Jharkhand JSSC-CGL Exam Cancelled: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार बड़े फैसले तक पहुंच गया है। 24 दिनों से जारी प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया है। सरकार ने इसके साथ ही परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की दिशा में भी कदम उठाने का संकेत दिया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने JSSC-CGL के अलावा TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं और उनसे जुड़ी गतिविधियों को भी रद्द करने की बात कही। सरकार वर्ष 2014 से अब तक हुई छोटी-बड़ी गड़बड़ियों की जांच कराने की तैयारी में है।
JSSC-CGL परीक्षा क्यों हुई रद्द?
#WATCH | Ranchi: Jharkhand CM Hemant Soren says, "Today, the Cabinet decided to cancel the JSSC-CGL examinations as well. Furthermore, a comprehensive inquiry will be conducted into all errors—minor or major—that have occurred since 2014. We will also soon convene to discuss the… pic.twitter.com/9jnEdbUaHx
— ANI (@ANI) August 17, 2026 झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना, भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाना शामिल था।
सोमवार को छात्रों का आंदोलन 24वें दिन में प्रवेश कर गया। इसी बीच सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत का नया दौर शुरू हुआ और कैबिनेट बैठक के बाद JSSC-CGL को रद्द करने का फैसला सामने आया।
2024 में हुई थी JSSC-CGL परीक्षा
जिस परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया है, वह Jharkhand General Graduate Level Combined Competitive Examination (JGGLCCE) से जुड़ी है। परीक्षा प्रक्रिया पहले भी विवादों में रही है।
झारखंड हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक JSSC ने JGGLCCE-2023 के लिए करीब 6.40 लाख अभ्यर्थियों के आवेदन प्राप्त किए थे। परीक्षा की शुरुआती तारीख जनवरी-फरवरी 2024 रखी गई थी, लेकिन कथित पेपर लीक के कारण उसे रद्द करना पड़ा। इसके बाद परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को दोबारा आयोजित की गई थी।
इस परीक्षा को लेकर पहले भी जांच हुई थी। हाईकोर्ट में पेश रिकॉर्ड के अनुसार जांच में अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे वसूलने के पर्याप्त सबूत मिलने की बात सामने आई थी, हालांकि उस समय जांच में पूरे प्रश्नपत्र के संगठित तरीके से लीक होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला था।
यही वजह है कि परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर छात्रों के बीच लंबे समय से असंतोष बना हुआ था।
24 दिन से आंदोलन कर रहे थे छात्र
रांची में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी पिछले 24 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों का कहना था कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।
प्रदर्शनकारियों की मांग केवल एक परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं थी। वे JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की मांग कर रहे थे।
सरकार की ओर से इससे पहले भी छात्रों के साथ बातचीत की कोशिश की गई थी। लेकिन कई दौर की बातचीत के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। 17 अगस्त को सरकार ने फिर बातचीत की पहल की और इसी दिन कैबिनेट ने JSSC-CGL को रद्द करने का फैसला किया।
TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर भी बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री के बयान के मुताबिक सरकार ने TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं और उससे जुड़ी गतिविधियों को रद्द करने का फैसला भी लिया है। इसका दायरा केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं बताया गया है।
सरकार ने संकेत दिया है कि 2014 से अब तक परीक्षा व्यवस्था में हुई छोटी-बड़ी गलतियों की व्यापक जांच की जाएगी। TDPL के माध्यम से कराई गई परीक्षाओं की जांच को लेकर भी सरकार पहले से तैयारी कर रही थी।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छात्रों के आंदोलन का एक बड़ा मुद्दा परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों और पूरी भर्ती प्रक्रिया की जवाबदेही तय करना रहा है।
परीक्षा में नकल और धोखाधड़ी पर सख्त कानून की तैयारी
हेमंत सोरेन ने यह भी कहा है कि झारखंड में केंद्र के नए परीक्षा कानून को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में नकल, धोखाधड़ी और संगठित परीक्षा अपराधों पर सख्ती करना है।
सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए नियमों और प्रक्रियाओं पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, किसी कानून के तहत कितनी सजा या जुर्माने का प्रावधान झारखंड में लागू होगा, यह राज्य में उसके औपचारिक रूप से लागू किए जाने और संबंधित अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।
इसलिए परीक्षा कानून से जुड़े दंड के आंकड़ों को फिलहाल अंतिम राज्य नियम मानना उचित नहीं होगा।
सरकार ने 2014 से जांच का किया ऐलान
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि 2014 से अब तक हुई छोटी-बड़ी गलतियों की पूरी जांच की जाएगी। सरकार की ओर से भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की शिकायतों को लेकर जांच तंत्र को मजबूत करने की बात भी कही गई है।
इस फैसले का असर केवल वर्तमान JSSC-CGL विवाद तक सीमित नहीं रह सकता। यदि पुरानी परीक्षाओं की भी जांच होती है तो आने वाले समय में कई भर्ती प्रक्रियाओं की वैधता और उनमें अपनाई गई प्रक्रिया पर सवालों की दोबारा समीक्षा हो सकती है।
छात्रों ने फैसले का किया स्वागत, लेकिन आंदोलन पर अभी भी नजर
JSSC-CGL रद्द होने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों में राहत और उत्साह देखने को मिला। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए फूलप्रूफ और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था जरूरी है।
हालांकि छात्रों की सभी मांगें पूरी हो गई हैं, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। प्रदर्शनकारियों की ओर से CBI जांच समेत व्यापक सुधारों की मांग भी उठाई गई है। सरकार ने कुछ प्रमुख मांगों पर कदम जरूर उठाया है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त होगा या नहीं, यह आगे की बातचीत और सरकार के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।
लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ेगा असर
JSSC-CGL जैसी परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने का सीधा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ेगा जिन्होंने लंबे समय तक तैयारी की थी और चयन प्रक्रिया के अगले चरण का इंतजार कर रहे थे।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नई परीक्षा कब आयोजित होगी और पुरानी परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के लिए सरकार क्या व्यवस्था करेगी? नई भर्ती प्रक्रिया में पुराने अभ्यर्थियों को सीधे मौका मिलेगा या उन्हें दोबारा आवेदन करना होगा, इस बारे में आधिकारिक दिशा-निर्देश का इंतजार रहेगा।
अभ्यर्थियों के लिए यह भी जरूरी होगा कि वे JSSC की आधिकारिक वेबसाइट और सरकारी अधिसूचनाओं पर नजर रखें। केवल सोशल मीडिया पर चल रही तारीखों या दावों के आधार पर तैयारी या आवेदन से जुड़ा फैसला न लें।
आगे क्या होगा?
हेमंत सोरेन सरकार के इस फैसले के बाद अब तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण होंगी—
- JSSC-CGL की नई परीक्षा प्रक्रिया कब शुरू होती है।
- 2014 से अब तक की भर्ती परीक्षाओं की जांच किस तरह की जाती है।
- भविष्य की परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं को रोकने के लिए क्या नई व्यवस्था लागू होती है।
झारखंड में पिछले कुछ सप्ताह से चल रहे छात्र आंदोलन ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बना दिया है। JSSC-CGL को रद्द करने का फैसला छात्रों की प्रमुख मांग को पूरा करता है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में भरोसा वापस लाने के लिए केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं होगा। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और विवाद-मुक्त तरीके से पूरा करने की होगी।
नोट: JSSC-CGL से जुड़ी कथित पेपर लीक या अनियमितताओं को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए जब तक किसी जांच एजेंसी या अदालत की ओर से अंतिम निष्कर्ष न हो, इन आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं बल्कि आरोप/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


