Mini Mathur: टीवी होस्ट और एक्टर मिनी माथुर ने महिलाओं के शरीर, वजन और निजी जिंदगी को लेकर किए जाने वाले सवालों पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं से भी अपील की कि किसी के शरीर या निजी फैसलों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। खासतौर पर उन्होंने महिलाओं से बच्चे पैदा करने को लेकर पूछे जाने वाले सवालों पर नाराजगी जताई और कहा कि बिना पूछे किसी को ऐसी सलाह नहीं देनी चाहिए।
मिनी माथुर इन दिनों अपने करियर के साथ-साथ महिलाओं की हेल्थ और खासकर मेनोपॉज से जुड़े मुद्दों पर भी जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने Hauterrfly के पॉडकास्ट ‘द मेल फेमिनिस्ट’ में अपने अनुभव साझा किए। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि किस तरह महिलाओं को उनके शरीर, उम्र, वजन, बच्चों और कामकाज को लेकर लगातार सवालों और टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है।
महिलाओं के शरीर पर कमेंट करना बंद करें: मिनी माथुर
पॉडकास्ट में मिनी माथुर से पूछा गया कि पुरुषों को महिलाओं से क्या कहना या पूछना बंद कर देना चाहिए। इस पर उन्होंने सबसे पहले महिलाओं की शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करने की आदत पर सवाल उठाया।
मिनी ने कहा कि किसी महिला को देखकर यह पूछना कि वह थकी हुई क्यों लग रही है, उसकी नींद पूरी हुई या नहीं, उसका वजन क्यों बढ़ गया या अचानक कम कैसे हो गया, सही नहीं है। उनके मुताबिक इस तरह की टिप्पणियां केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी एक-दूसरे से करती हैं।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी व्यक्ति के शरीर को देखकर उस पर टिप्पणी करने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उन्होंने कब किसी दूसरे व्यक्ति को इतनी नजदीकी की इजाजत दी कि वह उनके शरीर को देखे और उसके बारे में अपनी राय देने लगे।
मिनी के मुताबिक लोगों को एक-दूसरे की निजी सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। किसी के शरीर, वजन या लुक्स को लेकर सवाल करने के बजाय अपनी बातचीत और व्यवहार में संवेदनशीलता रखनी चाहिए।
‘बच्चों का क्या?’, ऐसे सवालों पर भी जताई नाराजगी
मिनी माथुर ने महिलाओं की निजी जिंदगी से जुड़े सवालों को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने खासतौर पर उन सवालों का जिक्र किया, जिनमें महिलाओं से पूछा जाता है कि वे दूसरा बच्चा कब करेंगी या बच्चा क्यों नहीं कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं से यह पूछना कि “बच्चों का क्या?” या “एक और बच्चा कर लो” जैसी सलाह देना बंद किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक किसी महिला की जिंदगी में बच्चे को लेकर क्या फैसला है, यह उसका निजी मामला है।
मिनी ने लोगों को सलाह दी कि जब तक सामने वाला व्यक्ति खुद इस विषय पर बात न करे, तब तक उससे इस तरह के निजी सवाल नहीं पूछने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अपनी सलाह अपने पास रखिए और तभी जवाब दीजिए जब आपसे पूछा जाए।
उनकी यह बात उन सामाजिक सवालों की ओर भी इशारा करती है, जिनका सामना महिलाओं को शादी, बच्चों, करियर और उम्र से जुड़े फैसलों को लेकर अक्सर करना पड़ता है।
‘हाउसवाइफ’ या ‘होममेकर’ कहकर जज करना भी गलत
मिनी माथुर ने महिलाओं के कामकाज को लेकर बने सामाजिक नजरिए पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल इसलिए जज नहीं किया जाना चाहिए कि वे घर संभालती हैं या किसी पारंपरिक नौकरी में काम नहीं कर रही हैं।
उन्होंने ‘हाउसवाइफ’ और ‘होममेकर’ जैसे शब्दों को लेकर भी अपनी बात रखी। मिनी ने कहा कि वह खुद होममेकर हैं और उन्हें इस बात पर गर्व है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घर संभालने का मतलब यह नहीं है कि कोई महिला कुछ और नहीं कर रही।
मिनी ने कहा कि उनके जीवन में कई ऐसे काम हैं, जिनके बारे में दूसरे लोग शायद जानते तक नहीं हैं। इसलिए किसी महिला को देखकर यह पूछना कि वह काम क्यों नहीं कर रही है, उचित नहीं है।
