Dr Surinder Kapur Success Story: भारत में बिजनेस की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां किसी कारोबारी ने पुश्तैनी कारोबार को आगे बढ़ाने के बजाय बिल्कुल अलग क्षेत्र चुना और अपनी पहचान बनाई। ऐसी ही कहानी दिवंगत उद्योगपति डॉ. सुरिंदर कपूर की है। उनका परिवार पीढ़ियों से सोने-चांदी के कारोबार से जुड़ा था, लेकिन सुरिंदर कपूर ने इंजीनियरिंग को अपना रास्ता बनाया। आगे चलकर उन्होंने ऑटोमोबाइल सेक्टर में कदम रखा और सोना स्टीयरिंग सिस्टम्स की नींव रखी, जिसने आगे चलकर सोना ग्रुप को भारत की प्रमुख ऑटो-कंपोनेंट कंपनियों में पहुंचाया।
आज इसी कारोबारी विरासत से विकसित Sona BLW Precision Forgings यानी Sona Comstar वैश्विक मोबिलिटी टेक्नोलॉजी कंपनी बन चुकी है। कंपनी के मुताबिक उसके कारोबार का विस्तार ऑटोमोबाइल से आगे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेंसर, सॉफ्टवेयर और रेलवे जैसे क्षेत्रों तक हो चुका है।
Highlights
- सुरिंदर कपूर ने पुश्तैनी ज्वेलरी कारोबार के बजाय इंजीनियरिंग को करियर बनाया।
- अमेरिका में इंजीनियरिंग की पढ़ाई और PhD करने के बाद भारत लौटे।
- ऑटो-कंपोनेंट कारोबार का अनुभव उन्हें अपने ससुर की कंपनी भारत गियर्स में मिला।
- 1980 के दशक में भारत में बढ़ते ऑटोमोबाइल बाजार को उन्होंने बड़ा अवसर माना।
- सोना स्टीयरिंग सिस्टम्स से शुरू हुआ कारोबार आगे चलकर Sona Comstar जैसी वैश्विक कंपनी में बदला।
लाहौर से शुरू हुआ था परिवार का सोने का कारोबार
सुरिंदर कपूर का परिवार पारंपरिक रूप से ज्वेलरी कारोबार से जुड़ा था। परिवार के कारोबार की शुरुआत लाहौर में हुई थी और विभाजन के बाद यह कारोबार दिल्ली आ गया।
दिल्ली के कनॉट प्लेस में कपूर परिवार की ‘कपूर दी हट्टी’ नाम से ज्वेलरी की दुकान भी रही है। यानी जिस परिवार की पहचान सोने-चांदी के कारोबार से थी, उसी परिवार के एक सदस्य ने आगे चलकर ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
यही वजह है कि सुरिंदर कपूर की कहानी सिर्फ एक कंपनी बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण भी है कि कारोबारी परिवार में जन्म लेना और उसी कारोबार को आगे बढ़ाना हमेशा जरूरी नहीं होता।
पिता ने कहा- तुम्हें इंजीनियर बनना है
सुरिंदर कपूर छह भाइयों में से एक थे। परिवार के अन्य सदस्यों की तरह उनके सामने भी पारिवारिक कारोबार को आगे बढ़ाने का विकल्प था। लेकिन उनके पिता उनके इरादों को समझते थे।
बताया जाता है कि एक पारिवारिक चर्चा के दौरान यह तय किया गया कि कौन बेटा परिवार के कारोबार में जाएगा और कौन अपनी पसंद का क्षेत्र चुनेगा। सुरिंदर कपूर के लिए इंजीनियरिंग का रास्ता चुना गया।
इसके बाद वह अमेरिका चले गए और University of Michigan से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उन्होंने आगे चलकर इंजीनियरिंग में PhD भी हासिल की।
यह फैसला आगे चलकर उनके पूरे करियर की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
अमेरिका की नौकरी छोड़ भारत लौटे
अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद सुरिंदर कपूर के पास वहां काम करने का मौका था। लेकिन उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया।
