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Raamdeo Agrawal Expectations: ‘मेरा निवेश फेल या नहीं, 10 साल बाद तय होगा’, रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से 15% रिटर्न की उम्मीद

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/17 at 7:22 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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12 Min Read
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Raamdeo Agrawal Expectations: दिग्गज निवेशक और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल भारतीय शेयर बाजार को लेकर लंबे समय में काफी आशावादी हैं। उनका मानना है कि अगले पांच वर्षों में भारतीय शेयर बाजार से सालाना करीब 15 फीसदी रिटर्न मिल सकता है। मजबूत आर्थिक विकास, कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली में संभावित कमी को वह बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानते हैं।

Contents
अगले 5 साल में 15% सालाना रिटर्न की उम्मीदशॉर्ट टर्म में बाजार रह सकता है दायरे मेंFII की बिकवाली कम होना भारत के लिए अच्छी खबरविदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल गेन्स टैक्स क्यों चिंता का विषय?नई पीढ़ी की कंपनियों को IPO से पहले क्या करना चाहिए?Zepto के निवेश पर बोले- फैसला अभी नहीं होगा‘मेरा निवेश फेल रहा या नहीं, यह 10 साल बाद तय होगा’निवेशकों के लिए क्या है रामदेव अग्रवाल का संदेश?

अग्रवाल ने द इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के आउटलुक पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अगले कुछ वर्षों में करीब 7.5-8.5 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। वहीं, कॉरपोरेट प्रॉफिट में लगभग 13-14 फीसदी की वृद्धि देखने को मिल सकती है। इसका असर शेयर बाजार के इंडेक्स रिटर्न पर भी पड़ सकता है।

अगले 5 साल में 15% सालाना रिटर्न की उम्मीद

रामदेव अग्रवाल के मुताबिक, भारतीय शेयरों में अगले पांच साल के दौरान सालाना करीब 15 फीसदी रिटर्न मिलना सबसे संभावित स्थिति हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो निवेशक का पोर्टफोलियो लगभग पांच साल में दोगुना हो सकता है।

यह अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ और कंपनियों की कमाई में संभावित तेजी पर आधारित है। उनका मानना है कि जब आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है और कंपनियों की आय लगातार बढ़ती है, तो लंबे समय में शेयर बाजार को उसका फायदा मिल सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार हर साल 15 फीसदी ही बढ़ेगा। शेयर बाजार में साल-दर-साल काफी उतार-चढ़ाव हो सकता है। किसी साल रिटर्न बहुत अधिक हो सकता है तो किसी साल बाजार गिर भी सकता है। अग्रवाल का अनुमान मुख्य रूप से लंबी अवधि के औसत रिटर्न को लेकर है।

शॉर्ट टर्म में बाजार रह सकता है दायरे में

रामदेव अग्रवाल ने शॉर्ट टर्म में भारतीय शेयर बाजार को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही है। उनके अनुसार, करीब दो साल की सुस्ती के बाद बाजार में तेजी के अगले बड़े चरण से पहले कुछ समय तक शेयर बाजार एक दायरे में कारोबार कर सकता है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसी स्थिति अगले एक साल तक बनी रहना संभव है। यानी निवेशकों को तत्काल बड़ी तेजी की उम्मीद करने के बजाय बाजार की कमाई और वैल्यूएशन पर नजर रखनी चाहिए।

अग्रवाल के अनुसार, निफ्टी फिलहाल अपनी कमाई के मुकाबले करीब 20 गुना वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है। अगर कंपनियों की कमाई में करीब 15 फीसदी की वृद्धि होती है और इंडेक्स भी आगे बढ़ता है, तो समय के साथ बाजार का वैल्यूएशन करीब 17 गुना तक आ सकता है।

उनका मानना है कि मौजूदा स्तरों से बाजार में 15-20 फीसदी तक की बढ़त की संभावना सबसे अधिक दिखाई देती है।

FII की बिकवाली कम होना भारत के लिए अच्छी खबर

भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII का रुख लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। विदेशी निवेशक जब भारत में बड़ी मात्रा में पैसा लगाते हैं तो बाजार को सपोर्ट मिलता है। वहीं, लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है।