उनका कहना है कि महिलाओं के काम को सिर्फ नौकरी या ऑफिस जाने के आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए। घर और परिवार संभालना भी मेहनत का काम है और इसके अलावा महिलाएं अपने स्तर पर कई दूसरे काम और जिम्मेदारियां निभा सकती हैं।
मेनोपॉज पर भी खुलकर बोलीं मिनी माथुर
मिनी माथुर ने पॉडकास्ट बातचीत के दौरान अपने मेनोपॉज के अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि इस दौर में उन्हें कई ऐसे लक्षणों का सामना करना पड़ा, जो उनके लिए नए थे।
मिनी के मुताबिक उन्हें हॉट फ्लैश, रात में पसीना आना, नींद से जुड़ी परेशानियां, जोड़ों में दर्द और ब्रेन फॉग जैसी समस्याएं महसूस होने लगी थीं। उन्होंने यह भी बताया कि याददाश्त में बदलाव जैसा अनुभव उनके लिए खास तौर पर परेशान करने वाला था, क्योंकि वह लंबे समय से टेलीविजन प्रेजेंटर के तौर पर काम करती रही हैं।
उन्होंने अपनी हेल्थ जर्नी के बारे में बताते हुए कहा कि शुरुआत में उन्हें महसूस हुआ कि उनके शरीर में कुछ ऐसा बदलाव हो रहा है, जो उनके पुराने अनुभव से अलग था। डॉक्टरों से संपर्क करने के बावजूद उन्हें लगा कि केवल लक्षणों पर ध्यान दिया जा रहा है, जबकि वह इनके पीछे की वजह को समझना चाहती थीं।
इसी अनुभव ने उन्हें मेनोपॉज के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने इस विषय पर गहराई से पढ़ना और समझना शुरू किया।
महिलाओं की हेल्थ को लेकर शुरू की ‘Pauseitive’ कम्युनिटी
मिनी माथुर ने 40 साल और उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं को मेनोपॉज के दौर को बेहतर तरीके से समझने और उससे जुड़े बदलावों के बारे में जागरूक करने के लिए अपनी इंस्टाग्राम कम्युनिटी ‘Pauseitive’ की शुरुआत की है।
इस प्लेटफॉर्म के पीछे उनका अपना अनुभव भी एक बड़ी वजह रहा। मिनी के मुताबिक जब उन्होंने खुद इन बदलावों का सामना किया, तब उन्हें महसूस हुआ कि महिलाओं के लिए मेनोपॉज को लेकर सही जानकारी और बातचीत कितनी जरूरी है।
वह महिलाओं को यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर शर्म या झिझक की जरूरत नहीं है। इन मुद्दों पर खुलकर बात करना और सही जानकारी हासिल करना जरूरी है।
मिनी माथुर का टीवी से फिल्मों और स्ट्रीमिंग तक का सफर
मिनी माथुर भारतीय मनोरंजन जगत में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने अपने टेलीविजन करियर की शुरुआत आर. माधवन के साथ ‘टोल मोल के बोल’ शो से की थी। इसके बाद वह MTV VJ के तौर पर भी काफी लोकप्रिय हुईं।
हालांकि, सिंगिंग रियलिटी शो ‘इंडियन आइडल’ से उन्हें देशभर में बड़ी पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन के अलावा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और फिल्मों में भी काम किया।
मिनी को ‘माइंड द मल्होत्राज़’ जैसी सीरीज में भी देखा गया है। वह फिल्ममेकर कबीर खान की पत्नी हैं और कई दशकों से मनोरंजन इंडस्ट्री का हिस्सा हैं।
समय के साथ मिनी ने अपने करियर को सिर्फ एक्टिंग और होस्टिंग तक सीमित नहीं रखा। अब वह महिलाओं की हेल्थ और मेनोपॉज जैसे विषयों पर भी बातचीत कर रही हैं।
निजी सवालों पर सीमाएं तय करने का संदेश
मिनी माथुर की बातों का मुख्य संदेश यही है कि हर व्यक्ति की अपनी निजी सीमाएं होती हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। किसी महिला के शरीर, वजन, उम्र, बच्चे, शादी या करियर को लेकर सवाल करने से पहले यह सोचना जरूरी है कि क्या सामने वाले व्यक्ति ने उस विषय पर बात करने की अनुमति दी है।
उनकी सलाह सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए भी है। उनका कहना है कि दूसरों के शरीर पर टिप्पणी करने और उनकी निजी जिंदगी में बिना बुलाए सलाह देने की आदत को खत्म करने की जरूरत है।
मिनी की यह बेबाक राय ऐसे समय में सामने आई है, जब सोशल मीडिया और सार्वजनिक बातचीत में महिलाओं के शरीर और निजी फैसलों को लेकर टिप्पणियां आम हैं। उनका संदेश है कि किसी की जिंदगी को अपनी अपेक्षाओं के हिसाब से देखने के बजाय उसकी पसंद और निजी फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए।


