National Gandhi Museum: महात्मा गांधी से जुड़ी दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुओं की नीलामी ने देशभर में चर्चा छेड़ दी है। आनंद टी. हिंगोरानी के परिवार के संग्रह से गांधीजी से जुड़ी 86 वस्तुओं की नीलामी की गई, जिसमें उनके 688 हस्तलिखित विचारों का संग्रह 16.20 करोड़ रुपये में बिका। नीलामी के बाद राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय ने ऐसी ऐतिहासिक वस्तुओं को बेचने के बजाय संग्रहालय को सौंपने की अपील की है।
महात्मा गांधी से जुड़े मूल पत्र, हस्तलिखित दस्तावेज और उनके निजी इस्तेमाल की वस्तुएं केवल पुराने कागज या सामान्य संग्रहणीय सामान नहीं हैं। इनमें भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, गांधीजी के विचारों और उनके व्यक्तिगत जीवन की कई महत्वपूर्ण झलकियां छिपी हैं। यही वजह है कि इन वस्तुओं की हालिया नीलामी ने ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
19 अगस्त को आयोजित ‘Gandhi: From the Collection of Anand T. Hingorani’ नाम की नीलामी में गांधीजी से जुड़ी कुल 86 दुर्लभ वस्तुओं को बिक्री के लिए रखा गया। इनमें पत्र, पांडुलिपियां, तस्वीरें और गांधीजी के निजी इस्तेमाल की वस्तुएं शामिल थीं।
नीलामी में सबसे अधिक कीमत ‘A Thought for the Day’ नाम के संग्रह को मिली। यह गांधीजी द्वारा उनके करीबी सहयोगी आनंद टी. हिंगोरानी को करीब दो वर्षों के दौरान लिखे गए 688 हस्तलिखित विचारों का संग्रह है। यह 16.20 करोड़ रुपये में बिका।
688 हस्तलिखित विचारों की कीमत 16.20 करोड़ रुपये
नीलामी में सबसे खास वस्तु गांधीजी के 688 हस्तलिखित विचारों का संग्रह रहा। ‘A Thought for the Day’ में गांधीजी ने सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, निर्भयता और धार्मिक समानता जैसे विषयों पर अपने विचार लिखे थे।
इसके अलावा अस्पृश्यता उन्मूलन, प्रार्थना, रामनाम, सेवा, श्रम, भूख, कर्तव्य, स्वराज, नैतिक जिम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा, अनासक्ति, आत्मबोध और ईश्वर की खोज जैसे विषय भी इस संग्रह में शामिल हैं।
यह संग्रह 16.20 करोड़ रुपये में बिका। इसे किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज की नीलामी में बना विश्व रिकॉर्ड बताया गया है।
खास बात यह है कि ये विचार गांधीजी की अपनी लिखावट में हैं। ऐसे मूल हस्तलिखित दस्तावेज इतिहास के किसी दौर को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि उनमें केवल लिखित संदेश ही नहीं बल्कि उस समय की सोच और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति भी दर्ज होती है।
राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय ने जताई चिंता
नीलामी के बाद राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के निदेशक ए. अन्नामलाई ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गांधीजी के पत्र, पांडुलिपियां और उनके इस्तेमाल की गई वस्तुएं केवल किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि भारत की साझा ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं।
उन्होंने गांधी से जुड़ी ऐसी दुर्लभ वस्तुओं के मालिकों से अपील की कि उन्हें नीलाम करने के बजाय राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय को सौंपा जाए।
अन्नामलाई के मुताबिक, गांधीजी के कई पत्र और विचार किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं, लेकिन मूल पत्रों और उनके हाथ से लिखे दस्तावेजों का अपना अलग ऐतिहासिक महत्व है। इसलिए इन मूल सामग्रियों को सुरक्षित रखना जरूरी है।
उनका मानना है कि ऐसी वस्तुओं को इस तरह संरक्षित किया जाना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियां ही नहीं, बल्कि भारत और दुनिया के शोधकर्ता भी उनका अध्ययन कर सकें।
तीसरी और चौथी पीढ़ी तक पहुंच चुके हैं गांधीजी के दस्तावेज
राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के निदेशक ने यह भी चिंता जताई कि गांधीजी से जुड़े कई पत्र और निजी वस्तुएं अब मूल मालिकों की तीसरी या चौथी पीढ़ी तक पहुंच चुकी हैं।