रामदेव अग्रवाल के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की भारत में दिलचस्पी कम होने की एक वजह दूसरे बाजारों में बेहतर मोमेंटम होना है। अमेरिका के अलावा कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई बाजारों में भी विदेशी निवेशकों को मजबूत कमाई और तेजी के अवसर दिखाई दे रहे हैं।

उनका कहना है कि ग्लोबल निवेश के लिए अमेरिका से मुकाबला करना भी आसान नहीं है। विदेशी निवेशक आमतौर पर उन बाजारों में पैसा लगाना पसंद करते हैं जहां कमाई और शेयरों की कीमतों में तेजी का मोमेंटम मजबूत दिखाई देता है।

हालांकि, अग्रवाल को अब भारत में FII की बिकवाली के दबाव में कुछ सुधार नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशक भारत में ‘बिकवाली रोकने’ के मूड में हैं। उनके अनुसार, अगर FII की लगातार बिकवाली रुकती है तो इससे बाजार की बड़ी समस्याओं में से करीब 90 फीसदी समस्या दूर हो सकती है।

विदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल गेन्स टैक्स क्यों चिंता का विषय?

रामदेव अग्रवाल ने भारत के कैपिटल गेन्स टैक्स सिस्टम पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने माना कि भारत की टैक्स व्यवस्था विदेशी निवेशकों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है, लेकिन यह FII की भारत से दूरी का सबसे बड़ा कारण नहीं है।

उनके मुताबिक, करेंसी में उतार-चढ़ाव विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा बड़ी चिंता हो सकती है।

विदेशी निवेशक भारत में आमतौर पर डॉलर के जरिए निवेश करते हैं, जबकि भारत में कैपिटल गेन्स की गणना रुपये में होती है। अगर निवेश की अवधि के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है तो डॉलर में निवेशक का वास्तविक रिटर्न काफी कम हो सकता है।

ऐसी स्थिति में एक विदेशी निवेशक को रुपये में कैपिटल गेन्स दिखाई देने पर भारत में टैक्स देना पड़ सकता है, जबकि डॉलर में निवेश की वास्तविक वैल्यू में बहुत कम बढ़ोतरी हुई हो या रिटर्न लगभग खत्म हो गया हो।

अग्रवाल का मानना है कि अगर भारत को विदेशी निवेशकों के साथ लंबे समय तक मजबूत संबंध बनाए रखने हैं तो उसे यह देखना चाहिए कि उसका कैपिटल गेन्स टैक्स सिस्टम दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में कितना प्रतिस्पर्धी है।

भारत में मौजूदा व्यवस्था के तहत कुछ शॉर्ट-टर्म इक्विटी कैपिटल गेन्स पर 20 फीसदी और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर 12.5 फीसदी टैक्स लागू है। हालांकि, विदेशी निवेशकों के मामले में संबंधित टैक्स संधियां और निवेश की संरचना भी अंतिम टैक्स देनदारी को प्रभावित कर सकती हैं।

नई पीढ़ी की कंपनियों को IPO से पहले क्या करना चाहिए?

रामदेव अग्रवाल ने नई पीढ़ी की कंपनियों और स्टार्टअप्स को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी कंपनी को पब्लिक मार्केट में उतरने से पहले अपने बिजनेस मॉडल और मुनाफे की दिशा को लेकर स्पष्ट होना चाहिए।

उनका संदेश है कि कंपनियों को IPO लाने से पहले या तो मुनाफे में होना चाहिए या फिर मुनाफे तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता दिखना चाहिए।

पब्लिक मार्केट के निवेशक किसी कंपनी के प्रदर्शन को मुख्य रूप से उसके तिमाही नतीजों, रेवेन्यू, मुनाफे और कैश फ्लो जैसे आंकड़ों के आधार पर देखते हैं। इसलिए ऐसी कंपनियों का मूल्यांकन करना मुश्किल हो सकता है जो तेजी से बढ़ रही हों लेकिन लगातार बड़े घाटे में चल रही हों।

अग्रवाल ने कहा कि एक बड़ा प्राइवेट निवेशक भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किसी घाटे में चल रही कंपनी को समझ सकता है, लेकिन पब्लिक मार्केट के लिए ऐसा करना ज्यादा मुश्किल होता है।

