नई दिल्ली: पनीर भारतीय खानपान का बेहद लोकप्रिय हिस्सा है। घर से लेकर रेस्टोरेंट और ढाबों तक, पनीर से बनी कई तरह की डिशेज पसंद की जाती हैं। लेकिन इन दिनों बाजार में मिलने वाले पनीर की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर एनालॉग पनीर को लेकर चर्चा तेज है। महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों में इसे लेकर सख्ती की गई है, वहीं दिल्ली में भी पनीर के सैंपल की जांच की जा रही है।
चिंता की एक बड़ी वजह पनीर की कीमतों में दिखाई देने वाला अंतर है। सूत्रों के मुताबिक, दूध से करीब एक किलो पनीर तैयार करने में लगभग 420 रुपये तक की लागत आ सकती है। इसके बावजूद होटल और ढाबों में बल्क सप्लाई के लिए करीब 200 रुपये प्रति किलो के आसपास पनीर उपलब्ध होने की बात सामने आई है। बाजार में खुले तौर पर मिलने वाले पनीर की कीमत भी करीब 360 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी कम कीमत पर मिलने वाला पनीर किस तरह तैयार किया जा रहा है।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एनालॉग पनीर और सामान्य दूध से बने पनीर में अंतर क्या है।
सामान्य पनीर दूध को फाड़कर तैयार किया जाता है। इसमें दूध से मिलने वाला प्रोटीन, फैट, कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसकी बनावट, स्वाद और पोषण भी दूध आधारित पनीर के अनुरूप होता है।
इसके विपरीत, एनालॉग पनीर में दूध की जगह या दूध के प्रमुख घटकों के स्थान पर वनस्पति आधारित फैट, वेजिटेबल प्रोटीन और स्टार्च जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य पनीर जैसी बनावट और रूप तैयार करना होता है, जबकि उत्पादन लागत सामान्य दूध से बने पनीर की तुलना में कम हो सकती है।
गंगाराम अस्पताल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. अनिल अरोड़ा के मुताबिक, सामान्य पनीर में दूध का प्रोटीन, फैट और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जबकि एनालॉग पनीर में वेजिटेबल प्रोटीन और स्टार्च का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए दोनों की पोषण गुणवत्ता एक जैसी नहीं होती।
सस्ता पनीर देखकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
पनीर की कीमत और उसकी उत्पादन लागत के बीच बड़ा अंतर होने पर गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। हालांकि, सिर्फ कम कीमत देखकर किसी पनीर को नकली या एनालॉग घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी पुष्टि के लिए खाद्य सुरक्षा मानकों के मुताबिक जांच जरूरी है।
होटल, ढाबे और बड़े फूड कारोबार में पनीर की खपत काफी अधिक होती है। ऐसे में वहां बल्क में कम कीमत पर उपलब्ध होने वाला उत्पाद खास तौर पर जांच के दायरे में आ सकता है।
खुले में बिकने वाले पनीर के मामले में एक दूसरी समस्या ट्रेसबिलिटी की भी है। अगर उत्पाद पैकेट में नहीं है या उस पर निर्माता, बैच और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि पनीर कहां तैयार हुआ और उसकी सप्लाई चेन क्या है।
यही वजह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए खुले पनीर की नियमित और बड़े स्तर पर सैंपलिंग महत्वपूर्ण हो जाती है।
दिल्ली में पनीर की जांच क्यों बढ़ी?
