Asian Market Today: 20 अगस्त को एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली। अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लंबे समय वाले अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की बायबैक योजना बढ़ाने के संकेतों के बाद बॉन्ड यील्ड में नरमी आई। इससे शेयर बाजार के निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और एशिया के प्रमुख बाजारों में खरीदारी बढ़ी। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सबसे मजबूत बाजारों में रहा, जबकि जापान के निक्केई 225 और टोपिक्स में भी तेजी दर्ज की गई।
अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी और स्थिरता को लेकर उठाए गए कदमों का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दिया। अमेरिकी 10 साल और 30 साल की बॉन्ड यील्ड में नरमी आने से इक्विटी मार्केट को राहत मिली। ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण हाल के सत्रों में शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ था।
एशियाई बाजारों में जोरदार खरीदारी
गुरुवार के कारोबार में MSCI एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स करीब 0.8% ऊपर रहा। दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। इंट्राडे कारोबार के दौरान Kospi में करीब 3.86% की उछाल दर्ज की गई।
जापान का Nikkei 225 करीब 0.95% चढ़ा, जबकि Topix में 0.80% की बढ़त देखने को मिली। हांगकांग के बाजार के लिए भी सकारात्मक संकेत रहे और Hang Seng Futures में करीब 0.9% की तेजी के संकेत मिले।
एशियाई बाजारों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब निवेशक अमेरिकी ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। बॉन्ड यील्ड में नरमी से निवेशकों को शेयर बाजार में जोखिम लेने का कुछ अतिरिक्त भरोसा मिला।
बॉन्ड यील्ड में गिरावट से बाजार को राहत
हाल के दिनों में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में तेजी वैश्विक इक्विटी बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयरों की तुलना में फिक्स्ड इनकम एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं। इसका असर खासतौर पर हाई-वैल्यूएशन वाले टेक और ग्रोथ स्टॉक्स पर देखने को मिल सकता है।
लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लंबे समय वाले कर्ज की बायबैक गतिविधि बढ़ाने के संकेतों के बाद यील्ड में नरमी आई। इसका सकारात्मक असर अमेरिकी शेयर बाजार के साथ-साथ एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया।
10 साल और 30 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के कारण बाजार में हालिया बॉन्ड बिकवाली का दबाव कुछ कम हुआ। निवेशकों ने इसे शेयर बाजार के लिए राहत देने वाला संकेत माना।
वॉल स्ट्रीट में तीन दिन की गिरावट पर लगा ब्रेक
बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भी तेजी देखने को मिली। लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद S&P 500 में मजबूती आई। लंबे समय वाले अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड में गिरावट ने इस तेजी को सपोर्ट किया।
अमेरिकी बाजार बंद होने के बाद गुरुवार के शुरुआती संकेतों में S&P 500 Futures करीब 0.1% ऊपर रहे। वहीं Nasdaq-100 Futures में करीब 0.3% की बढ़त देखने को मिली। Dow Jones Industrial Average Futures भी लगभग 19 अंक या 0.04% ऊपर रहा।
इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की नजर अब बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी ट्रेजरी की नीतियों पर बनी हुई है। अगर यील्ड में नरमी का सिलसिला जारी रहता है, तो इससे इक्विटी मार्केट को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में मामूली बदलाव
एशियाई बाजारों में तेजी के बीच गुरुवार के शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतें ज्यादातर स्थिर रहीं। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और Strait of Hormuz से होने वाली शिपिंग पर बनी हुई है।
अक्टूबर डिलीवरी वाला Brent Crude Futures करीब 25 सेंट यानी 0.3% बढ़कर 91.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं सितंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी WTI Crude करीब 2 सेंट गिरकर 85.81 डॉलर प्रति बैरल रहा।
अधिक सक्रिय रूप से कारोबार होने वाला अक्टूबर WTI कॉन्ट्रैक्ट करीब 14 सेंट यानी 0.2% की तेजी के साथ 84.53 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा।