Zepto के निवेश पर बोले- फैसला अभी नहीं होगा

रामदेव अग्रवाल क्विक-कॉमर्स कंपनी Zepto में निवेश कर चुके हैं। कंपनी के IPO की तैयारियों और लिस्टिंग योजना के संदर्भ में भी उन्होंने अपनी राय रखी।

उनका मानना है कि संभव है कि Zepto ने बिजनेस के पूरी तरह तैयार होने से पहले ही पब्लिक मार्केट में जाने की कोशिश की हो। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी उद्यमी को ऐसी मुश्किल स्थिति से गुजरते हुए नहीं देखना चाहते।

Zepto ने दिसंबर 2025 में गोपनीय तरीके से IPO के लिए आवेदन किया था और बाद में जून 2026 में अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर जमा किए। अपडेटेड दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी मौजूदा शेयरधारकों की ओर से ऑफर फॉर सेल के साथ करीब ₹8,010 करोड़ तक के नए शेयर जारी करने की योजना बना रही थी।

वित्त वर्ष 2025-26 में Zepto का रेवेन्यू दोगुने से ज्यादा हुआ, लेकिन कंपनी का घाटा बढ़कर करीब ₹5,905 करोड़ पहुंच गया। इसके बाद कंपनी ने अपनी लिस्टिंग योजना को दो से तीन तिमाही के लिए टाल दिया। कंपनी ने बिजनेस प्लान पर काम जारी रखने के साथ प्री-IPO फाइनेंसिंग राउंड की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।

‘मेरा निवेश फेल रहा या नहीं, यह 10 साल बाद तय होगा’

जब रामदेव अग्रवाल से Zepto में उनके निवेश के अनुभव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसे तत्काल सफलता या असफलता के पैमाने पर आंकने से इनकार किया।

उनका कहना था कि किसी निवेश की सफलता का फैसला कुछ महीनों या एक-दो साल में नहीं किया जा सकता। खासकर नई पीढ़ी की कंपनियों में निवेश का मूल्यांकन लंबी अवधि में किया जाना चाहिए।

अग्रवाल ने इसी संदर्भ में कहा, ‘मेरा निवेश फेल रहा या नहीं, यह 10 साल बाद तय होगा, अभी नहीं।’

उनका यह बयान निवेश के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत की ओर भी इशारा करता है—किसी कंपनी के शेयर या बिजनेस में निवेश का मूल्यांकन सिर्फ मौजूदा उतार-चढ़ाव देखकर नहीं किया जाना चाहिए। कंपनी का बिजनेस मॉडल, कमाई की क्षमता, बाजार का आकार और लंबे समय में पूंजी पर मिलने वाला रिटर्न ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है रामदेव अग्रवाल का संदेश?

रामदेव अग्रवाल की टिप्पणियों से भारतीय शेयर बाजार को लेकर एक मिला-जुला लेकिन लंबी अवधि में सकारात्मक नजरिया सामने आता है। उनका मानना है कि निकट अवधि में बाजार सीमित दायरे में रह सकता है और उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं, अगले पांच वर्षों में मजबूत आर्थिक विकास और कॉरपोरेट कमाई के दम पर भारतीय इक्विटी से करीब 15 फीसदी सालाना रिटर्न मिलने की संभावना है।

हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 15 फीसदी रिटर्न एक अनुमान है, गारंटी नहीं। शेयर बाजार में जोखिम बना रहता है और वास्तविक रिटर्न आर्थिक परिस्थितियों, कंपनियों की कमाई, ब्याज दरों, विदेशी निवेश, रुपये की चाल और वैश्विक बाजारों जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सिर्फ बाजार के अनुमानित रिटर्न पर निर्भर रहने के बजाय कंपनियों की गुणवत्ता, वैल्यूएशन और अपने जोखिम प्रोफाइल को ध्यान में रखना जरूरी है।

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TAGGED: 15% Return, Indian stock market, Indian stocks, Raamdeo Agrawal Expectations, Ramdev Agrawal, Stock Market Outlook, भारतीय शेयर बाजार, रामदेव अग्रवाल, शेयर बाजार से 15 फीसदी रिटर्न
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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