FAST-DS Scheme: छोटे करदाताओं को विदेश में छूटी अघोषित संपत्ति और आमदनी का खुलासा करने का मौका मिला है। 31 दिसंबर तक तय टैक्स या फीस चुकाकर ब्लैक मनी कानून के तहत कार्रवाई से राहत मिल सकती है।
नई दिल्ली: विदेश में मौजूद ऐसी संपत्ति या आमदनी, जिसकी जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में देना छूट गई है, उसे घोषित करने का मौका अब मिल गया है। आयकर विभाग ने छोटे करदाताओं के लिए Foreign Assets of Small Taxpayer Disclosure Scheme (FAST-DS) को लागू कर दिया है। यह वन-टाइम स्कीम 16 अगस्त 2026 से शुरू हुई है और 31 दिसंबर 2026 तक इसका लाभ लिया जा सकता है।
इस योजना की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में की थी। इसका उद्देश्य उन छोटे करदाताओं को राहत देना है, जिनसे विदेश में मौजूद संपत्ति या आय की जानकारी रिटर्न में देना छूट गई। तय शर्तें पूरी करने और निर्धारित टैक्स या फीस का भुगतान करने पर ब्लैक मनी कानून के तहत मुकदमे और अतिरिक्त जुर्माने से राहत मिल सकती है।
क्या है FAST-DS स्कीम?
FAST-DS यानी Foreign Assets of Small Taxpayer Disclosure Scheme एक विशेष वन-टाइम डिस्क्लोजर योजना है। इसके तहत पात्र छोटे करदाता अपनी कुछ अघोषित विदेशी संपत्तियों या आमदनी की जानकारी देकर उन्हें नियमित कर सकते हैं।
यह योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्होंने विदेश में पढ़ाई या नौकरी के दौरान बैंक अकाउंट, निवेश या दूसरी संपत्ति हासिल की, लेकिन बाद में भारत में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय उसकी जानकारी देना भूल गए।
FAST-DS के 5 बड़े नियम
1. किन लोगों को मिलेगा मौका?
इस योजना में ऐसे छोटे करदाता शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने विदेश में संपत्ति या आमदनी हासिल की है लेकिन उसे अपने इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित नहीं किया।
इसमें विदेश जाने वाले छात्र, युवा प्रोफेशनल, टेक कर्मचारी और NRI जैसे लोग शामिल हो सकते हैं, बशर्ते वे योजना की निर्धारित पात्रता और अन्य शर्तों को पूरा करते हों।
अगर किसी व्यक्ति से विदेशी बैंक अकाउंट, निवेश या अन्य पात्र विदेशी संपत्ति की जानकारी रिटर्न में देना छूट गई है, तो वह योजना के तहत उसका खुलासा कर सकता है।
2. पहली श्रेणी में 60% तक प्रभावी टैक्स
FAST-DS की पहली श्रेणी में ऐसी अघोषित विदेशी संपत्ति आती है, जिसकी पहले जानकारी नहीं दी गई और जिसकी कीमत 1 करोड़ रुपये तक है।
ऐसी संपत्ति पर 31 मार्च 2026 की फेयर मार्केट वैल्यू का 30% टैक्स देना होगा। इसके अलावा उतनी ही राशि यानी 30% अतिरिक्त रकम देनी होगी।
इस तरह कुल प्रभावी भुगतान 60% तक हो सकता है।
3. पहले से टैक्स चुकाई रकम से खरीदी संपत्ति पर फीस
दूसरी श्रेणी में ऐसी विदेशी संपत्ति आती है, जिसे पहले से टैक्स चुकाई गई आमदनी से खरीदा गया हो या जिसे किसी व्यक्ति ने NRI रहते हुए हासिल किया हो, लेकिन बाद में भारतीय टैक्स रिटर्न में इसकी जानकारी देना भूल गया।
ऐसी स्थिति में 5 करोड़ रुपये तक की संपत्ति पर 1 लाख रुपये की फीस का प्रावधान है।
हालांकि, 5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति इस सुविधा के दायरे में नहीं आएगी। इसलिए इस श्रेणी में आने वाले करदाताओं के लिए पात्रता की शर्तों को ध्यान से देखना जरूरी है।
4. टैक्स या फीस देने पर मुकदमे और जुर्माने से राहत
FAST-DS के तहत निर्धारित टैक्स या फीस का भुगतान करने पर पात्र घोषित संपत्ति या आमदनी को लेकर ब्लैक मनी कानून के तहत मुकदमे और अतिरिक्त जुर्माने से राहत मिल सकती है।
घोषित संपत्ति या आमदनी को ब्लैक मनी एक्ट के तहत कुल आय में दोबारा शामिल नहीं किया जाएगा।
हालांकि, इसका लाभ तभी मिलेगा जब करदाता योजना की सभी शर्तों को पूरा करे और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार घोषणा तथा भुगतान करे।
5. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी
CBDT के अनुसार, FAST-DS के तहत विदेशी संपत्ति या आमदनी का खुलासा और निर्धारित टैक्स या फीस का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा।
इसका उद्देश्य डिस्क्लोजर प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाना है। करदाताओं को घोषणा करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी संपत्ति योजना के दायरे में आती है और उनके पास उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध हैं।
किन मामलों में नहीं मिलेगा फायदा?
FAST-DS हर तरह की विदेशी संपत्ति या आय पर लागू नहीं होगी। खास तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग या अपराध से हासिल संपत्ति इस योजना के दायरे से बाहर है।
इसलिए केवल विदेशी संपत्ति होने से योजना का लाभ स्वतः नहीं मिल जाएगा। संपत्ति के स्रोत, उसकी प्रकृति, मूल्य और करदाता की स्थिति के आधार पर पात्रता तय होगी।
31 दिसंबर है आखिरी तारीख
FAST-DS एक वन-टाइम डिस्क्लोजर स्कीम है। इसका लाभ लेने के लिए पात्र करदाताओं को 31 दिसंबर 2026 की समयसीमा का ध्यान रखना होगा।
अगर किसी छोटे करदाता से विदेश में मौजूद पात्र संपत्ति या आमदनी की जानकारी रिटर्न में देना छूट गई है, तो उसे समयसीमा से पहले योजना की शर्तों की जांच कर उचित घोषणा करनी चाहिए। खासकर बड़ी रकम या जटिल विदेशी संपत्ति के मामलों में प्रक्रिया पूरी करने से पहले टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
नोट: FAST-DS के तहत राहत पात्रता और निर्धारित शर्तों के पालन पर निर्भर है। किसी भी घोषणा या भुगतान से पहले आयकर विभाग के आधिकारिक निर्देशों और लागू नियमों की जांच जरूर करें।


