बेल्जियम में 26 साल के क्लेमेंट वैंडेनकेर्खोव की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। प्रिंस लॉरेंट ने उन्हें आधिकारिक तौर पर अपना बेटा स्वीकार कर लिया है। इससे पहले क्लेमेंट कार सेल्समैन के तौर पर काम करते थे। अब कानूनी तौर पर वह बेल्जियम के शाही परिवार का हिस्सा माने जाएंगे। हालांकि, उन्हें सरकारी भत्ता नहीं मिलेगा और न ही वह राजगद्दी के उत्तराधिकार क्रम में शामिल होंगे।
बेल्जियम के 26 वर्षीय क्लेमेंट वैंडेनकेर्खोव की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। अपनी रोजी-रोटी के लिए कार बेचने वाले क्लेमेंट की जिंदगी में अचानक बड़ा बदलाव आया है। बेल्जियम के प्रिंस लॉरेंट ने उन्हें आधिकारिक तौर पर अपना बेटा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही क्लेमेंट अब कानूनी रूप से शाही परिवार के सदस्य माने जाएंगे।
क्लेमेंट को आधिकारिक मान्यता देने की प्रक्रिया बेहद निजी तरीके से पूरी हुई। इसकी जानकारी सार्वजनिक होने में कई महीने लग गए। हालांकि, शाही परिवार का सदस्य बनने के बावजूद उन्हें सरकार की तरफ से कोई आर्थिक भत्ता नहीं मिलेगा।
मां हैं मशहूर सिंगर और टीवी हस्ती
क्लेमेंट वैंडेनकेर्खोव की मां आइरिस वैंडेनकेर्खोव बेल्जियम की जानी-मानी सिंगर और टीवी हस्ती हैं। उन्हें उनके स्टेज नाम वेंडी वैन वॉन्टन के नाम से भी पहचाना जाता है।
बताया जाता है कि आइरिस और प्रिंस लॉरेंट की मुलाकात 1990 के दशक के अंत में हुई थी। दोनों को कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ देखा गया था। इनमें प्रिंस एडवर्ड और सोफी राइस-जोन्स की शादी से जुड़ा कार्यक्रम भी शामिल था। उस दौर में दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं जरूर हुईं, लेकिन इसकी कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
क्लेमेंट का जन्म साल 2000 में हुआ था।
2013 में हुई थी पिता से पहली मुलाकात
क्लेमेंट और प्रिंस लॉरेंट की पहली मुलाकात भी काफी दिलचस्प रही। साल 2013 में दोनों एक शॉपिंग सेंटर में मिले थे। खास बात यह थी कि उस समय क्लेमेंट को यह जानकारी नहीं थी कि सामने खड़ा शख्स उनके पिता हैं।
मां से सच्चाई जानने के करीब चार साल बाद क्लेमेंट ने प्रिंस लॉरेंट से संपर्क किया। इसके बाद दोनों के बीच कई मुलाकातें हुईं। रिश्ते की पुष्टि के लिए DNA टेस्ट भी कराया गया। रिपोर्ट में दोनों के बीच 99.5 प्रतिशत आनुवंशिक मिलान पाया गया।
इसके बाद प्रिंस लॉरेंट ने क्लेमेंट को अपने बेटे के तौर पर स्वीकार कर लिया।
प्रिंस लॉरेंट ने क्या कहा?
62 वर्षीय प्रिंस लॉरेंट ने इस मामले में बयान जारी करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने और क्लेमेंट ने इस मुद्दे पर खुलकर और ईमानदारी से बातचीत की है।
उन्होंने लोगों से इस मामले को समझदारी और संवेदनशीलता के साथ लेने की अपील की। साथ ही उन्होंने साफ किया कि वह इस विषय पर आगे कोई अतिरिक्त जानकारी या टिप्पणी नहीं करेंगे।
क्लेमेंट और प्रिंस लॉरेंट का रिश्ता अब सिर्फ कानूनी पहचान तक सीमित नहीं है। दोनों के बीच निजी तौर पर भी जुड़ाव बनने की बात सामने आई है।
प्रिंस लॉरेंट की शादी और परिवार
प्रिंस लॉरेंट ने साल 2003 में प्रिंसेस क्लेयर से शादी की थी। दोनों के तीन बच्चे हैं—लुईस, एमेरिक और निकोलस।
क्लेमेंट को कानूनी तौर पर प्रिंस लॉरेंट का बेटा स्वीकार किए जाने के बाद अब वह उनके सौतेले भाई-बहनों के साथ पारिवारिक उत्तराधिकार अधिकार साझा करेंगे।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें शाही परिवार की सभी सुविधाएं या सरकारी फंडिंग मिलेगी।
सरकारी भत्ता नहीं मिलेगा
क्लेमेंट के शाही परिवार का सदस्य बनने के बावजूद उन्हें बेल्जियम सरकार की तरफ से कोई आर्थिक भत्ता नहीं मिलेगा। इसके अलावा उन्हें शाही परिवार की किसी आधिकारिक जिम्मेदारी में भी शामिल नहीं किया जाएगा।
वह बेल्जियम की राजगद्दी के उत्तराधिकार क्रम में भी शामिल नहीं होंगे।
2013 में हुए बदलाव के बाद बेल्जियम के शाही परिवार में सरकारी फंडिंग पाने वाले सदस्यों की संख्या सीमित है। क्लेमेंट इस सूची का हिस्सा नहीं होंगे।
हालांकि, प्रिंस लॉरेंट की निजी संपत्ति में उनके सौतेले भाई-बहनों के समान उत्तराधिकार अधिकार होंगे।
मां का सरनेम नहीं छोड़ना चाहते क्लेमेंट
अब एक सवाल यह भी है कि क्या क्लेमेंट आगे चलकर अपना सरनेम बदलकर सैक्स-कोबर्ग रखेंगे। फिलहाल इसको लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
क्लेमेंट ने फ्लेमिश अखबार हेट निउव्सब्लैड से बातचीत में संकेत दिया कि वह शाही परिवार का सरनेम अपनाने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन वह अपने मौजूदा सरनेम वैंडेनकेर्खोव को भी छोड़ना नहीं चाहते।
उनके लिए यह नाम उनकी मां के योगदान और उनके जीवन में निभाई गई भूमिका से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरनेम बदलना उनके लिए सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं, बल्कि भावनात्मक फैसला भी है।
बेल्जियम के शाही परिवार में पहले भी सामने आया ऐसा मामला
बेल्जियम के शाही परिवार में किसी संतान को बाद में आधिकारिक तौर पर स्वीकार किए जाने का यह पहला मामला नहीं है।
प्रिंस लॉरेंट के पिता और बेल्जियम के पूर्व किंग अल्बर्ट II ने लंबे समय तक डेल्फिन बोएल को अपनी बेटी मानने से इनकार किया था। बाद में साल 2020 में उन्होंने डेल्फिन को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार कर लिया।
कानूनी लड़ाई के बाद डेल्फिन को शाही दर्जा मिला और वह डेल्फिन डे सैक्स-कोबर्ग के नाम से जानी जाने लगीं।
क्लेमेंट वैंडेनकेर्खोव की कहानी भी इसी तरह लंबे समय तक छिपे रहे पारिवारिक रिश्ते के सामने आने की कहानी है। कार सेल्समैन के तौर पर काम करने वाले क्लेमेंट अब कानूनी तौर पर बेल्जियम के शाही परिवार का हिस्सा हैं, हालांकि उनके जीवन में इस नई पहचान के साथ सरकारी भूमिका या आर्थिक भत्ता नहीं जुड़ा है।


