Cyber GST Fraud: किसी व्यक्ति की पहचान चुराकर उसके नाम पर फर्जी GST फर्म खोलना केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। साइबर GST धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?
20 अगस्त को जस्टिस गिरीश कठपालिया ने राज कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के टैक्स चोरी और फर्जी GST नेटवर्क से जुड़े मामलों में जांच पूरी होने से पहले राहत देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने माना कि पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी हो सकती है।
अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में अग्रिम जमानत देने से समाज में गलत संदेश जा सकता है। फर्जी पहचान के जरिए GST फर्म बनाकर टैक्स सिस्टम का दुरुपयोग करना केवल किसी एक व्यक्ति को आर्थिक नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे सरकारी राजस्व और व्यापक आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
PAN और आधार का इस्तेमाल कर खोली गईं फर्जी फर्में
मामला 9 अप्रैल 2024 को सामने आया। एक व्यक्ति को इनकम टैक्स विभाग से नोटिस मिला, जिसके बाद उसे पता चला कि उसकी जानकारी और अनुमति के बिना उसके PAN और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर दो GST फर्में रजिस्टर की गई थीं।
जांच में सामने आया कि दस्तावेजों पर मौजूद इन कंपनियों का वास्तविक तौर पर कोई कारोबार नहीं था। यानी पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल ऐसी फर्में बनाने के लिए किया गया, जिनका उद्देश्य कथित तौर पर GST व्यवस्था का गलत फायदा उठाना था।
तकनीकी जांच से सामने आया मोबाइल कनेक्शन
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। जांच एजेंसियों ने उस मोबाइल फोन का पता लगाया, जिसका इस्तेमाल फर्जी GST रिटर्न दाखिल करने के लिए OTP हासिल करने में किया गया था।
अभियोजन के अनुसार, इस मोबाइल से जुड़ा ईमेल राज कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लिंक था। पुलिस का आरोप है कि कुमार ने सह-आरोपी अमन बिष्ट के साथ मिलकर फर्जी GST नंबर और इनवॉइस तैयार किए तथा ग्राहकों से भुगतान भी लिया।
बचाव पक्ष ने आरोपों से किया इनकार
राज कुमार की ओर से अदालत में आरोपों से इनकार किया गया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी को इस कथित धोखाधड़ी से कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला और उसे सह-आरोपी के बयान के आधार पर मामले में फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि जिस मोबाइल फोन की बात जांच एजेंसी कर रही है, वह राज कुमार का नहीं था।
वहीं, पुलिस ने कुमार के खिलाफ तीन अन्य वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों का भी हवाला दिया। इनमें एक मामला PMLA से जुड़ा बताया गया है।
फर्जी GST नेटवर्क क्यों है गंभीर मामला?
फर्जी GST फर्मों के जरिए टैक्स सिस्टम का दुरुपयोग होने पर सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा फर्जी इनवॉइस के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी रहती है।
यही वजह है कि पहचान की चोरी, फर्जी कंपनियों के पंजीकरण और साइबर माध्यम से GST धोखाधड़ी को केवल व्यक्तिगत अपराध के तौर पर नहीं देखा जा सकता। दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी इसी व्यापक आर्थिक प्रभाव की ओर इशारा करती है।
नोट: मामले में लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आरोपी के खिलाफ आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत के अंतिम फैसले से होगा।


