Mohan Bhagwat New York Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से पहले विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से RSS के कुछ सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की अपील की है। संस्था ने यह भी कहा है कि RSS नेताओं को उच्च-स्तरीय बैठकों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें राजनयिक शिष्टाचार भी नहीं दिया जाना चाहिए।
Mohan Bhagwat New York Visit: RSS प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचने की प्रस्तावित यात्रा से पहले अमेरिका में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई है। भागवत न्यूयॉर्क में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स’ कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (AHEAD) की ओर से किया जा रहा है।
USCIRF ने RSS नेताओं को लेकर क्या कहा?
Chair @DrMahmood40: “India’s PM Modi is a member of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS), an Indian umbrella organization whose sub-groups have perpetrated attacks on religious minorities, incl. Christians & Muslims. Now the RSS leader, Mohan Bhagwat, plans to visit the U.S."
— USCIRF (@USCIRF) August 19, 2026 धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर अमेरिकी सरकार को सलाह देने वाली संस्था USCIRF के अधिकारियों ने RSS को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। संस्था की ओर से कहा गया कि अगर RSS के किसी सदस्य को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो अमेरिकी सरकार को उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए।
USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि RSS नेताओं को उच्च-स्तरीय बैठकों या राजनयिक शिष्टाचार का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी संगठन से जुड़े व्यक्ति को सिर्फ इसलिए विशेष राजनयिक व्यवहार नहीं मिलना चाहिए क्योंकि उसका भारत सरकार से संबंध है।
USCIRF ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस मुद्दे को उठाया। पोस्ट में RSS और उसके सहयोगी संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के आरोपों का उल्लेख किया गया। संस्था ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के RSS से जुड़े होने का भी जिक्र किया।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि USCIRF एक अमेरिकी संघीय सलाहकार संस्था है। उसके बयान या सिफारिशें अपने आप में अमेरिकी सरकार की ओर से लगाए गए प्रतिबंध का आदेश नहीं होतीं। किसी व्यक्ति या संगठन पर वास्तविक प्रतिबंध लगाने के लिए अमेरिकी सरकार की संबंधित प्रक्रियाओं और अधिकारियों का निर्णय जरूरी होता है।
मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा क्यों चर्चा में है?
मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा ऐसे समय में होने वाली है जब भारत और अमेरिका के बीच कई महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर बातचीत जारी है। उनकी न्यूयॉर्क यात्रा धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़ी बताई जा रही है।
भागवत ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू आध्यात्मिक विचारों और एकता से जुड़े संदेशों को सामने रखना बताया गया है। लेकिन यात्रा की घोषणा के बाद कुछ अमेरिकी संगठनों ने RSS की विचारधारा और उससे जुड़े विवादों को लेकर सवाल उठाए हैं।
यही वजह है कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित चर्चा नहीं रह गई है। अमेरिका में कुछ समूह इसे भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं।
RSS पर क्या हैं आरोप?