समय बीतने के साथ इन वस्तुओं के नए मालिकों को उनके ऐतिहासिक महत्व या संरक्षण की सही तकनीक की पूरी जानकारी नहीं हो सकती। ऐसे में कुछ लोग इन सामग्रियों को निजी संग्रह में रखने या सुरक्षित तरीके से संरक्षित करने के बजाय नीलामी के जरिए बेचने का विकल्प चुन रहे हैं।
अन्नामलाई की अपील इसी चिंता से जुड़ी है। उनका कहना है कि गांधीजी की विरासत को सिर्फ निजी संग्रह का हिस्सा बनाकर नहीं रखना चाहिए। इसे सार्वजनिक अध्ययन और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
गांधीजी का पेटी चरखा भी 1.02 करोड़ रुपये में बिका
नीलामी में गांधीजी का पेटी चरखा यानी बॉक्स स्पिनिंग व्हील भी शामिल था। इसके साथ कताई के आध्यात्मिक अनुशासन से संबंधित दो पत्र भी थे।
इस वस्तु की अनुमानित कीमत 50 से 70 लाख रुपये के बीच बताई गई थी। हालांकि नीलामी में इसे अनुमान से काफी अधिक कीमत मिली और यह 1.02 करोड़ रुपये में बिका।
गांधीजी के जीवन और उनके विचारों में चरखे का विशेष स्थान था। उनके लिए चरखा केवल कपड़ा तैयार करने का साधन नहीं था, बल्कि स्वावलंबन, श्रम और आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी था। इसलिए उनसे जुड़ा मूल चरखा ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
‘Message on God’ की पांडुलिपियां 1.68 करोड़ में बिकीं
नीलामी में गांधीजी के ईश्वर और भगवद्गीता से जुड़े विचारों पर आधारित पांडुलिपियों और पत्रों का एक सेट भी रखा गया था। इसे ‘Message on God’ नाम दिया गया था।
यह सेट 1.68 करोड़ रुपये में बिका।
गांधीजी के सार्वजनिक जीवन में धर्म और आध्यात्मिकता का महत्वपूर्ण स्थान था। हालांकि वे धार्मिक सहिष्णुता और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान पर जोर देते थे। ऐसे में उनके हाथ से लिखे आध्यात्मिक विचार शोधकर्ताओं के लिए खास महत्व रखते हैं।
हस्ताक्षरित तस्वीर भी लाखों में बिकी
नीलामी में गांधीजी की एक हस्ताक्षरित तस्वीर भी शामिल थी। तस्वीर में गांधीजी लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं।
यह तस्वीर 78 लाख रुपये में बिकी।
इसके अलावा आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़े गांधीजी के पत्रों, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का एक सेट 57.60 लाख रुपये में बेचा गया।
इन वस्तुओं से पता चलता है कि हिंगोरानी परिवार के पास गांधीजी से जुड़ी सिर्फ एक-दो चीजें नहीं थीं, बल्कि उनके साथ लंबे समय से जुड़े पत्राचार और व्यक्तिगत सामग्री का एक महत्वपूर्ण संग्रह था।
हिंगोरानी परिवार ने पीढ़ियों तक संभाला संग्रह
नीलाम की गई वस्तुएं आनंद टी. हिंगोरानी के परिवार ने कई पीढ़ियों तक संभालकर रखी थीं। हिंगोरानी गांधीजी के करीबी सहयोगियों में शामिल थे और उनके साथ उनका लंबा संबंध रहा था।
इस निजी संग्रह के जरिए गांधीजी के व्यक्तित्व, विचारों और उनके करीबी सहयोगियों के साथ संबंधों की झलक मिलती है।
नीलामी में वस्तुओं को खरीदने वाले व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि नीलामी कराने वाली संस्था के अनुसार खरीदार भारत का ही है और महत्वपूर्ण पांडुलिपि देश में ही रहेगी।
खरीदार का नाम क्यों नहीं बताया गया?
16.20 करोड़ रुपये में गांधीजी के 688 हस्तलिखित विचार खरीदने वाले व्यक्ति की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। नीलामी संस्था ने केवल इतना बताया है कि खरीदार भारतीय है।
इसका मतलब है कि सबसे महंगा ऐतिहासिक दस्तावेज देश से बाहर नहीं जाएगा। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि खरीदार इस संग्रह को सार्वजनिक प्रदर्शन या शोध के लिए उपलब्ध कराएगा या इसे निजी संग्रह में रखेगा।
यही पहलू राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की चिंता को और महत्वपूर्ण बनाता है। संग्रहालय चाहता है कि गांधीजी से जुड़ी मूल ऐतिहासिक सामग्री सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षित रहे, ताकि उसका अध्ययन व्यापक स्तर पर किया जा सके।
86 वस्तुओं की नीलामी में क्या-क्या बिका?
