Yes Bank Dollar Bond: कभी संकट में फंसे और सरकारी दखल का सामना कर चुके Yes Bank ने अब अपनी स्थिति में सुधार के बाद बॉन्ड मार्केट में वापसी की तैयारी शुरू कर दी है। बैंक 2020 में Additional Tier 1 (AT1) बॉन्ड को राइट ऑफ करने के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार से पूंजी जुटाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए बैंक ने डॉलर में बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया में अरेंजर्स नियुक्त किए हैं। प्रस्तावित बॉन्ड तीन साल की अवधि वाला अमेरिकी डॉलर नोट हो सकता है।
यह कदम बैंक के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि साल 2020 में Yes Bank देश के सबसे बड़े बैंकिंग संकटों में से एक से गुजरा था। उस समय बैंक की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठे थे और भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक को अपने नियंत्रण में लेते हुए पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की थी। अब करीब छह साल बाद बैंक की तस्वीर काफी बदली हुई नजर आ रही है।
2020 के संकट के बाद पहली बार बड़ा कदम
Yes Bank मार्च 2020 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब बैंक ने अपने AT1 डेट इंस्ट्रूमेंट्स को स्थायी रूप से राइट ऑफ कर दिया था। AT1 बॉन्ड बैंक के पूंजी ढांचे का हिस्सा होते हैं और इनमें कुछ ऐसी शर्तें होती हैं, जिनके तहत गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति में इन्हें राइट ऑफ किया जा सकता है।
उस समय बैंक की वित्तीय स्थिति काफी कमजोर हो चुकी थी। इसके बाद RBI ने बैंक के बोर्ड को भंग कर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की। भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को स्थिर रखने के लिए State Bank of India (SBI) के नेतृत्व में एक कंसोर्टियम ने बैंक को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उस दौर में Yes Bank के लिए पूंजी जुटाना और निवेशकों का भरोसा वापस हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में बैंक ने अपनी बैलेंस शीट, कमाई और क्रेडिट प्रोफाइल को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।
अब डॉलर में बॉन्ड जारी करने की तैयारी
Yes Bank अब अंतरराष्ट्रीय बाजार से अमेरिकी डॉलर में फंड जुटाने की तैयारी कर रहा है। बैंक ने इस प्रस्तावित बॉन्ड इश्यू के लिए अरेंजर्स नियुक्त किए हैं।
योजना के तहत बैंक बेंचमार्क-साइज का तीन साल का अमेरिकी डॉलर बॉन्ड जारी कर सकता है। हालांकि, अंतिम राशि और कीमत बाजार की परिस्थितियों तथा निवेशकों की मांग के आधार पर तय होगी।
डॉलर बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाने से बैंक को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही यह बैंक की अंतरराष्ट्रीय फंडिंग क्षमता और निवेशकों के भरोसे के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।
Yes Bank की क्रेडिट रेटिंग में भी हुआ सुधार
बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार का असर उसकी क्रेडिट रेटिंग पर भी दिखाई दिया है। CRISIL Ratings ने अगस्त में Yes Bank के रुपये वाले इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड और Basel III के अनुरूप Tier 2 डेट की रेटिंग को AA- से बढ़ाकर AA+ कर दिया।
रेटिंग एजेंसी ने बैंक की कमाई की स्थिति में लगातार हो रहे सुधार को रेटिंग अपग्रेड के प्रमुख कारणों में शामिल किया है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ साल पहले बैंक के इन बॉन्ड की रेटिंग काफी नीचे थी। 2023 की शुरुआत में इन इंस्ट्रूमेंट्स की रेटिंग A- के स्तर पर थी। यानी कुछ ही वर्षों में बैंक के क्रेडिट प्रोफाइल में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
हालांकि, प्रस्तावित डॉलर बॉन्ड की अंतरराष्ट्रीय रेटिंग अलग है। Moody’s ने Yes Bank के डॉलर बॉन्ड को Ba1, जबकि S&P Global Ratings ने BB+ रेटिंग दी है। ये दोनों रेटिंग निवेश-ग्रेड श्रेणी से एक पायदान नीचे हैं।
Sumitomo Mitsui की एंट्री से बदली तस्वीर
Yes Bank की कहानी में एक और बड़ा बदलाव जापान के Sumitomo Mitsui Financial Group (SMFG) की एंट्री रही है।
SMFG की बैंकिंग यूनिट ने 2025 में Yes Bank में करीब 25% हिस्सेदारी खरीदी थी और बैंक की सबसे बड़ी शेयरधारक बन गई। किसी बड़े वैश्विक बैंकिंग समूह की इस तरह की हिस्सेदारी को Yes Bank के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया।
विदेशी बैंकिंग समूह की हिस्सेदारी से बैंक को न सिर्फ पूंजी और रणनीतिक सहयोग मिला, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच उसकी विश्वसनीयता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
यही वजह है कि 2020 के संकट से गुजर चुके Yes Bank का अब अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में लौटना केवल फंड जुटाने की कवायद नहीं है, बल्कि बैंक की बदली हुई वित्तीय स्थिति का भी संकेत माना जा रहा है।