इससे पहले बुधवार को ब्रेंट और WTI दोनों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र तेजी देखने को मिली थी। दोनों क्रूड बेंचमार्क 24 जुलाई के बाद अपने ऊंचे स्तर के करीब बंद हुए। सितंबर WTI कॉन्ट्रैक्ट के एक्सपायर होने के कारण भी बाजार की नजर क्रूड फ्यूचर्स की गतिविधियों पर बनी हुई है।
अमेरिका-ईरान तनाव पर भी बाजार की नजर
वैश्विक बाजारों के लिए अमेरिका-ईरान संबंध भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की चेतावनी दी गई है।
ट्रंप ने सहयोगी देशों से ईरान के खिलाफ अमेरिकी रुख का समर्थन करने को कहा है। उन्होंने उन देशों के लिए गंभीर आर्थिक परिणामों की चेतावनी दी है जो ईरान से जुड़ी वित्तीय संस्थाओं, कंपनियों, एयरपोर्ट या सरकारी संस्थाओं को मदद की अनुमति देते हैं।
इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है। एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ सकती है, वहीं दूसरी तरफ तेल की सप्लाई और शिपिंग पर जोखिम बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां शिपिंग में किसी तरह का बड़ा व्यवधान आने पर तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आज सोने का भाव: दो महीने से ज्यादा के हाई के करीब
गुरुवार को सोने की कीमतें भी मजबूत बनी रहीं। अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लिक्विडिटी सपोर्ट से जुड़े कदमों के बाद बॉन्ड यील्ड और डॉलर में नरमी आई, जिसका फायदा सोने को मिला।
0031 GMT पर Spot Gold करीब 4,512.19 डॉलर प्रति औंस पर लगभग स्थिर था। इससे पहले कारोबार के दौरान सोना 4,525.79 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था। यह 2 जून के बाद सोने का सबसे ऊंचा स्तर था।
इससे एक दिन पहले यानी बुधवार को सोने की कीमत में 4% से ज्यादा की तेजी देखी गई थी। इतनी तेज बढ़त के बाद गुरुवार को कीमतों में स्थिरता के बावजूद सोना ऊंचे स्तरों के करीब बना हुआ है।
सोने को आमतौर पर भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के दौरान सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जाता है। जब बाजार में जोखिम बढ़ता है तो निवेशक अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा गोल्ड जैसे सेफ-हेवन एसेट में स्थानांतरित कर सकते हैं।
हालांकि, ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए चुनौती बन सकती हैं, क्योंकि सोने से नियमित ब्याज आय नहीं मिलती। इसलिए आगे सोने की दिशा पर अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक तनाव का असर महत्वपूर्ण रहेगा।
भारतीय शेयर बाजार के लिए क्या मायने?
एशियाई बाजारों की यह तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए भी शुरुआती तौर पर सकारात्मक संकेत दे सकती है। खासतौर पर अगर अमेरिकी बाजार में मजबूती बनी रहती है और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी जारी रहती है, तो विदेशी बाजारों का सेंटीमेंट भारतीय इक्विटी मार्केट को सपोर्ट कर सकता है।
हालांकि, भारतीय बाजार के लिए घरेलू संकेतक भी उतने ही महत्वपूर्ण रहेंगे। निवेशकों की नजर ग्लोबल मार्केट के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि, डॉलर-रुपया, कच्चे तेल की कीमत और घरेलू कंपनियों के नतीजों पर बनी रहेगी।
कच्चे तेल में तेजी भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, सोने में तेजी भारतीय कमोडिटी बाजार में भी निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकती है। ऐसे में गुरुवार के कारोबार में भारतीय निवेशकों की नजर एशियाई बाजारों के साथ-साथ बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की चाल पर भी रहेगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर 20 अगस्त को एशियाई शेयर बाजारों में तेजी का प्रमुख कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक गतिविधियों से जुड़ी खबरें रहीं। दक्षिण कोरिया का Kospi सबसे मजबूत बाजारों में रहा, जबकि जापान के Nikkei 225 और Topix में भी बढ़त देखने को मिली।
वहीं, अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंताएं कच्चे तेल के लिए जोखिम बनी हुई हैं। दूसरी ओर, बॉन्ड यील्ड और डॉलर में नरमी के कारण सोना दो महीने से अधिक के उच्च स्तर के करीब बना हुआ है।
आने वाले सत्रों में निवेशकों के लिए बॉन्ड यील्ड, डॉलर, क्रूड ऑयल, सोना और अमेरिका-ईरान तनाव प्रमुख ट्रिगर बने रह सकते हैं।
डिस्क्लेमर: NewsJagran.in पर प्रकाशित यह लेख उपलब्ध बाजार आंकड़ों और घटनाक्रमों की जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए विचार निवेश सलाह नहीं हैं। शेयर बाजार और कमोडिटी में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


