दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक साल की अवधि वाले पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) प्रोग्राम में सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। विश्वविद्यालय की ओर से 46 विषयों में संचालित एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों के लिए कुल 5,857 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। इन सीटों में रेगुलर मोड की 2,807 सीटें शामिल हैं।
यह फैसला उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) के तहत अपनी स्नातक डिग्री पूरी की है और अब एक साल के पीजी कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं। खास बात यह है कि FYUP के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले छात्रों के लिए पीएचडी में सीधे प्रवेश का रास्ता भी बनाया गया है।
46 पीजी प्रोग्राम में 5,857 सीटें
दिल्ली विश्वविद्यालय 2026-27 सत्र में 46 विषयों में एक साल का पीजी प्रोग्राम ऑफर कर रहा है। इन सभी कार्यक्रमों में कुल 5,857 सीटें हैं। औसतन देखें तो 46 कार्यक्रमों में प्रति प्रोग्राम करीब 127 सीटें उपलब्ध होती हैं।
विश्वविद्यालय ने दो वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में सीटों की मौजूदा संख्या को बनाए रखने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य तीन साल की स्नातक डिग्री पूरी करने के बाद FYUP से बाहर होने वाले छात्रों के लिए दो वर्षीय पीजी विकल्प उपलब्ध रखना है, जबकि चार साल की डिग्री पूरी करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय पीजी कार्यक्रम का विकल्प दिया गया है।
12,111 छात्रों ने किया आवेदन
डीयू के आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में विश्वविद्यालय में कुल 75,948 छात्रों ने दाखिला लिया था। इनमें से 40,005 छात्रों ने तीन साल की स्नातक पढ़ाई पूरी करने के बाद 2025 में अपनी डिग्री पूरी कर ली, जबकि करीब 35,943 छात्र चौथे वर्ष में आगे बढ़े।
चौथे वर्ष में पढ़ाई जारी रखने वाले 35,943 छात्रों में से 12,111 छात्रों ने 2026-27 के एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम में दाखिले के लिए आवेदन किया। यानी चौथे वर्ष में आगे बढ़ने वाले करीब 33.7 फीसदी छात्रों ने एक वर्षीय पीजी कोर्स के लिए आवेदन किया है।
एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में 5,857 सीटें उपलब्ध हैं, जबकि आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या 12,111 है। इस लिहाज से उपलब्ध सीटें कुल आवेदकों की संख्या की करीब 48.36 फीसदी हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन कार्यक्रमों में दाखिले के लिए छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा रहेगी।
बढ़ी हुई सीटों के लिए अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था
सीटों में इजाफे के साथ छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए विश्वविद्यालय ने अतिरिक्त शिक्षकों और क्लासरूम की व्यवस्था करने की तैयारी की है।
डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता के मुताबिक, जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी विश्वविद्यालय में आकर पढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी और इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाएगा।
इस कदम का उद्देश्य बढ़े हुए छात्र-इनटेक के बावजूद शिक्षण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना है।
FYUP के तहत क्यों किया गया बदलाव?
दिल्ली विश्वविद्यालय ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के अनुरूप अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF) 2022 के तहत शैक्षणिक सत्र 2022-23 से चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम यानी FYUP लागू किया था।
चार वर्षीय डिग्री का उद्देश्य छात्रों को सामान्य स्नातक शिक्षा के साथ-साथ रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप का अधिक अनुभव देना है। इसके अलावा भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण बदलाव माना गया है।
FYUP के तहत छात्रों को तीन साल के बाद स्नातक डिग्री लेकर बाहर निकलने और चार साल की पढ़ाई पूरी करके आगे बढ़ने, दोनों तरह के विकल्प मिलते हैं।
4 साल की डिग्री के बाद सीधे PhD का रास्ता
दिल्ली विश्वविद्यालय ने चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट डिग्री पूरी करने वाले छात्रों के लिए पीएचडी प्रवेश का रास्ता भी आसान किया है। विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस VI में किए गए बदलाव के तहत कुछ पात्र छात्र सीधे पीएचडी प्रोग्राम के लिए आवेदन कर सकेंगे।
इसके लिए FYUP पूरा करने वाले सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 7.5 या उससे अधिक CGPA की शर्त रखी गई है। वहीं SC/ST छात्रों के लिए न्यूनतम 7.0 CGPA की पात्रता बताई गई है।
इसका मतलब है कि पात्रता मानदंड पूरा करने वाले चार वर्षीय स्नातक छात्र को पहले मास्टर डिग्री पूरी करना जरूरी नहीं होगा और वह सीधे पीएचडी प्रवेश के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि, पीएचडी में अंतिम प्रवेश संबंधित विश्वविद्यालयीय नियमों, प्रवेश प्रक्रिया और उपलब्ध सीटों के आधार पर होगा।
तीन साल की डिग्री वालों के लिए भी पीजी विकल्प
डीयू ने केवल चार वर्षीय डिग्री करने वाले छात्रों के लिए ही व्यवस्था नहीं की है। तीन साल की स्नातक डिग्री पूरी करने वाले छात्रों के लिए भी दो वर्षीय पीजी प्रोग्राम में सीटों की मौजूदा संख्या बरकरार रखी गई है।
इस तरह विश्वविद्यालय ने दोनों श्रेणियों के छात्रों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक रास्ते बनाए हैं। चार वर्षीय डिग्री पूरी करने वाले छात्रों के पास एक वर्षीय पीजी और पात्रता पूरी करने पर सीधे पीएचडी का विकल्प है, जबकि तीन वर्षीय स्नातक डिग्री वाले छात्र दो वर्षीय पीजी कार्यक्रम में दाखिला ले सकते हैं।
छात्रों के लिए क्या है इसका मतलब?
दिल्ली विश्वविद्यालय का यह बदलाव उच्च शिक्षा में नई व्यवस्था को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक वर्षीय पीजी कार्यक्रम से चार वर्षीय स्नातक डिग्री वाले छात्रों को मास्टर डिग्री कम समय में पूरी करने का अवसर मिलेगा। वहीं, निर्धारित CGPA हासिल करने वाले छात्रों के लिए सीधे पीएचडी का विकल्प उच्च शिक्षा की अवधि को और कम कर सकता है।
हालांकि, 5,857 सीटों के मुकाबले 12,111 आवेदन आने से यह भी साफ है कि एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए छात्रों के बीच अच्छा खासा मुकाबला रहने वाला है। इसलिए उम्मीदवारों को अपने विषय, पात्रता, प्रवेश नियम और संबंधित कार्यक्रम की सीटों की जानकारी ध्यान से जांचनी चाहिए।
नोट: उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर 5,857 सीटों का 46 कार्यक्रमों में औसत करीब 127 सीट प्रति कार्यक्रम बैठता है। अलग-अलग विषयों में वास्तविक सीट संख्या इससे कम या ज्यादा हो सकती है।