USCIRF और कुछ अमेरिकी advocacy groups का आरोप है कि RSS से जुड़े या उसके सहयोगी संगठनों पर भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव से जुड़े आरोप लगे हैं। संस्था ने विशेष रूप से ईसाई और मुस्लिम समुदायों के खिलाफ कथित घटनाओं का उल्लेख किया है।
हालांकि, RSS इन आरोपों और इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आकलनों को खारिज करता रहा है। संगठन का कहना है कि उसकी गतिविधियां राष्ट्र, समाज और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी हैं और उस पर लगाए जाने वाले कई आरोप राजनीतिक या वैचारिक नजरिए से प्रेरित होते हैं।
इस पूरे विवाद में आरोप और आधिकारिक तौर पर सिद्ध तथ्य के बीच अंतर करना भी महत्वपूर्ण है। USCIRF ने अपनी टिप्पणियों में जिन आरोपों का उल्लेख किया है, वे अमेरिकी संस्था के आकलन और रिपोर्टों का हिस्सा हैं। इन्हें किसी अमेरिकी अदालत द्वारा RSS के खिलाफ दिए गए फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने भी जताई आपत्ति
मोहन भागवत की यात्रा को लेकर केवल USCIRF ने ही सवाल नहीं उठाए हैं। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका स्थित advocacy group ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने भी भागवत के दौरे की आलोचना की है।
संगठन का कहना है कि भागवत की यात्रा को RSS नेटवर्क से जुड़े मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा के आरोपों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। संगठन ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘एकता का जश्न’ धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति को छिपा नहीं सकता।
इस बयान के बाद यह विवाद और बढ़ गया है कि अमेरिका में भारतीय हिंदू संगठनों और RSS को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए। एक तरफ समर्थक RSS को भारतीय संस्कृति और सामाजिक संगठन से जोड़ते हैं, वहीं आलोचक संगठन और उससे जुड़े समूहों की गतिविधियों को धार्मिक स्वतंत्रता के सवाल से जोड़ते हैं।
मार्च की USCIRF रिपोर्ट का भी किया गया जिक्र
ताजा विवाद का संबंध USCIRF की मार्च में जारी सालाना रिपोर्ट से भी जोड़ा जा रहा है। इस रिपोर्ट में आयोग ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी।
रिपोर्ट में भारत की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी परिस्थितियों की आलोचना की गई थी। इसके अलावा आयोग ने कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ लक्षित प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया था। इसमें RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का भी उल्लेख किया गया था।
USCIRF की रिपोर्ट को लेकर भारत सरकार पहले ही कड़ी प्रतिक्रिया दे चुकी है। नई दिल्ली ने आयोग की टिप्पणियों और निष्कर्षों को खारिज करते हुए उस पर भारत की स्थिति की गलत और चुनिंदा तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया था।
भारत की ओर से यह भी कहा गया है कि USCIRF की रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए स्रोत और उसके निष्कर्ष विश्वसनीय नहीं हैं। भारत लंबे समय से USCIRF की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण और भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के नजरिए से देखता रहा है।
क्या RSS नेताओं पर तुरंत लग जाएगा बैन?
USCIRF की ओर से प्रतिबंध लगाने की मांग किए जाने का मतलब यह नहीं है कि RSS नेताओं पर तत्काल अमेरिकी प्रतिबंध लागू हो गया है। USCIRF मुख्य रूप से एक सलाहकार संस्था है, जो अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर सिफारिशें देती है।
इसलिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस अपील पर कोई कार्रवाई करता है या नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, USCIRF की ओर से अमेरिकी सरकार से RSS के उन सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करने को कहा गया है, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाया जाए।
भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ेगा असर?
मोहन भागवत की यात्रा को लेकर पैदा हुआ यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के रिश्ते कई स्तरों पर महत्वपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं।
ऐसे में किसी प्रमुख भारतीय संगठन के नेता की अमेरिका यात्रा को लेकर अमेरिकी संस्था की ओर से प्रतिबंध की मांग राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन सकती है। हालांकि, इसका भारत-अमेरिका के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर कितना असर पड़ेगा, यह अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया और आगे होने वाली घटनाओं पर निर्भर करेगा।
फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि 29 अगस्त की प्रस्तावित न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान मोहन भागवत का कार्यक्रम किस तरह आगे बढ़ता है और क्या अमेरिकी प्रशासन या अन्य आधिकारिक संस्थाएं इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया देती हैं।
विवाद का केंद्र क्या है?
पूरे मामले में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं। पहली, USCIRF ने RSS के कुछ सदस्यों पर संभावित प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की अपील की है। दूसरी, संस्था ने RSS नेताओं को उच्च-स्तरीय बैठकों और राजनयिक शिष्टाचार से दूर रखने की बात कही है। तीसरी, भारत पहले ही USCIRF की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट को खारिज कर चुका है।
इसलिए मोहन भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा से पहले उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है। एक ओर USCIRF और कुछ अमेरिकी advocacy groups RSS को लेकर गंभीर आरोप उठा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर भारत इन आकलनों को खारिज करता रहा है। अब सबकी नजर अमेरिकी सरकार की संभावित प्रतिक्रिया और भागवत की प्रस्तावित यात्रा पर रहेगी।


