बारिश का मौसम शुरू होते ही रात के समय चारों तरफ मेंढकों की ‘टर्र-टर्र’ सुनाई देने लगती है। कई बार आवाज इतनी तेज और दूर तक सुनाई देती है कि लगता है जैसे मेंढक बिल्कुल पास में ही मौजूद हैं। लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में मेंढकों की आवाज काफी दूर से भी सुनाई दे सकती है।
दरअसल, बारिश का मौसम मेंढकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पानी जमा होने से उनके लिए भोजन, गतिविधियों और प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं। यही वजह है कि मानसून में मेंढक सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं और बार-बार आवाज निकालते हैं।
साथी को आकर्षित करने के लिए करते हैं टर्र-टर्र
मेंढकों के टर्राने की सबसे प्रमुख वजह प्रजनन से जुड़ी होती है। नर मेंढक अपनी आवाज के जरिए मादा को आकर्षित करते हैं। उनकी आवाज दूसरे मेंढकों को उनकी मौजूदगी और स्थान का संकेत भी देती है।
बारिश के बाद तालाबों, छोटे गड्ढों और पानी जमा होने वाली जगहों पर प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बन जाता है। ऐसे स्थानों के आसपास बड़ी संख्या में मेंढक इकट्ठा हो सकते हैं। इसी दौरान उनकी आवाजें भी ज्यादा सुनाई देती हैं।
मध्य प्रदेश के सागर के जूलॉजी विभाग के एक्सपर्ट डॉ. मनीष जैन के अनुसार, बारिश के मौसम में पानी उपलब्ध होने से मेंढकों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। उन्हें भोजन, घूमने और प्रजनन के लिए बेहतर वातावरण मिलता है। यही कारण है कि मानसून में उनकी आवाज बार-बार सुनाई देती है।
सिर्फ प्रजनन के लिए नहीं निकालते आवाज
मेंढकों की आवाज का इस्तेमाल केवल साथी को आकर्षित करने के लिए नहीं होता। अलग-अलग परिस्थितियों में उनकी आवाज दूसरे संकेत देने का माध्यम भी हो सकती है। कुछ आवाजें दूसरे मेंढकों को आसपास के खतरे के प्रति सतर्क करने में मदद कर सकती हैं।
इसके अलावा, नर मेंढकों के बीच आवाज के जरिए प्रतिस्पर्धा भी देखी जाती है। कई बार तेज या लगातार आवाज निकालना दूसरे नर मेंढकों के साथ क्षेत्र और साथी को लेकर प्रतिस्पर्धा का हिस्सा होता है।
बारिश में आवाज ज्यादा साफ क्यों सुनाई देती है?
मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है और आसपास का माहौल भी बदल जाता है। पानी से भरे तालाब, खेत और गड्ढे मेंढकों के लिए पसंदीदा जगह बन जाते हैं। रात के समय जब आसपास ट्रैफिक और इंसानी गतिविधियों का शोर कम होता है, तब उनकी आवाज और ज्यादा स्पष्ट सुनाई दे सकती है।
इसी वजह से कई बार ऐसा लगता है कि मेंढक घर के बिल्कुल पास टर्रा रहे हैं, जबकि उनकी वास्तविक स्थिति कुछ दूरी पर हो सकती है।
क्या मेंढक की आवाज 1 किलोमीटर दूर तक सुनाई दे सकती है?
कुछ परिस्थितियों में मेंढकों की आवाज करीब 1 किलोमीटर तक सुनाई देने की बात सामने आती है। हालांकि, यह दूरी हर मेंढक के लिए समान नहीं होती। आवाज कितनी दूर तक पहुंचेगी, यह उसकी प्रजाति, आवाज की तीव्रता, आसपास के वातावरण, हवा और शोर के स्तर जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर मेंढक की आवाज हमेशा 1 किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है। कुछ प्रजातियों और अनुकूल परिस्थितियों में आवाज काफी दूर तक पहुंच सकती है।
आखिरी बारिश में ज्यादा क्यों सुनाई देते हैं मेंढक?
बारिश के आखिरी दौर में भी कई इलाकों में पानी पर्याप्त मात्रा में जमा रहता है। ऐसे समय में मेंढकों के लिए प्रजनन और सक्रिय रहने की परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं। पानी के आसपास उनकी संख्या और गतिविधि बढ़ने पर सामूहिक रूप से टर्राने की आवाज भी काफी ज्यादा सुनाई देती है।
यानी बारिश के बाद सुनाई देने वाली लगातार ‘टर्र-टर्र’ केवल शोर नहीं है। यह मेंढकों के आपसी संपर्क, प्रजनन और आसपास के वातावरण के साथ उनके व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसून में उनकी बढ़ी हुई आवाज इस बात का संकेत भी है कि पानी और नमी ने उनके लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर दी हैं।