भारत आने के बाद उनकी शादी रानी कपूर से हुई, जो उद्योगपति रौनक सिंह की बेटी थीं। रौनक सिंह को भारत में अपोलो टायर्स के संस्थापक के तौर पर जाना जाता है।
शादी के बाद सुरिंदर कपूर ने अपने ससुर की कंपनी भारत गियर्स में काम किया। यहीं से उन्हें ऑटो-कंपोनेंट निर्माण की बारीकियों को करीब से समझने का अवसर मिला।
यानी इंजीनियरिंग की पढ़ाई, विदेश का अनुभव और भारत में ऑटो-कंपोनेंट कारोबार का व्यावहारिक अनुभव—इन तीनों ने उनके लिए आगे का रास्ता तैयार कर दिया।
80 के दशक में ‘मारुति’ में देखा बड़ा मौका
सुरिंदर कपूर के कारोबारी सफर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 1980 के दशक में आया। उस समय भारत में पैसेंजर कार बाजार तेजी से बदल रहा था और मारुति सुजुकी के आने से कारों की बिक्री और ऑटो-कंपोनेंट की मांग बढ़ने लगी थी।
उस दौर में भारत का ऑटो-कंपोनेंट उद्योग आज की तरह बड़ा और विविध नहीं था। सुरिंदर कपूर ने इसी कमी को अवसर के तौर पर देखा।
उन्होंने महसूस किया कि भारत में कारों की संख्या बढ़ेगी तो उनके कलपुर्जों की मांग भी बढ़ेगी। यही सोच उनके नए बिजनेस की नींव बनी।
1987 में शुरू हुई सोना स्टीयरिंग सिस्टम्स
सुरिंदर कपूर ने 1987 में Sona Steering Systems की शुरुआत की। यह कारोबार ऑटोमोबाइल के स्टीयरिंग सिस्टम और उससे जुड़े कंपोनेंट पर केंद्रित था।
कंपनी की शुरुआत के पीछे उनका उद्देश्य सिर्फ ऑटो पार्ट्स बनाना नहीं था, बल्कि भारत में बढ़ते वाहन उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कंपोनेंट तैयार करना था।
यही वह दौर था जब भारत में ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ ऑटो एंसिलरी सेक्टर भी अपनी मजबूत नींव तैयार कर रहा था।
बाद में सोना ग्रुप ने अपने कारोबार का विस्तार किया और कंपनी का सफर कई चरणों से गुजरते हुए आज Sona Comstar तक पहुंचा।
कंपनी के नाम में भी बचाए रखी पारिवारिक विरासत
दिलचस्प बात यह है कि सुरिंदर कपूर ने भले ही पुश्तैनी सोने का कारोबार छोड़ दिया था, लेकिन उन्होंने अपनी पारिवारिक पहचान को पूरी तरह पीछे नहीं छोड़ा।
उन्होंने नई कंपनी का नाम ‘Sona’ रखा। यानी सोने के पारिवारिक कारोबार की याद को उन्होंने इंजीनियरिंग और ऑटो-कंपोनेंट कारोबार के साथ जोड़ दिया।
इस तरह एक तरफ परिवार की विरासत कायम रही और दूसरी तरफ कारोबार का क्षेत्र पूरी तरह बदल गया।
छोटी शुरुआत से ग्लोबल मोबिलिटी कंपनी तक
सुरिंदर कपूर के समय शुरू हुआ कारोबार आगे कई चरणों में विकसित हुआ। आज Sona Comstar खुद को वैश्विक मोबिलिटी टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में पेश करती है।
कंपनी के अनुसार उसके पास भारत, अमेरिका, मैक्सिको और चीन में मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली सुविधाएं हैं। कंपनी का 50% से ज्यादा बिक्री कारोबार अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल से जुड़े उत्पाद भी उसके कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
कंपनी ने 2019 में Comstar Automotive का अधिग्रहण किया, जिससे मोटर टेक्नोलॉजी क्षमताओं का विस्तार हुआ और Sona Comstar ब्रांड अस्तित्व में आया। इसके बाद कंपनी ने सेंसर और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भी विस्तार किया।
