दे सकता है।
क्या भारत-चीन रिश्तों में सचमुच पिघल रही है बर्फ?
हाल के समय में भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय राजनयिक संपर्क बढ़ा है। दोनों पक्ष सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में भी प्रयास करते रहे हैं।
इसी क्रम में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ उनकी बातचीत को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जाता है कि सीमा विवाद और दोनों देशों के बीच संबंधों से जुड़े अन्य अहम मुद्दे बातचीत के केंद्र में रहे।
ऐसे माहौल में अगर शी जिनपिंग सितंबर में ब्रिक्स सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच मुलाकात की संभावना भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
शी जिनपिंग के दौरे से क्या बदल सकता है?
अगर चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा होता है, तो दोनों देशों के नेताओं के पास कई अहम मुद्दों पर सीधे बातचीत करने का अवसर होगा। इसमें सीमा पर शांति और स्थिरता, सैन्य तनाव कम करना, व्यापार, आर्थिक संबंध और द्विपक्षीय संवाद को मजबूत करना शामिल हो सकता है।
हालांकि, सिर्फ एक यात्रा से भारत-चीन के सभी विवाद खत्म हो जाएंगे, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी। सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों का सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा है और इसे सुलझाने के लिए लगातार बातचीत की जरूरत होगी।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि शी जिनपिंग के भारत दौरे की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। लेकिन अगर वह सितंबर में नई दिल्ली पहुंचते हैं, तो गलवान के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी और इसे दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय बाद आए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जाएगा।