दिल्ली में भी पनीर की गुणवत्ता की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, ब्रांडेड कंपनियों के उत्पादों को भी जांच से बाहर नहीं रखा गया है। हालांकि, पैकेज्ड और ब्रांडेड उत्पादों में निर्माता और सप्लाई की जानकारी उपलब्ध होने के कारण किसी गड़बड़ी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना अपेक्षाकृत आसान होता है।
वहीं खुले पनीर में यह पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि उत्पाद किसने बनाया और कहां से आया। इसलिए खुले पनीर की जांच के लिए बड़े स्तर पर सैंपलिंग और सप्लाई चेन की निगरानी जरूरी है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में दिल्ली में 2,624 सैंपल की जांच की गई थी, जिनमें 130 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। वहीं 2025-26 में 1,684 सैंपल की जांच हुई और इनमें 109 सैंपल फेल पाए गए। इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि सैंपल की संख्या में कमी आई है, जबकि फेल होने वाले सैंपल की संख्या में अपेक्षाकृत बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई।
एनालॉग पनीर पर बैन की चर्चा क्यों हुई?
एनालॉग पनीर को लेकर देश में खाद्य सुरक्षा के स्तर पर भी चर्चा हुई है। सूत्रों के अनुसार, सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी, जिसमें विभिन्न राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्त भी शामिल होते हैं।
हालांकि, किसी उत्पाद पर प्रतिबंध और उसके इस्तेमाल या बिक्री की वैधानिक स्थिति राज्य और लागू खाद्य सुरक्षा नियमों पर निर्भर कर सकती है। इसलिए उपभोक्ताओं को सोशल मीडिया या बाजार में चल रही किसी भी अफवाह के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
थाली में परोसा गया पनीर असली है या नहीं, कैसे पता चलेगा?
यही सबसे बड़ा सवाल है। अगर आप किसी रेस्टोरेंट में पनीर की सब्जी ऑर्डर करते हैं, तो सिर्फ देखकर यह तय करना मुश्किल है कि उसमें इस्तेमाल किया गया पनीर दूध से बना है या किसी दूसरे बेस से तैयार किया गया है।
पनीर का रंग, आकार या ग्रेवी में उसकी मौजूदगी देखकर आम ग्राहक इसकी वास्तविक संरचना की पुष्टि नहीं कर सकता। इसके लिए लैब टेस्ट की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए अगर किसी रेस्टोरेंट या ढाबे में बेहद कम कीमत पर पनीर की बड़ी मात्रा में डिश उपलब्ध है, तो केवल कीमत को आधार बनाकर उसे नकली कहना सही नहीं होगा। लेकिन गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर उपभोक्ता संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत कर सकता है।
घर पर पनीर की शुरुआती जांच कैसे करें?
एम्स की डायटिशियन अंजली भोला ने पैकेट बंद पनीर खरीदते समय Ingredients और Nutrition Information पढ़ने की सलाह दी है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उत्पाद में किन-किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है।
एक घरेलू तरीका स्टार्च की मौजूदगी का शुरुआती संकेत पाने के लिए बताया जाता है। इसके लिए पनीर के छोटे टुकड़े को उबालकर कुछ मिनट ठंडा किया जाता है और फिर उस पर आयोडीन की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। यदि पनीर का रंग नीला या काला पड़ता है, तो यह उसमें स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।
लेकिन इस टेस्ट को अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। रंग बदलने से केवल स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है। इससे यह निश्चित नहीं होता कि पनीर एनालॉग है, नकली है या खाने के लिए असुरक्षित है। अंतिम पुष्टि के लिए मान्यता प्राप्त लैब में जांच जरूरी होती है।
