नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार को उम्मीद है कि एपल और गूगल जैसी दिग्गज टेक कंपनियां भारत को अपने बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर विकसित कर सकती हैं। सरकार इन कंपनियों के साथ भारत में उत्पादन बढ़ाने को लेकर बातचीत कर रही है।
वैष्णव ने 21 अगस्त को मनीकंट्रोल के एक सवाल के जवाब में कहा कि गूगल अपने उन प्रोडक्ट्स के बड़े हिस्से का उत्पादन भारत में कर सकती है, जिन्हें वह दूसरे देशों में एक्सपोर्ट करती है। वहीं, सरकार एपल से भी भारत में आईफोन के अलावा अन्य प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने को लेकर बातचीत कर रही है।
एपल भारत में आईफोन के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स बनाएगी
एपल पहले से ही भारत में बड़े पैमाने पर आईफोन का उत्पादन कर रही है। कंपनी ने 2017 में भारत में आईफोन की असेंबलिंग शुरू की थी। इसके बाद से भारत में उसका मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क लगातार बढ़ा है।
सरकार अब चाहती है कि एपल भारत को केवल आईफोन असेंबलिंग का केंद्र न रखकर दूसरे हार्डवेयर प्रोडक्ट्स के उत्पादन के लिए भी इस्तेमाल करे। वैष्णव के बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भारत में एपल के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का मैन्युफैक्चरिंग बेस और व्यापक हो सकता है।
गूगल भारत में बढ़ा रही है मैन्युफैक्चरिंग
गूगल भी भारत में अपने हार्डवेयर प्रोडक्ट्स का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी ने अक्टूबर 2023 में भारत में पिक्सल स्मार्टफोन की मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की योजना की घोषणा की थी। इसके तहत पिक्सल 8 सीरीज से भारत में उत्पादन की शुरुआत करने की बात कही गई थी।
गूगल का भारत में उत्पादन बढ़ाने का एक बड़ा उद्देश्य घरेलू बाजार की मांग पूरी करने के साथ-साथ यहां से दूसरे देशों को एक्सपोर्ट करना भी है।
Dixon Technologies करती है Google Pixel की असेंबलिंग
भारत में गूगल पिक्सल स्मार्टफोन की असेंबलिंग करने वाली कंपनियों में Dixon Technologies भी शामिल है। गूगल ने 2025 के दौरान भारत में पिक्सल स्मार्टफोन के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में कदम तेज किए थे।
अगर गूगल चीन से अपने उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा भारत और वियतनाम जैसे देशों में शिफ्ट करती है, तो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को इसका फायदा मिल सकता है। इससे स्थानीय सप्लायर नेटवर्क, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
चीन की जगह भारत में बन सकते हैं फोन, वॉच और ईयरबड्स
हाल में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल 2027 से चीन में पिक्सल फोन, स्मार्टवॉच और वायरलेस ईयरबड्स का उत्पादन बंद करने पर विचार कर रही है। कंपनी इन प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग को भारत और वियतनाम में बढ़ा सकती है।
हालांकि, गूगल ने इन रिपोर्ट्स की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है। ऐसे में भारत में उत्पादन को लेकर अंतिम तस्वीर कंपनी के आधिकारिक फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
भारत में एपल का मैन्युफैक्चरिंग बेस लगातार मजबूत
एपल ने 2017 में भारत में आईफोन की असेंबलिंग शुरू की थी। इसके बाद कंपनी ने Foxconn और टाटा ग्रुप समेत कई प्रमुख सप्लायर्स के साथ मिलकर देश में अपना उत्पादन नेटवर्क मजबूत किया है।
भारत अब एपल के लिए केवल एक बड़ा स्मार्टफोन बाजार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट बेस भी बन चुका है। कंपनी यहां बने आईफोन को दूसरे देशों में भी भेज रही है।
काउंटरप्वाइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, 2026 में एपल के कुल आईफोन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 26 फीसदी तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
भारत के लिए क्यों अहम है एपल और गूगल का विस्तार?
एपल और गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों का भारत में उत्पादन बढ़ना देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सिर्फ असेंबलिंग ही नहीं, बल्कि कंपोनेंट सप्लाई, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ सकता है।
सरकार लंबे समय से भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर जोर दे रही है। अगर बड़ी टेक कंपनियां चीन से अपने उत्पादन का हिस्सा भारत में शिफ्ट करती हैं, तो इससे भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका और मजबूत हो सकती है।
फिलहाल एपल भारत में आईफोन उत्पादन के मामले में तेजी से विस्तार कर रही है, जबकि गूगल भी पिक्सल समेत अपने हार्डवेयर प्रोडक्ट्स के लिए भारत को अहम मैन्युफैक्चरिंग बेस के तौर पर विकसित कर रही है। अश्विनी वैष्णव का ताजा बयान संकेत देता है कि सरकार आने वाले वर्षों में इस विस्तार को और गति देने की कोशिश कर रही है।


