भारत की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। भारत सरकार के India Tourism Data Compendium 2025 के मुताबिक, देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में पर्यटन क्षेत्र का कुल योगदान 5.22% है। वहीं, देश के कुल रोजगार में पर्यटन क्षेत्र की हिस्सेदारी 13.14% बताई गई है। यही वजह है कि कई राज्य पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार बढ़ाने के बड़े माध्यम के तौर पर विकसित कर रहे हैं।
केरल, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्य पर्यटन के क्षेत्र में पहले से काफी सक्रिय हैं। अब पूर्वोत्तर भारत का अरुणाचल प्रदेश भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य सिर्फ ईटानगर और तवांग तक पर्यटकों को सीमित रखने के बजाय उन्हें राज्य के दूर-दराज और कम एक्सप्लोर किए गए इलाकों तक पहुंचाना है।
मेचुखा घाटी पर खास फोकस

अरुणाचल प्रदेश क्षेत्रफल के लिहाज से पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक है। इसका कुल क्षेत्रफल करीब 83,743 वर्ग किलोमीटर है। राज्य की सीमाएं भूटान और चीन से लगती हैं। हिमालयी भूगोल, ऊंचे पहाड़, नदियां, घाटियां, जंगल और समृद्ध जनजातीय संस्कृति इसे एडवेंचर और प्रकृति पर्यटन के लिए खास बनाते हैं।
हालांकि, देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के बीच अरुणाचल प्रदेश का मतलब अक्सर ईटानगर और तवांग तक सीमित रह जाता है। राज्य सरकार अब इस धारणा को बदलना चाहती है।
इसी रणनीति के तहत मेचुखा घाटी को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित और प्रमोट किया जा रहा है। राज्य के पर्यटन मंत्री पसांग दोर्जी सोना के मुताबिक, अरुणाचल को सिर्फ देखकर नहीं बल्कि वहां पहुंचकर और स्थानीय जीवन के करीब जाकर महसूस किया जा सकता है।
मेचुखा ट्राउट क्वेस्ट से बढ़ेगा एडवेंचर टूरिज्म

मेचुखा को एडवेंचर टूरिज्म के केंद्र के तौर पर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर भी जोर दे रही है।
जुलाई में यहां Mechukha Trout Quest 2.0 का आयोजन किया गया। इसमें भारत के अलावा थाईलैंड और भूटान समेत दूसरे देशों के विशेषज्ञ एंगलर्स ने हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में कुल 56 एंगलर्स शामिल हुए।
राज्य सरकार अब इस आयोजन को हर साल कराने की योजना बना रही है। इसका मकसद सिर्फ प्रतियोगिता कराना नहीं, बल्कि इसके जरिए मेचुखा घाटी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच पहचान दिलाना भी है।
सरकार नवंबर में भी एक बड़े आयोजन की तैयारी कर रही है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय होटल, होमस्टे, टैक्सी, गाइड, रेस्तरां और अन्य छोटे कारोबारों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार भी मेचुखा को मानती है खास

मेचुखा को लेकर केंद्र सरकार की भी बड़ी योजना है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसे भारत का ‘एडवेंचर कैपिटल’ बनने की क्षमता वाला क्षेत्र बताया है।
मेचुखा चीन की सीमा के करीब स्थित है और यहां प्राकृतिक खूबसूरती के साथ बौद्ध धर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल भी मौजूद हैं। इस वजह से यहां एडवेंचर टूरिज्म के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी विकसित किया जा सकता है।
केंद्र सरकार पूर्वोत्तर में बुद्धिस्ट सर्किट को विकसित करने पर भी जोर दे रही है। इससे अरुणाचल प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
पर्यटन का GDP में 5.22% योगदान

India Tourism Data Compendium 2025 के आंकड़े बताते हैं कि भारत के GDP में पर्यटन क्षेत्र का कुल योगदान 5.22% है। इसमें प्रत्यक्ष योगदान 2.72% है।
रोजगार के लिहाज से भी पर्यटन काफी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल रोजगार में पर्यटन क्षेत्र का योगदान 13.14% है।
इसका सीधा मतलब है कि पर्यटन को बढ़ावा देने से सिर्फ होटल और ट्रैवल कंपनियों को फायदा नहीं होता, बल्कि स्थानीय स्तर पर टैक्सी ड्राइवर, टूर गाइड, दुकानदार, होमस्टे संचालक, रेस्तरां और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों की आमदनी भी बढ़ सकती है।
4.65 करोड़ लोगों को मिला रोजगार

वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (WTTC) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत के पर्यटन क्षेत्र ने करीब 46.5 मिलियन यानी 4.65 करोड़ लोगों को रोजगार दिया। यह देश के कुल रोजगार का करीब 9.1% है।
पर्यटन के विस्तार का असर हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री पर भी पड़ता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर होटल, होमस्टे, रेस्तरां, स्थानीय परिवहन और दूसरी सर्विस इंडस्ट्री में मांग बढ़ती है। इसका फायदा खासकर उन इलाकों को मिल सकता है जहां बड़े उद्योगों की संख्या कम है।
कोरोना के बाद दोगुने हुए घरेलू पर्यटक

अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन के आंकड़े भी इस सेक्टर की बढ़ती संभावनाओं की ओर इशारा करते हैं।
राज्य के पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में करीब 5.63 लाख घरेलू पर्यटक अरुणाचल प्रदेश पहुंचे थे। 2023 तक यह संख्या बढ़कर करीब 10.5 लाख हो गई। यानी कुछ ही वर्षों में घरेलू पर्यटकों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई।
विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2022 में राज्य में करीब 1,055 विदेशी पर्यटक पहुंचे थे। 2023 में यह संख्या बढ़कर 4,496 हो गई।
सिर्फ तवांग नहीं, पूरा अरुणाचल दिखाने की तैयारी
अरुणाचल प्रदेश की पर्यटन रणनीति का सबसे अहम हिस्सा यही है कि पर्यटकों को कुछ चुनिंदा शहरों और पर्यटन स्थलों तक सीमित न रखा जाए।
मेचुखा जैसे इलाकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने, एडवेंचर स्पोर्ट्स के आयोजन बढ़ाने और धार्मिक-सांस्कृतिक सर्किट विकसित करने से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
अगर सरकार बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, होमस्टे और स्थानीय पर्यटन सेवाओं को भी मजबूत करती है, तो अरुणाचल प्रदेश आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में अपनी अलग पहचान बना सकता है।