असली पनीर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
पनीर खरीदते समय कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है।
1. पैकेट बंद और भरोसेमंद उत्पाद चुनें
संभव हो तो ऐसे पनीर को प्राथमिकता दें जिस पर निर्माता का नाम, पैकेजिंग की जानकारी, बैच नंबर, निर्माण और उपयोग की तारीख तथा अन्य जरूरी विवरण साफ-साफ लिखे हों।
2. Ingredients जरूर पढ़ें
पैकेट के पीछे दिए गए Ingredients को पढ़ें। अगर उत्पाद में दूध के बजाय अलग-अलग वनस्पति आधारित सामग्री, स्टार्च या अन्य विकल्पों का इस्तेमाल किया गया है, तो उसे सामान्य मिल्क पनीर समझकर न खरीदें।
3. Nutrition Information देखें
प्रोटीन, फैट और अन्य पोषक तत्वों की जानकारी देखकर उत्पाद की तुलना की जा सकती है। हालांकि, केवल न्यूट्रिशन लेबल देखकर भी किसी उत्पाद को नकली घोषित नहीं किया जा सकता।
4. बहुत कम कीमत से सावधान रहें
अगर कोई उत्पाद बाजार की सामान्य कीमत की तुलना में असामान्य रूप से सस्ता है, तो खरीदने से पहले उसकी पैकेजिंग और सामग्री की जानकारी जरूर जांचें। सिर्फ सस्ता होना मिलावट का सबूत नहीं है, लेकिन यह अतिरिक्त सावधानी बरतने का कारण जरूर हो सकता है।
5. खुले पनीर में स्वच्छता पर भी ध्यान दें
खुले पनीर के मामले में केवल मिलावट ही नहीं, बल्कि उसके रखरखाव, तापमान और स्वच्छता का भी महत्व है। लंबे समय तक खुले में रखा पनीर खराब हो सकता है और उससे खाद्य जनित बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
क्या एनालॉग पनीर हमेशा खतरनाक होता है?
यह समझना भी जरूरी है कि एनालॉग उत्पाद और मिलावटी उत्पाद एक ही चीज नहीं हैं। किसी उत्पाद में दूध के स्थान पर दूसरे खाद्य घटकों का इस्तेमाल किया गया है, तो उसकी कानूनी स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि उसे किस नाम से बेचा जा रहा है और वह संबंधित खाद्य मानकों का पालन करता है या नहीं।
सबसे बड़ी समस्या तब होती है जब किसी वैकल्पिक या एनालॉग उत्पाद को उपभोक्ता के सामने सामान्य दूध से बने पनीर के रूप में पेश किया जाए या उसकी सामग्री के बारे में सही जानकारी न दी जाए।
इसलिए उपभोक्ता के लिए सबसे जरूरी बात है लेबल पढ़ना, भरोसेमंद स्रोत से खरीदना और संदिग्ध स्थिति में शिकायत करना।
उपभोक्ता क्या कर सकता है?
अगर किसी व्यक्ति को पनीर की गुणवत्ता पर संदेह है, तो वह खाद्य सुरक्षा विभाग के पास शिकायत कर सकता है। रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले पनीर को लेकर संदेह होने पर बिल संभालकर रखना भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इससे संबंधित प्रतिष्ठान और खरीद की जानकारी मिल सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घर पर किए जाने वाले किसी भी टेस्ट को लैब जांच का विकल्प न समझें। आयोडीन टेस्ट जैसी प्रक्रिया केवल स्टार्च की संभावित मौजूदगी का संकेत दे सकती है। किसी उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता, पोषण संरचना और खाद्य सुरक्षा की पुष्टि वैज्ञानिक जांच से ही की जा सकती है।
निष्कर्ष
पनीर की कीमतों में बड़ा अंतर और एनालॉग पनीर को लेकर चल रही जांच ने उपभोक्ताओं की चिंता जरूर बढ़ा दी है। लेकिन हर सस्ता या खुला पनीर नकली है, ऐसा मानना सही नहीं होगा। असली सवाल यह है कि उत्पाद किस सामग्री से बना है और उसे उपभोक्ता के सामने किस नाम से बेचा जा रहा है।
अगर आप बाजार से पनीर खरीद रहे हैं तो पैकेट पर लिखे Ingredients, Nutrition Information और निर्माता की जानकारी जरूर पढ़ें। वहीं रेस्टोरेंट में परोसे गए पनीर की गुणवत्ता केवल देखकर तय नहीं की जा सकती। किसी तरह का संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच ही सबसे भरोसेमंद रास्ता है।