‘Gandhi: From the Collection of Anand T. Hingorani’ नीलामी में कुल 86 लॉट शामिल थे। इनमें गांधीजी के पत्र, पांडुलिपियां, तस्वीरें और निजी इस्तेमाल की वस्तुएं शामिल थीं।
प्रमुख वस्तुओं की बिक्री इस प्रकार रही:
| वस्तु | बिक्री कीमत |
|---|---|
| ‘A Thought for the Day’ के 688 हस्तलिखित विचार | ₹16.20 करोड़ |
| ‘Message on God’ पांडुलिपियां और पत्र | ₹1.68 करोड़ |
| गांधीजी का पेटी चरखा और दो पत्र | ₹1.02 करोड़ |
| गांधीजी की हस्ताक्षरित तस्वीर | ₹78 लाख |
| आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़े पत्र, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड | ₹57.60 लाख |
इनमें सबसे अधिक आकर्षण 688 हस्तलिखित विचारों वाले संग्रह को मिला, जिसने 16 करोड़ रुपये से अधिक की कीमत हासिल की।
क्या गांधीजी की विरासत को निजी संपत्ति माना जाना चाहिए?
इस नीलामी के बाद एक बड़ा सवाल सामने आया है—क्या किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व से जुड़ी मूल वस्तुओं को सामान्य निजी संपत्ति की तरह खरीदा और बेचा जाना चाहिए?
एक तरफ, इन वस्तुओं के वर्तमान मालिकों के पास उनके स्वामित्व और उन्हें संभालने का अधिकार हो सकता है। दूसरी तरफ, गांधीजी जैसे राष्ट्रीय और वैश्विक ऐतिहासिक व्यक्तित्व से जुड़े मूल दस्तावेजों का महत्व निजी स्वामित्व से कहीं अधिक व्यापक है।
राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय का तर्क है कि इन वस्तुओं को संरक्षित करके जनता, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
ऐसे दस्तावेज केवल गांधीजी के जीवन को समझने में मदद नहीं करते, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधार, स्वराज, अहिंसा और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को समझने का भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की अपील क्यों महत्वपूर्ण है?
ए. अन्नामलाई की अपील का मूल उद्देश्य गांधीजी से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना है। संग्रहालय का कहना है कि जिन परिवारों के पास गांधीजी के पत्र, पांडुलिपियां या निजी वस्तुएं हैं, वे उन्हें नीलाम करने के बजाय संग्रहालय को सौंपने पर विचार करें।
ऐसा होने पर इन वस्तुओं का संरक्षण विशेषज्ञों की निगरानी में किया जा सकता है। साथ ही, इन्हें डिजिटल रूप से सुरक्षित कर शोध और शिक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
गांधीजी के हाथ से लिखे दस्तावेजों की कीमत केवल उनके कागज या बाजार मूल्य से तय नहीं होती। उनका वास्तविक महत्व उस ऐतिहासिक दौर, विचारधारा और व्यक्तिगत संवाद में है जिसे वे अपने भीतर समेटे हुए हैं।
निष्कर्ष
आनंद टी. हिंगोरानी के संग्रह की 86 वस्तुओं की नीलामी ने महात्मा गांधी की ऐतिहासिक विरासत को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस फिर सामने ला दी है। 688 हस्तलिखित विचारों का संग्रह 16.20 करोड़ रुपये में बिकना इस नीलामी का सबसे बड़ा आकर्षण रहा, जबकि गांधीजी का पेटी चरखा 1.02 करोड़ रुपये और ‘Message on God’ संग्रह 1.68 करोड़ रुपये में बिका।
खरीदार की पहचान भले ही सामने नहीं आई है, लेकिन नीलामी संस्था के मुताबिक वह भारतीय है और यह महत्वपूर्ण दस्तावेज देश में ही रहेगा।
अब राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की अपील के बाद निगाह इस बात पर है कि गांधीजी से जुड़े अन्य निजी संग्रहों के मालिक इन ऐतिहासिक वस्तुओं को किस तरह संरक्षित करने का फैसला लेते हैं। गांधीजी के पत्र और हस्तलिखित दस्तावेज आने वाली पीढ़ियों के लिए केवल संग्रहणीय वस्तुएं नहीं, बल्कि भारत के इतिहास और विचारों को समझने वाली महत्वपूर्ण धरोहर हैं।