आज सिर्फ कारों के कलपुर्जों तक सीमित नहीं
सुरिंदर कपूर ने जिस कारोबार की शुरुआत स्टीयरिंग सिस्टम से की थी, वह आज काफी आगे निकल चुका है।
Sona Comstar अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए ड्राइवट्रेन और ट्रैक्शन मोटर जैसे उत्पादों पर काम करती है। कंपनी ने सेंसर और सॉफ्टवेयर क्षमताओं के लिए NOVELIC में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की। इसके अलावा 2025 में कंपनी ने Escorts Kubota का रेलवे बिजनेस भी खरीदा।
कंपनी की टेक्नोलॉजी रोडमैप में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के साथ ड्रोन, eVTOL, ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोट, इंडस्ट्रियल रोबोट और ह्यूमनॉइड जैसे उभरते क्षेत्र भी शामिल हैं।
50,000 करोड़ के करीब पहुंची कंपनी
सुरिंदर कपूर ने जिस बिजनेस की नींव रखी थी, उसकी कारोबारी वैल्यू आज कई हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। जुलाई 2026 के अंत में उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक Sona BLW Precision Forgings का मार्केट कैप करीब ₹47,500 करोड़ था। इसलिए इसे करीब ₹50,000 करोड़ की कंपनी कहना मौजूदा बाजार स्तर के संदर्भ में समझा जा सकता है।
ध्यान रहे कि मार्केट कैप कंपनी की बिक्री या मुनाफा नहीं होता, बल्कि शेयर बाजार में कंपनी के कुल शेयरों की बाजार कीमत को दर्शाता है। शेयर भाव बदलने के साथ यह आंकड़ा भी बदलता रहता है।
2015 में हुआ सुरिंदर कपूर का निधन
सुरिंदर कपूर का निधन 2015 में हुआ। उनके बाद उनके बेटे संजय कपूर ने कंपनी की कमान संभाली और कारोबार को आगे बढ़ाया। Sona Comstar की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक संजय कपूर ने 2015 में अपने पिता के निधन के बाद कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभाली और बाद में कंपनी के ग्लोबल विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई टेक्नोलॉजी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2025 में संजय कपूर के निधन के बाद कंपनी के नेतृत्व में भी बदलाव आया। लेकिन सुरिंदर कपूर द्वारा खड़ी की गई कारोबारी नींव आज भी कंपनी की पहचान का अहम हिस्सा है।
सोने से शुरू हुई कहानी, ऑटोमोबाइल तक पहुंची
सुरिंदर कपूर की कहानी की सबसे खास बात यही है कि उन्होंने अपने परिवार के पारंपरिक सोने के कारोबार को छोड़कर ऐसा क्षेत्र चुना, जो उस समय भारत में शुरुआती दौर में था।
उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई को सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे बिजनेस का आधार बनाया। मारुति के दौर में बढ़ते ऑटोमोबाइल बाजार और भारत में ऑटो-कंपोनेंट की जरूरत को उन्होंने समय रहते पहचाना।
1987 में शुरू हुआ Sona Steering Systems का सफर आज एक ऐसी कंपनी में बदल चुका है जो ऑटोमोबाइल से लेकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रेलवे तक कई क्षेत्रों में काम कर रही है।
यही सुरिंदर कपूर की कहानी का सबसे बड़ा सबक है—कभी-कभी सबसे बड़ा बिजनेस उस विरासत को आगे बढ़ाने में नहीं, बल्कि अपनी क्षमता के हिसाब से बिल्कुल नया रास्ता चुनने में छिपा होता है।


