Gift Nifty Indicator: भारतीय शेयर बाजार में लगातार छह कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद गुरुवार को राहत की उम्मीद बन रही है। एशियाई बाजारों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के बीच GIFT Nifty हरे निशान में कारोबार कर रहा है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 92 डॉलर प्रति बैरल बना हुआ है, जो घरेलू बाजार के लिए अब भी बड़ी चिंता है।
सुबह 7:50 बजे GIFT Nifty करीब 24,230 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसमें लगभग 140 अंक यानी 0.58% की बढ़त थी। इससे संकेत मिल रहा है कि गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत सकारात्मक हो सकती है।
इससे पहले बुधवार को भारतीय बाजार लगातार छठे कारोबारी सत्र में दबाव में रहे। सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42% गिरकर 76,909.68 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 76.60 अंक यानी 0.32% की गिरावट के साथ 24,078.30 के स्तर पर आ गया।
एशियाई बाजारों में जोरदार रिकवरी
गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली। दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद निवेशकों का रुख फिर से जोखिम वाली परिसंपत्तियों की ओर बढ़ा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने बाजार की धारणा को सहारा दिया।
MSCI एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स में करीब 1.6% की तेजी रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग 5.8% उछला, जबकि जापान का TOPIX करीब 1.1% मजबूत हुआ। हांगकांग का Hang Seng 1.2% और Shanghai Composite 0.7% चढ़ा।
ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी करीब 0.2% ऊपर रहा। वहीं, Nikkei 225 Futures में लगभग 1.1% की बढ़त दर्ज की गई।
अमेरिकी बाजार के संकेत भी सकारात्मक रहे। S&P 500 Futures में करीब 0.2% की तेजी रही। इससे भारतीय बाजार को शुरुआती कारोबार में सपोर्ट मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
बॉन्ड यील्ड में गिरावट क्यों है अहम?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट को शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। यील्ड कम होने पर कंपनियों और अर्थव्यवस्था के लिए उधारी की लागत पर दबाव कुछ कम हो सकता है। इससे निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत जोखिम वाली परिसंपत्तियों की तरफ बढ़ सकता है।
इसी वजह से हालिया बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में रिकवरी देखने को मिली है। हालांकि, भारतीय बाजार के लिए सिर्फ बॉन्ड यील्ड ही महत्वपूर्ण नहीं है। कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया से जुड़ी भू-राजनीतिक स्थिति भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
क्रूड ऑयल बना हुआ है सबसे बड़ा जोखिम
भारतीय बाजार के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमत अभी भी चिंता का विषय है। शुरुआती कारोबार में अक्टूबर डिलीवरी वाला Brent crude futures करीब 0.3% बढ़कर 91.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, WTI crude करीब 0.2% की बढ़त के साथ 84.53 डॉलर प्रति बैरल पर था।
अमेरिका-ईरान तनाव और Strait of Hormuz से जुड़ी शिपिंग अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनी हुई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकती हैं।
इसलिए GIFT Nifty में तेजी के बावजूद निवेशकों को क्रूड की चाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
FII खरीदारी से भी मिला सपोर्ट
बुधवार को घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs का रुख सकारात्मक रहा।
19 अगस्त को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 407 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र था जब विदेशी निवेशकों ने खरीदारी की।
अगर विदेशी निवेशकों की खरीदारी आगे भी जारी रहती है, तो यह बाजार में भरोसा लौटाने में मदद कर सकती है। हालांकि, केवल एक-दो सत्र की खरीदारी को ट्रेंड बदलने का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।
Nifty 50 के लिए 24,000 का स्तर अहम
LKP Securities के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा के मुताबिक, Nifty 50 को अपने बढ़ते चैनल के निचले बैंड के आसपास सपोर्ट मिला है। डेली टाइमफ्रेम पर इंडेक्स ने एक गैप भी भर दिया है।
उन्होंने बताया कि 61.80% Fibonacci retracement level भी इसी अहम सपोर्ट जोन के आसपास है, जहां इंडेक्स ने हालिया लो बनाया।
Nifty के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस
- तत्काल सपोर्ट: 24,000–24,050
- मुख्य सपोर्ट: 24,000
- 24,000 के ऊपर टिकाव: रिकवरी की संभावना
- 24,000 के नीचे लगातार कारोबार: कमजोरी बढ़ने का जोखिम
भुवा के अनुसार, अगर Nifty 24,000–24,050 के सपोर्ट जोन को बनाए रखता है तो इंडेक्स में अच्छी रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, 24,000 के नीचे लगातार कमजोरी बनी रहने पर बाजार में और गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है।
उन्होंने लॉन्ग पोजीशन रखने वाले निवेशकों को 24,000 के आसपास सख्त स्टॉप-लॉस बनाए रखने की सलाह दी है।
क्या GIFT Nifty की तेजी टिक पाएगी?
GIFT Nifty में करीब 0.58% की शुरुआती बढ़त भारतीय बाजार के लिए राहत का संकेत जरूर है, लेकिन इसे पूरे कारोबारी दिन की दिशा की गारंटी नहीं माना जा सकता।
बाजार की आगे की चाल मुख्य रूप से चार बातों पर निर्भर करेगी—अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, एशियाई बाजारों का प्रदर्शन, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों का रुख।
अगर बॉन्ड यील्ड में नरमी बनी रहती है, एशियाई बाजारों की तेजी कायम रहती है और क्रूड में अचानक उछाल नहीं आता, तो भारतीय बाजार में छह सत्रों की लगातार गिरावट के बाद तकनीकी रिकवरी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, 24,000 के नीचे कमजोरी और क्रूड में तेजी बाजार के लिए दोबारा दबाव बढ़ा सकती है।
निवेशकों के लिए निष्कर्ष: गुरुवार के शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं, लेकिन बाजार में तेजी की पुष्टि के लिए Nifty का 24,000 के ऊपर टिकना महत्वपूर्ण होगा। इसलिए केवल GIFT Nifty की शुरुआती तेजी देखकर आक्रामक पोजीशन लेने के बजाय सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर नजर रखना बेहतर होगा।
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