Price of Sugar in Nepal: दशैं और तिहार जैसे बड़े त्योहारों से पहले नेपाल में चीनी की कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खुदरा बाजार में जिस चीनी का भाव अब तक करीब 95-100 नेपाली रुपये प्रति किलोग्राम था, वह बढ़कर 120 रुपये किलो तक पहुंच गया है। महंगाई की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि कई जगहों पर ज्यादा कीमत देने के बावजूद लोगों को चीनी आसानी से नहीं मिल रही है।
नेपाली न्यूज पोर्टल ‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में चीनी की उपलब्धता घटने के साथ ही सरकार पर भी आपूर्ति सामान्य करने का दबाव बढ़ गया है। त्योहारों के दौरान नेपाल में चीनी की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है, ऐसे में मौजूदा स्थिति ने चिंता और बढ़ा दी है।
भारत पर निर्भरता बनी बड़ी वजह
नेपाल की चीनी आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत से होने वाले आयात पर निर्भर करता है। रिपोर्ट के अनुसार, जब भारत ने बैशाख के अंतिम सप्ताह में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया, उसी समय नेपाल में भविष्य की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी।
उस वक्त नेपाल शुगर इंडस्ट्री एसोसिएशन ने दावा किया था कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। उद्योग की ओर से यह भी कहा गया था कि फैक्ट्री स्तर पर चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
इन आश्वासनों के बाद नेपाल सरकार ने तत्काल बड़े पैमाने पर आयात करने के बजाय घरेलू स्टॉक और उत्पादन पर भरोसा किया। लेकिन कुछ ही महीनों में तस्वीर बदल गई।
तीन महीने बाद खत्म हुआ स्टॉक
‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट में नेपाल के उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि हाल की बैठकों में चीनी उद्योग से जुड़े लोगों ने स्टॉक खत्म होने की बात कही है।
यानी जिस समय पर्याप्त भंडार होने का दावा किया जा रहा था, अब वही स्टॉक त्योहारों से पहले खत्म होता नजर आ रहा है। इससे बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ा और खुदरा कीमतें भी ऊपर चली गईं।
स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दशैं और तिहार के दौरान मिठाइयों और घरेलू पकवानों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। अगर उस समय बाजार में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हुई तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
आयात प्रक्रिया में देरी ने बढ़ाई परेशानी
नेपाल के कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों और घरेलू मांग के बीच संतुलन नहीं बन पा रहा है। इसके अलावा सरकार की ओर से आयात अनुमति और कोटा को लेकर स्पष्टता में देरी भी बाजार की परेशानी बढ़ा रही है।
व्यापारियों के मुताबिक, अगर समय रहते पर्याप्त मात्रा में चीनी आयात नहीं की गई तो त्योहारों के दौरान किल्लत और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ेगा।
दूसरी तरफ, बाजार में चीनी की कमी की खबरें फैलने पर जमाखोरी की आशंका भी बढ़ जाती है। उपभोक्ता और छोटे दुकानदार भविष्य में कीमत बढ़ने के डर से जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर रखने लगते हैं। इससे उपलब्ध स्टॉक पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
ग्लोबल मार्केट का भी असर
नेपाल में चीनी की कीमत केवल घरेलू उत्पादन और मांग से तय नहीं होती। आयातित चीनी की लागत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों, ऊर्जा लागत और मुद्रा विनिमय दर का भी असर पड़ता है।
वैश्विक बाजार में कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और परिवहन लागत बढ़ने से आयात महंगा हो सकता है। इसका असर उन देशों पर ज्यादा पड़ता है जो अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर हैं।
नेपाल के मामले में भारत से होने वाली सप्लाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत भौगोलिक रूप से नजदीक है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध हैं।
भारत से 10,000 क्विंटल चीनी मंगाने की तैयारी
बाजार में बढ़ती किल्लत को देखते हुए नेपाल की सरकारी कंपनी फूड मैनेजमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड ने भारत से सरकार-से-सरकार यानी G2G व्यवस्था के तहत चीनी मंगाने की तैयारी शुरू की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती चरण में 10,000 क्विंटल चीनी भारत से आयात की जाएगी। कंपनी के सूचना अधिकारी माधव मिश्रा के अनुसार, आयात प्रक्रिया अंतिम चरण में है और चीनी जल्द ही नेपालगंज सीमा के रास्ते नेपाल पहुंच सकती है।
सरकार की कोशिश है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की उपलब्धता बनी रहे और उपभोक्ताओं को अत्यधिक महंगी चीनी खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।
क्या चीनी की कीमत फिर नीचे आ सकती है?
अगर भारत से प्रस्तावित चीनी की खेप समय पर नेपाल पहुंचती है और उसे बाजार में तेजी से वितरित किया जाता है, तो सप्लाई का दबाव कुछ कम हो सकता है। इससे खुदरा कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद की जा सकती है।
हालांकि, दशैं और तिहार से पहले मांग में होने वाली बढ़ोतरी के कारण कीमतों पर दबाव पूरी तरह खत्म होगा या नहीं, यह आयात की मात्रा और बाजार में वितरण की गति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त स्टॉक, समय पर आयात और त्योहारों की बढ़ती मांग के बीच संतुलन बनाने की है। 120 रुपये किलो तक पहुंची चीनी की कीमत ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि अगर सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो त्योहारों से पहले नेपाली परिवारों का बजट और बिगड़ सकता है।