भारतीय बैंकों में बढ़ रही डॉलर बॉन्ड की मांग
Yes Bank का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैंक अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले दो महीनों में भारतीय बैंकों ने करीब 5.27 अरब डॉलर जुटाए हैं।
इस बढ़ती गतिविधि के पीछे कई कारण हैं। बैंकों को अपने कारोबार के विस्तार के लिए पूंजी की जरूरत है और अंतरराष्ट्रीय बाजार से डॉलर में फंडिंग हासिल करना उनके लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन गया है।
इसके अलावा भारत में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने और रुपये को सपोर्ट देने के लिए उठाए गए कदमों ने भी विदेशी मुद्रा फंडिंग के माहौल को प्रभावित किया है।
RBI के कदमों से बढ़ा विदेशी पूंजी प्रवाह
भारतीय रिजर्व बैंक ने जून में रुपये को मजबूती देने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के उद्देश्य से विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए थे।
इनमें प्रवासी भारतीयों यानी NRI deposits के जरिए विदेशी मुद्रा आकर्षित करना भी शामिल था। भारत के करीब 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीयों से पूंजी आकर्षित करने की कोशिशों का असर विदेशी मुद्रा प्रवाह पर पड़ा।
जून के बाद से भारत को प्रवासी भारतीयों से 50 अरब डॉलर से अधिक की रकम मिलने की बात सामने आई है। विदेशी मुद्रा जमा में आई तेजी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि RBI को विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए शुरू की गई विशेष विंडो को निर्धारित समय से करीब एक महीने पहले ही बंद करना पड़ा।
इससे भारतीय बैंकिंग सिस्टम में डॉलर की उपलब्धता और विदेशी मुद्रा फंडिंग को लेकर गतिविधियां बढ़ी हैं।
संकटग्रस्त बैंक से मजबूत बैंक बनने तक का सफर
Yes Bank के लिए यह बदलाव एक लंबी रिकवरी का हिस्सा है। 2020 में बैंक का नाम वित्तीय संकट, AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ और RBI के हस्तक्षेप के साथ जुड़ा था। उस समय निवेशकों और ग्राहकों के बीच बैंक को लेकर भरोसा कमजोर हुआ था।
लेकिन पुनर्गठन के बाद बैंक ने धीरे-धीरे अपनी स्थिति सुधारने पर ध्यान दिया। पूंजी आधार को मजबूत करना, जोखिम प्रबंधन में सुधार, एसेट क्वालिटी पर फोकस और रणनीतिक निवेशक को जोड़ना इस बदलाव का हिस्सा रहा।
अब अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में वापसी बैंक के लिए एक तरह से नई शुरुआत का संकेत है। हालांकि, बॉन्ड जारी होने की अंतिम शर्तें, राशि और कीमत बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
Yes Bank की बॉन्ड मार्केट में वापसी बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार का सकारात्मक संकेत हो सकती है। खासतौर पर घरेलू डेट इंस्ट्रूमेंट्स की रेटिंग में AA- से AA+ तक का अपग्रेड बैंक की क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार को दर्शाता है।
लेकिन निवेशकों को यह भी समझना जरूरी है कि क्रेडिट रेटिंग में सुधार का मतलब जोखिम पूरी तरह खत्म होना नहीं है। प्रस्तावित डॉलर बॉन्ड की Moody’s और S&P की रेटिंग अभी निवेश-ग्रेड से नीचे है। इसलिए ऐसे बॉन्ड में निवेश करने से पहले उसकी कूपन दर, मुद्रा जोखिम, बैंक की वित्तीय स्थिति, बॉन्ड की शर्तें और संबंधित रेटिंग को ध्यान से देखना जरूरी होगा।
खासकर डॉलर में जारी बॉन्ड के मामले में भारतीय निवेशकों के लिए विदेशी मुद्रा यानी रुपये और डॉलर के बीच होने वाला उतार-चढ़ाव भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
2020 की कड़वी यादों से आगे बढ़ने की कोशिश
Yes Bank की कहानी भारतीय बैंकिंग सेक्टर में किसी बड़े संकट के बाद होने वाले बदलाव का उदाहरण भी है। 2020 में जिस बैंक को बचाने के लिए नियामकीय हस्तक्षेप और बड़े बैंकों के सहयोग की जरूरत पड़ी थी, वही बैंक अब अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में अपनी वापसी की तैयारी कर रहा है।
SMFG की करीब 25% हिस्सेदारी, घरेलू बॉन्ड की रेटिंग में सुधार और कमाई की स्थिति में बेहतर प्रदर्शन ने बैंक की स्थिति को पहले की तुलना में मजबूत किया है।
अब तीन साल के डॉलर बॉन्ड के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूंजी जुटाने की तैयारी Yes Bank के लिए अगला बड़ा कदम है। यदि यह इश्यू सफल रहता है, तो इससे बैंक को फंडिंग का एक अतिरिक्त स्रोत मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच उसकी पहुंच भी मजबूत हो सकती है।
हालांकि, बैंक के लिए असली चुनौती केवल पूंजी जुटाना नहीं बल्कि लंबे समय तक मजबूत एसेट क्वालिटी, स्थिर मुनाफा और बेहतर जोखिम प्रबंधन बनाए रखना होगी। 2020 के संकट के बाद Yes Bank ने लंबा सफर तय किया है और प्रस्तावित डॉलर बॉन्ड इश्यू इस बदलाव की अगली महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।


